16 June 2009

बलात्कार के पीछे का मनोविज्ञान समझो या एक दूसरे को कोसते रहो

पिछले दो-तीन दिनों में देश में दो ऐसी घटनायें हुईं जो समाज की स्थिति के बारे में सोचने को विवश करतीं हैं पर क्या कोई सोच भी रहा है? एक नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप और एक अभिनेता द्वारा अपनी नौकरानी से बलात्कार। दो खबरें......जी हाँ समाज के लिए अब इस तरह की घटनायें खबरें मात्र ही रह गईं हैं।
गैंगरेप का शिकार हुई लड़की के साथ न्याय हो इसके लिए उसके स्कूल की छात्राओं ने अन्य नागरिकों के साथ मिल कर रैली निकाली। अभिनेता को तुरन्त ही पुलिस हिरासत में ले लिया गया। इन सबके बाद भी सवाल उठता है कि ऐसा होता क्यों है? आदमी-औरत के बीच का रिश्ता शरीर पर आकर ही क्यों रुकता है? अकेली लड़की या औरत क्यों अपने शरीर की कीमत चुकाती है? इस पर एक लम्बी और सार्थक बहस की अवश्यकता है पर सवाल वही कि शुरुआत करे कौन?
अब समाज में जब भी स्त्री-पुरुष की चर्चा होती है तो दोनों पक्ष अपनी-अपनी आँखों पर पूर्वाग्रह का चश्मा चढ़ा लेते हैं उसके बाद बहस में भाग लेते हैं। इस तरह की बहस से किस प्रकार का परिणाम तो प्राप्त होता नहीं है, हाँ आपसी मतभेद और बुरी तरह निकल कर सामने आ जाते हैं।
बलात्कार करने वाले के लिए हमेशा से फाँसी की सजा की माँग की जाती रही है। हमारा इस मामले में मत अलग है। हो सकता है कि आज के लोकतन्त्र में इस सजा का कोई भी पक्षधर न हो पर होना यह चाहिए कि बलात्कारी का लिंग काट दिया जाये। बलात्कार किसी भी स्थिति में हुआ है वह एक महिला के शरीर से, उसके मानसिक और सामाजिक स्तर से छेड़छाड़ की स्थिति है, इसे किसी भी कीमत पर स्वीकारा नहीं जाना चाहिए।
इधर इन घटनाओं के साथ एक सवाल और भी खड़ा हुआ, जैसा कि अभिनेता ने कहा कि उसके और नौकरानी के मध्य शारीरिक सम्बन्ध बने थे किन्तु आपसी सहमति से। अब सोचिए कि यदि कल को यह साबित हो जाये कि उस अभिनेता और उसकी नौकरानी ने सहमति के बाद शारीरिक सम्बन्ध बनाये तब क्या होगा? अदालत के पूर्व आदेशों के चलते तब सजा सम्भव नहीं। हमारा मानना है कि ऐसी स्थिति के सामने आने के बाद भी दोनों को सजा होनी चाहिए यदि दोनों में से कोई एक भी शादीशुदा है।
एक बात और, इसे महिलायें जरा गम्भीरता से और बिना किसी पूर्वाग्रह के पढ़े और समझ कर अपनी राय स्पष्ट करें कि क्या एक स्वस्थ महिला के साथ एक ही पुरुष बलात्कार कर सकता है? याद रखें कि महिला को किसी तरह का नशा नहीं है, किसी तरह से कमजोर नहीं है और आदमी भी अकेला है। यहाँ हमारा मानना है कि एक अकेला आदमी एक स्वस्थ अकेली महिला से किसी भी स्थिति में बलात्कार नहीं कर सकता है। इस बात को वे लोग बड़ी ही आसानी से समझ सकते हैं जो शारीरिक सम्बन्ध बना चुके हैं।
स्त्री-पुरुष के जननांग प्रकृति ने इस तरह से बनाये हैं कि बिना आपसी तालमेल और सहमति से शारीरिक सम्बन्ध कायम होना सम्भव ही नहीं। (यहाँ हमारी किसी भी बलात्कारी की तरफदारी करने की मंशा नहीं है)
बलात्कार समाज का वह कोढ़ है जिसके द्वारा आदमी तो फायदा उठा ही रहा है तथाकथित आधुनिक ललनायें भी फायदा उठा रहीं हैं।
बलात्कार के मनोविज्ञान को समझने के लिए पहले हमें अपने मन का विज्ञान समझना होगा। कम कपड़ों में लड़की, पहनावा आदि किसी भी रूप में इस प्रकार की घटनाओं के उत्प्रेरण नहीं हैं, हाँ अवसर की सम्भावना व्यापक होती है। रात के अँधेरे में सड़क पर जाती हर अकेली लड़की के साथ बलात्कार नहीं होता है। रात को टहलने वाला हर पुरुष बलात्कार करने की नीयत से ही नहीं टहलता है। अवसर की तलाश में रहते हैं वे लोग जो अपनी मानसिकता में किसी भी स्त्री-शरीर से सम्बन्ध बनाना चाहते हैं।
यदि ऐसा न होता तो विगत दिनों में घटित हुई कुछ घटनाओं ने हमें शर्मशार न किया होता। इन घटनाआ में मुर्दाघर में स्त्री-लाशों के साथ सेक्स, पिता द्वारा पुत्री के साथ सेक्स, बहिन द्वारा भाई के साथ, भाई द्वारा बहिन के साथ सेक्स, पुत्र और माता के आपसी शारीरिक सम्बन्ध, अन्य रिश्तों का सेक्स सम्बन्धों में बदल जाना शामिल है।
समाज कहाँ जा रहा है पता नहीं? कब तक ऐसा होगा पता नहीं? रिश्ते कब तक सेक्स की भूख मिटायेंगे पता नहीं? हम कब तक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर बस इसी तरह मसाला खोजते रहेंगे? हम कब तक समाज को इन दरिंदों के हाथ में सौंपे रहेंगे?
कोई जवाब है क्या? या बस महिलायें पुरुष को और पुरुष महिलाओं को जिम्मेवार ठहराते रहेंगे?

15 comments:

ARVI'nd said...

आपसी तालमेल और सहमति से शारीरिक सम्बन्ध कायम होना सम्भव ही नहीं।...yahan kuchh truti hai sahi kar le..aap bahut achha likhte hai

balaatkar ke peechee sabse bada pahlu manovaigyanik hai jab tak ham is pahlu par vichar ya bahas vistaar se nahi karenge ye saarthak nahi hoga......

AlbelaKhatri.com said...

achhi baat !
umda aalekh !

Anonymous said...

इस बात को वे लोग बड़ी ही आसानी से समझ सकते हैं जो शारीरिक सम्बन्ध बना चुके हैं।
When people write such things they close all doors to discussions because they presume .
After reading your post i rememberd the movie Damini where the eye witness to rape is being introgratted and asked similar questions .
i think its better that you see the suprme court ruling where by the victim is the one whose version is the best authenciated . so that you dont have to say इस बात को वे लोग बड़ी ही आसानी से समझ सकते हैं जो शारीरिक सम्बन्ध बना चुके हैं।

there can never be debate on Rape because Rape is more mental then physical . When a woman is raped the trauma she undergoes even if the sexual intercourse does not take place needs to be understood where as your whole article like a lawyer is merely based on sexual intercourse .

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

क्या आपकी नजर में हर साधारण किशोरी मल्ल युद्ध प्रतियोगिता की प्रतियोगी होती है? अगर हाँ तब आपका यह वाक्य सही है - "आपसी तालमेल और सहमति से शारीरिक सम्बन्ध कायम होना सम्भव ही नहीं। "
एक ३० वर्षीय पुरुष (इस मामले में )के लिए १७-१८ साल की किशोरी को शारीरिक रूप से वश करना बहुत ही साधारण बात है, वह भी तब, जब वह पुरुष एक अभिनेता है उसकी फिटनेस अच्छा है और वह लड़की गरीब तबके से आने वाली नौकरानी ....और मैं समझती हूँ बलात्कार वैसी ही स्थितियों में होता है जब बलात्कारी इस बात को लेकर आश्वस्त होता है की वह बच जायेगा, अधिकतर मामलों में पुरुष दबाव बनता है की महिला आत्मसमर्पण कर दे मज़बूरी वश, भयवश या फिर किसी और तरह जिससे वह बाद में यह साबित कर सके की यह आपसी रजामंदी से हुआ.

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

अच्छा =अच्छी

Suman said...

thik hai.

Anonymous said...

Aap bahut likhte hain.

बी एस पाबला said...

बिना आपसी तालमेल और सहमति से शारीरिक सम्बन्ध कायम होना सम्भव ही नहीं।

जमाना पहले केरल की एक महिला सांसद यह कह कर अपनी सद्स्यता भी खो चुकी।

लेख का भावार्थ बहुत कुछ कह रहा।

गिरिजेश राव said...

लेख बहुत से प्रश्नों को कुरेद कर उभारता है। आप सचमुच साहसी हैं। धन्यवाद इस लेख के लिए।

@ "स्त्री-पुरुष के जननांग प्रकृति ने इस तरह से बनाये हैं कि बिना आपसी तालमेल और सहमति से शारीरिक सम्बन्ध कायम होना सम्भव ही नहीं।"

क्या बलात्कार तभी मानेंगें जब योनि प्रवेश हो जाएगा? किसी की स्वतंत्र इच्छा के विरुद्ध उसके साथ कुछ भी, हाँ कुछ भी, करना बलात्कार होता है। रूढ़ अर्थ में यौन अपराध का अर्थ लें तो भी बलात्कार बहुत ही व्यापक अर्थ रखता है।

एक पुरुष यदि बहला फुसला कर सहमति से स्त्री के साथ कुछ करता है, तो भी वह दोषी है। समाज और स्त्री शरीर की संरचना (सृष्टि की निरंतरता के लिए गर्भ धारण)स्त्री को इस मामले में छूट देती है कि वह ऐसे किसी भी अत्याचारी को बाद में कटघरे में खड़ा कर दे। यह उसका advantage point है और हमें उसका सम्मान करना चाहिए। यह देव सभ्यता तो है नहीं जहाँ समाज बच्चे से पिता का नाम भी न पूछे? या केवल पूछ कर ही रह जाय ?

पुरुष प्रधान समाज को अपनी आँखों की सफाई करनी होगी अन्यथा परिणाम बहुत बुरे होंगें और दोषी बस पुरुष होगा।

Anil Pusadkar said...

बलात्कार अपराध कम मनोरोग ज्यादा है और यदि इसके आरोपी का ट्रायल मनोरोगी की तरह किया जाय और इस दौरान उसे मनोरोग चिकित्साल्य मे भर्ती रखा जाय तो इस प्रवृत्ति पर थोड़ा नियंत्रण संभव लगता है।वैसे भी लातो के भूत बातो से मानते नही हैं।

राजकुमार ग्वालानी said...

बलात्कार के लिए फाँसी की सजा विकल्प नहीं है न ही आपका लिंग काटने का सुझाया गया विकल्प दुनिया की कोई अदालत मानेगी। हां कुछ मुस्लिम राष्ट्रों में ऐसा होता जरूर है। समाज के जागने से ही अपराध रूकेंगे।
एक नजर उधर भी
हर दूसरे घर में हैं बलात्कारी दरिंदे

Anonymous said...

i was re reading the post today and realised that i forgot to put in my name in the third comment
i posted it as Anonymous was on my commputer not logged in
i appologise
rgd
Rachna

संजय बेंगाणी said...

ऐसी स्थिति के सामने आने के बाद भी दोनों को सजा होनी चाहिए यदि दोनों में से कोई एक भी शादीशुदा है।

इससे सहमत नहीं हुआ जा सकता. यह सामाजिक अपराध हो सकता है, कानुनी नहीं.

ओस की बूँद said...

Aalekh achchha hai aur sochane ko majboor bhi karta hai.
balatkar aur rape ke beech badi hi baariik si rekha hai. ise samajhana hoga. balatkar koi bhi kabhi bhi kar sakta hai. shareer se hii nahin aankhon se bhi.
rape aadmi aurat dono hi karte hain.
achchhe aur vicharottejak post ke liye badhai.

Shastri said...

डा सेंगर, आपका यह आलेख और इसके बाद का आलेख दोनों बहुत ध्यान से पढा और दोनों पर अलग अलग टिप्पणी करूंगा.

आपके इस आलेख की मुख्य विषयवस्तु की स्त्री कई सहमति के बिना यौनसंबंध नहीं हो सकता यह तकनीकी तौर पर सही है, लेकिन यहां आप एक तथ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं:

एक स्वस्थ एवं निर्भीक स्त्री जब तक अपने हमलावार का विरोध करने की शारीरिक अवस्था में है तब तक पुरुष यौनसंबंध नहीं बना सकता. लेकिन उसे मारपीट कर, या शारीरिक बलप्रयोग द्वारा, या डर के कारण विरोध करने की शक्ति उससे छीन ली जाती है तो फिर यौनसंबंध बनाया जा सकता है.

आपकी तकनीकी आपत्ति के बावजूद अधिकतर बलात्कार इसी कारण होते हैं.

इसका मतलब है कि यदि स्त्री को हमलावार से बचने की ट्रेनिंग दी जाये तो बलात्कार के कई मामले कम हो सकते हैं. लेकिन बलात्कार ऐसा विषय है कि हम में से अधिकतर लोग स्त्रियों को इसके विरुद्ध सशक्त बनाने की बात पर चुप्पी साध लेते हैं.

कम से कम मैं ने एक संस्थान में, जहां मैं प्रधानाद्यापक था, मेरी विद्यार्थिनियों के लिये आत्मरक्षा की ट्रेनिंग की व्यवस्था की थी और इस कारण मैं खुल कर इस विषय पर बोल सकता हूँ.

बाकी हो सका तो थोडा सा विस्तार से सारथी पर लिखूँगा.

सोचनेबोलने के लिये एक विषय आपने दिया, उसके लिये आभार!!

सस्नेह -- शास्त्री

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