नई शिक्षा नीति 2020 (NEP) के लागू होने के साथ ही महाविद्यालय में क्रियान्वयन समिति के प्रभारी का
दायित्व मिला था. तत्कालीन प्राचार्य डॉ. ए.के. सक्सेना जी द्वारा सदस्यों के चयन
और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन हेतु यथोचित कदम अपनाए जाने हेतु पूरी
स्वतंत्रता प्रदान की गई थी. उस समय NEP का पूरी समिति
द्वारा पर्याप्त अध्ययन किया गया. महाविद्यालय स्तर पर उसके क्रियान्वयन, पाठ्यक्रम सम्बन्धी बदलाव, परीक्षा सम्बन्धी
प्रक्रिया आदि पर पूरी समिति द्वारा गहन मंत्रणा, विचार-विमर्श
के आधार पर समझ आया कि एक अच्छी शिक्षा नीति विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक रूप
में सामने आई है.
विगत चार वर्षों की शासन-प्रशासन की कार्य-शैली, प्रणाली को देखकर लग रहा है कि ऐसी नीति को वास्तविक रूप
प्रदान करने लायक वातावरण अभी बुन्देलखण्ड क्षेत्र में नहीं है. न केवल
विश्वविद्यालय स्तर से बल्कि महाविद्यालय स्तर से भी किसी भी तरह की गम्भीरता नहीं
दिखाई जा रही है. विद्यार्थियों के प्रवेश, पाठ्यक्रम,
माइनर विषय, मिड टर्म परीक्षा, सेमेस्टर परीक्षा आदि को लेकर किसी भी तरह का सकारात्मक माहौल नहीं है. एक
अच्छी, सकारात्मक शिक्षा नीति की दुर्दशा होते हुए अपने
क्षेत्र में देखी जा रही है, देखने की विवशता भी है.
उच्चाधिकारियों को कई बार लिखा भी है, सुझाव भी दिए हैं,
कमियों से परिचित करवाया है मगर सिवाय अनदेखी के, आलोचना के, दोषारोपण के कुछ नहीं मिला है.
विषम सेमेस्टर के प्रवेश, परीक्षा को लेकर खिलवाड़ जारी है.

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