23 November 2010

घर में बड़े सामाजिक-संस्कारित और यहाँ आकर पक्के......????


मानसिक दीवालियापन किसे कहते हैं यह देखने के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ता है। आपको केवल अपना कम्प्यूटर खोलना है और आ जाइये ब्लॉग संसार में। बस आपका काम हो गया। आपको एक दो नहीं बल्कि बहुत से मानसिक दीवालिये दिख जायेंगे।

चित्र गूगल छवियों से साभार

अब आप देखिएगा, इसी पर बहुतों को दिक्कत हो जायेगी। अरे! आप क्यों परेशान होते हैं? क्या आप इसी श्रेणी में आते हैं? नहीं , तो फिर जो इस कोटि के हैं उनको परेशान होने दीजिए। आप तो पढ़िये और विचार करिये।

ब्लॉग संसार पर भी मानव ही कार्य कर रहे हैं कोई जानवर नहीं। इसके अलावा सभी पढ़े लिखे लोग ही यहां हैं और अपने विचारों से समृद्धता फैला रहे हैं, कूड़ा फैलाने वाले भी हैं। इसके बाद भी वर्तमान में लगभग रोज ही आपको इस तरह के उदाहरण चारों ओर बिखरे मिल जायेंगे। आपको उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है।

यहां मन में कई बार विचार आता है कि व्यक्ति जब अपने आपमें समाहित होता है तो सही रहता है और जब वह अपने आसपास एक प्रकार का वातावरण निर्मित कर लेता है तो उलटा-पुलटा करने लगता है। इस उलट-पुलट में वह कुछ भी करने लगता है। यही वह ब्लॉग पर भी करता है।

हमें केवल यह सोचकर ब्लॉग पर लेखन नहीं करना है कि केवल हम और हम ही इसे पढ़ रहे हैं। हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमें देखने और पढ़ने वाला समूचा विश्व है। हमारे लिखे को वांचने वाले केवल हमारे मुहल्ले के लोग नहीं हैं। इनमें हमारे प्रदेश के, हमारे देश के और दूसरे देशों के लोग भी हैं। यह जानने के बाद भी हम क्यों अपने लेखन में शालीनता नहीं बरत पा रहे हैं?

हमें यहां एक बात गौर करनी होगी और याद भी रखनी होगी कि हर व्यक्ति के भीतर एक प्रकार का समाज स्थापित रहता है। वह अपने आपसे सामाजिकता बनाये रहता है और दूसरों के प्रति असामाजिक हो जाता है। इसको एक उदाहरण से इस तरह से समझा जा सकता है कि एक व्यक्ति अपने घर में जब निपट अकेला होता है उसके बाद भी वह घर के भीतर भी समूचे कार्य एक व्यवस्थित रूप में करता है। ऐसा नहीं होता कि वह निपट अकेला है तो निर्वस्त्र घूमने लगे। ऐसा भी नहीं कि उसे कोई देखने वाला नहीं है तो बिना कपड़ों दिन भर टहलता रहे। ऐसा भी नहीं होता कि उसे आज कोई टोकने वाला भी नहीं है तो जूते रसोईघर में रख दे अथवा डाइनिंग टेबिल पर बिस्तर लगाकर सोने लगे। ऐसा कोई काम वह नहीं करता है जिसमें उसके द्वारा असामाजिकता का बर्ताव दिखे।

यदि कोई व्यक्ति निपट अकेले में भी सामाजिकता का बर्ताव करता है तो उसे यहां सभी के सामने असामाजिक और अश्लील हो जाने की जरूरत क्यों आन पड़ती है? हालांकि किसी को समझाना हमारा मकसद नहीं है क्योंकि हमसे ज्यादा सभी समझदार हैं। इसके अलावा यह हम सभी लिखने वालों की नैतिक जिम्मेवारी बनती है कि हम आगे आने वाली पीढ़ी के लिए किस तरह की सामग्री पढ़ने के लिए छोड़ जा रहे हैं।

देश का क्या है उसकी इज्जत तो सभी उछालने में लगे हैं एक आप भी उछालने लगोगे तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा? इसलिए हमारा कहना नहीं बल्कि अपना कहना मानकर और यह समझकर कि आपका अश्लील और अशालीन लिखा हुआ आपके बेटे-बेटियां भी पढ़ते होंगे, आप स्वयं ही कुछ बेहतर लिखने का प्रयास करिये।

आइये ब्लॉग जगत में रही अमार्यदित, असंस्कारित स्थिति को दूर करने का मिलजुल कर प्रयास करें।

12 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बिलकुल सही बात लिखी है ....सबको सोचना और समझना चाहिए ..

सुज्ञ said...

यह सत्य है!! और संस्कारित व्यवहार हमारी आवश्यकता।

अरुण चन्द्र रॉय said...

बिलकुल सही बात लिखी है ....सबको सोचना और समझना चाहिए ..

ajit gupta said...

मुझे तो लगता है कि कुछ लोग तो यहाँ आए ही इसी मक‍सद से हैं। दूसरों पर कीचड़ उछालना ही उनका कार्य रह गया है। अब क्‍या किया जा सकता है?

तिलयार झील पर ब्लोगर मीट मे कितने ब्लॉगर थे और क्या क्या खाया गया ये तो आपसब पढ़ और देख ही चुके हैं । अब देखिये इस पोस्ट मे आये कमेन्ट को जो मानसिक खालीपन और जहालत से लबालब हैं , ये सन्दर्भ जिस मे द्विअर्थी संवाद किसको लेकर किया जा रहा हैं ये साफ़ दिख रहा हैं। बड़े बड़े महान ब्लॉगर वहाँ कमेन्ट मे हजारी बजा रहे हैं । said...

अब छिछोरो को क्या कोई सुधार सका हैं

Sunil said...

आपने एक कथन तो जरूर सुना होगा
"तुलसी इस संसार में भांति-भांति के लोग,
कुछ तो ???? हैं, कुछ बहुत ही ????."
---------------------------------------------------
अब ऐसे लोगों का कोई इलाज तो है नहीं. इन्हें जो करना है करेंगे और आप को जो करना है आप करिए.

Sunil said...

आपने एक कथन तो जरूर सुना होगा
"तुलसी इस संसार में भांति-भांति के लोग,
कुछ तो ???? हैं, कुछ बहुत ही ????."
---------------------------------------------------
अब ऐसे लोगों का कोई इलाज तो है नहीं. इन्हें जो करना है करेंगे और आप को जो करना है आप करिए.

Anonymous said...

sahi hai par is par amal karenge kitne log, ye prashn hai.
saarthak post

Anonymous said...

ek baat aur ki aap is tarah se apne aapko pareshan na karen, ye samaj haj yahan achchhe bure dono tarah ke log paye jate hain.
achchha likhiye aur hindi ko samriddh kariye.
aabhar

Anonymous said...

ek baat aur ki aap is tarah se apne aapko pareshan na karen, ye samaj haj yahan achchhe bure dono tarah ke log paye jate hain.
achchha likhiye aur hindi ko samriddh kariye.
aabhar

Dr.Aditya Kumar said...

सही सुझाव ..... सही बात कहते रहना चाहिए बिना इसकी चिंता करे की कोई इस पर ध्यान दे भी रहा है या नहीं

वाणी गीत said...

सार्थक अपील !