01 सितंबर 2025

वर्तमान दौर की कविता

कविता लिखना

कितना आसान हो गया है अब.

कुछ भी लिखते जाओ

छोटे छोटे वाक्यों में.

न छंद की चिंता

न लय की फ़िकर,

जो मन में आए

उसे शब्दों में ढाल दो,

कई-कई हिस्सों में बाँट दो

फिर देखो गौर से

तुमको दिखेगी एक कविता

बलखाती काव्य रचना.

मत परवाह करो

कि रस, अलंकार, मात्राएँ

सिरे से गायब हैं,

तुकांत, अतुकांत का

सिरदर्द पाले बिना

बस लिखते जाओ कुछ भी,

शब्द भारी भरकम हों

या फिर हों आम बोलचाल के

बस, शब्द होने चाहिए.

न कोई ज्ञान

न कोई आदर्श

न किसी तरह का प्रवचन,

बस, लिखते जाओ

जब तक कि

तुम ख़ुद न थक जाओ

लिखते-लिखते,

शब्दों को

धकेलते-धकेलते,

रुको, रुक कर देखो

नजर आने लगी कविता?

देखो न!

देखो जरा ध्यान से

ये भी तो

बन गई है एक कविता.

करो वाह वाह

या कि आह आह

हमें इससे क्या?

हमें तो लीपना था,

कुछ थोपना था

सो रख दिया सामने,

समझ सको तो ठीक

न समझ सको

तो भी हमें क्या?

हमने तो लिख दी

एक कविता,

आज के दौर की

एक अद्भुत कविता.

 

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