19 March 2011

विकीलीक्स के आरोपों के लिए असान्जे को औकात याद दिलाना चाहिए


इधर इन दिनों एक महाशय की उत्पत्ति हो गई, जूलियन असांजे और उनके किसी अप्रत्यक्ष से सहायता प्राप्त करने के बाद उनका हथियार विकीलीक्स की भी उन्हीं की तरह प्रकट हो गया है। अमेरिका के बारे में तमाम सारी खबरों को इंटरनेट पर प्रकाशित करने और उसके बाद उनका विश्व स्तर का धमाल हो जाने के बाद जूलियन असांजे को भारतीय हवा-पानी लग गया। अमेरिका के बारे में उनके उद्घाटन के बारे में जिन्होंने जाना वो तो ठीक था, जिन्होंने विकीलीक्स को नहीं देखा था वे भी अमेरिका का उतना सत्य जानते थे। इस बारे में असांजे ने कोई नया रहस्योद्घाटन नहीं किया था।


चित्र गूगल छवियों से साभार
असांजे जिस तरह से प्रसिद्धि को लेकर भुखमरी का शिकार हैं उसी तरह की भुखमरी का शिकार हमारे देश के राजनेता रहते हैं, सत्ता प्राप्ति के लिए। विकीलीक्स पर एक खबर आई और सारा विपक्ष जुट गया कि प्रधानमंत्री नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें। जो भी आरोप लगे हैं उन्हीं के आलोक में एक-दो बातों को देखा जाना चाहिए।

यहां सवाल यह उठता है कि क्या विकीलीक्स को विश्व स्तर पर सभी देशों ने मान्यता दे रखी है कि वो जो भी लिखेगा, दिखायेगा उसे प्रमाणिक माना जायेगा? क्या विकीलीक्स और असांजे को समस्त देशों की तरफ से इस बात का पंजीकरण-पत्र प्राप्त है कि वह जिस देश के विरुद्ध चाहे कुछ भी दिखा सकता है? क्या विश्व की तमाम सारी जांच एजेंसियों के बेहतर विकीलीक्स को, असांजे को स्वीकार कर लिया गया है? यदि इन सवालों के जवाब हां में हैं तो निश्चय ही प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके पीछे कारण सिर्फ यही है कि इस तरह के आरोप विकीलीक्स ने लगाये हैं, जुलियन असांजे ने लगाये हैं।

इसी के साथ यदि उक्त सवालों के जवाब न में हैं तो सोचा जाना चाहिए कि हमारे देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर कोई विदेशी कुछ भी कहे और हम बजाय उसका विरोध करने के इस बात की स्वीकारोक्ति करने लगें कि उस विदेशी संस्था के, व्यक्ति के आरोप सही हैं? अरे! समूचे विपक्ष को तो शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए जो देश की सर्वोच्च संस्था के सदस्यों-सांसदों-पर लगाये गये आरोपों को, और वो भी जो एक विदेशी इंटरनेट साइट पर, एक विदेशी ने लगाये हैं, उन पर गला फाड़-फाड़ कर अपने ही देश के प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगने में लगा हुआ है।

यह भली-भांति माना जा सकता है कि हमारे ज्यादातर राजनेता इस समय किसी न किसी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और हो सकता है कि वोट के बदले नोट का आरोप सही भी हों पर आरोप लगाने वाले की प्रामाणिकता को भी जांचा-परखा जाना चाहिए था। एक बात हम हमेशा कहते हैं कि हम अपने घर में भले ही रोज अपने पिता से लड़ते-झगड़ते हैं पर किसी बाहरी को कोई हक नहीं कि हमारे घर में घुस कर हमारे पिता के साथ मारपीट करे। ठीक यही स्थिति देश पर भी लागू होती है, हम एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, इस्तीफे की मांग करते हैं, सदन में मारपीट भी कर लेते हैं पर किसी विदेशी को मात्र इसी से यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह हमारे देश की सम्प्रभुता पर सवाल खड़ा करे।

यह असंसदीय, असंवैधानिक और असामाजिक भी होगा वरना हम तो कहते हैं कि किसी भी विदेशी के द्वारा इस तरह देश के सासंदों पर, प्रधानमंत्री पर, किसी दल पर आरोपों के लगाये जाने पर उसके सिर पर जूतों की बारिश कर देनी चाहिए। भले ही विकीलीक्स ने कितने भी बड़े रहस्योद्घाटन किये हों; भले ही जूलियन असांजे को मानवाधिकार का संरक्षक माना जाने लगा हो पर हमारी राय में देश की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने वाले को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। समूचे विपक्ष को इस बात को समझना चाहिए और आपस में बैठकर आरोपों का निस्तारण कर ले किन्तु इस मुद्दे पर विकीलीक्स और असांजे को सबक जरूर सिखाया जाना चाहिए।

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5 comments:

Hamarivani said...

Apne bilkul sahi kaha...

राजकुमार ग्वालानी said...

रंगों की चलाई है हमने पिचकारी
रहे ने कोई झोली खाली
हमने हर झोली रंगने की
आज है कसम खाली

होली की रंग भरी शुभकामनाएँ

Kajal Kumar said...

विकीलीक बस एक आइना भर है. बह तो केवल आर्काइव दिखा रहा है. उसमें, किस राजदूतावास ने अमरीकी सरकार से क्या कहा था वही लिखा है. अब लोग इसके कुछ भी मतलब निकाला करें. वैसे, संसार के सभी राजदूतावास अपनी-अपनी सरकारों को इसी प्रकार की रिपोर्टें भेजते ही हैं, इसमें नया कुछ नहीं है. इसी तरह की जानकारी सभी देशों के बारे में दूसरे देशों के पास भी होती हैं.

डॉ० डंडा लखनवी said...

प्रशंसनीय लेखन के लिए बधाई।
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"हर तरफ फागुनी कलेवर हैं।
फूल धरती के नए जेवर हैं॥
कोई कहता है, बाबा बाबा हैं-
कोई कहता है बाबा देवर है॥"
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क्या फागुन की फगुनाई है।
डाली - डाली बौराई है॥
हर ओर सृष्टि मादकता की-
कर रही मुफ़्त सप्लाई है॥
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होली के अवसर पर हार्दिक मंगलकामनाएं।
सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

ताऊ रामपुरिया said...

लगता है दूतावास इस तरह की सेंधमारी करने के लिये ही खोले जाते होंगे?

होली पर्व की घणी रामराम,