29 September 2011

फॉर्म 49 ओ के द्वारा किसी उम्मीदवार को मतदान न करने का अधिकार है आपके पास


अन्ना टीम अपने आन्दोलन के बाद से लगातार चुनावी सुधार के लिए कार्य करने की बात कर रहे हैं। इस संदर्भ में उनकी ओर से राइट टू रिकॉल और राइट टू रिजेक्ट की बात की जा रही है। हममें से बहुत लोग भी इससे अपनी सहमति देते नजर आते हैं। इसका एक कारण स्पष्ट है कि हमारे सामने अधिसंख्यक बार समस्या खड़ी होती है कि हम किस उम्मीदवार को वोट करें। ज्यादातर होता यह है कि तमाम सारे उम्मीदवारों में से ऐसा कोई भी नहीं होता है जिसको मत दिया जा सके। ऐसी स्थिति में मतदाता के सामने या तो उन्हीं नापसंद लोगों में से किसी एक को चुनने की मजबूरी होती है या फिर वह मतदान करने ही नहीं जाता है।


चित्र गूगल छवियों से साभार


मतदाताओं की इसी समस्या को दूर करने का प्रयास अन्ना टीम के द्वारा किया जा रहा है। इस प्रयास को लोगों द्वारा कुछ संशय की निगाह से देखा जा रहा है। ऐसे लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि मतदाता को संवैधानिक अधिकार दिये गये हैं जिनके अन्तर्गत किसी भी मतदाता को अपना मत किसी को भी न देने का अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार के द्वारा कोई भी मतदाता मतदान केन्द्र में अपनी मतदान की समस्त औपचारिकतओं को पूरा करने के बाद पीठासीन अधिकारी से फार्म 49 ओ मांगिये और भर दीजिए। ऐसा करने से आपके मतदान की प्रक्रिया भी पूरी हो जायेगी और आपका मत किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में नहीं जायेगा।

अभी तक हम ये करते आये हैं कि राजनीतिज्ञों के लुभावने वादों, दलों की दलदल से परेशान होकर हम मतदान करने ही नहीं जाते हैं। ऐसी स्थिति में मतदान का प्रतिशत भी कम रहता है और निर्वाचन आयोग को भी मतदाता के विरोध का पता नहीं चल पाता है। इस बार से आप ऐसा न करिये। मतदान करने अवश्य जाइये और यदि किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान न करना चाहते हों आप फार्म 49 ओ को भरकर अपना विरोध स्पष्ट रूप से दर्ज करवा दें। यदि मतदान आपका अधिकार है तो इसी अधिकार में आपको किसी भी उम्मीदावार को मत न देने का भी अधिकार है।

अपने अधिकारों को पहचाने और राजनीति के क्षेत्र में आ रही गंदगी को दूर करने में सहयोगी भूमिका का निर्वहन करें। विस्तृत जानकारी के लिए विकीपीडिया की इस लिंक को भी देख लें। कुछ जानकारी निर्वाचन आयोग से सूचना का अधिकार के अन्तर्गत मांगी गई है, जैसे ही प्राप्त होगी वैसे ही आप सभी के बीच उसे भी प्रदर्शित किया जायेगा।

जागो मतदाता जागो।



3 comments:

शिवम् मिश्रा said...

आपका बहुत बहुत आभार इस जानकारी को हमारे साथ सांझा करने के लिए ... यह हम सब का दुर्भाग्य ही है कि हम लोग अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति बिलकुल भी जागरूक नहीं है !

Dr Varsha Singh said...

नवरात्रि पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं।

प्रमोद जोशी said...

यह व्यवस्था सिर्फ इतनी बात के लिए है कि आप वोट नहीं डाल रहे हैं, और आपके बदले कोई और वोट न डाल जाए। इन वोटों को गिना नहीं जाता और न कहीं इस बात का विवरण दिया जाता है कि कितने लोगों ने वोट नहीं डाला। जितने वोट पड़ते हैं, उसके बाद बाकी बचे सभी वोट बिना पड़े माने जाते हैं। प्रत्याशियों को खारिज करने का अधिकार तभी व्यवहारिक है जब गिनती के बाद यह पता लगे कि कितने लोगों ने किसी भी प्रत्याशी को सायास वोट नहीं दिया।