12 October 2010

व्यंग्य कविता -- सन्देश का प्रभाव -- कुमारेन्द्र

व्यंग्य कविता --- सन्देश का प्रभाव
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सड़क पर पड़े

घायल को देख कर
कतरा कर, आँखें बचाकर
निकलते लोग।
याद आता है
मानवता का संदेश
पर....
सहायता के लिए
बढ़े कदमों को,
विचारों को
रोक देते हैं
नगर के किसी
‘विशेष इमारत’ के सामने लगे
‘बोर्ड़ों’ के ‘संदेश’
‘पुलिस आपकी मित्र है’
सदैव
‘आपकी सेवा’
को तत्पर।


6 comments:

Gourav Agrawal said...

अरे गजब है .. सच में ...नतमस्तक

Udan Tashtari said...

बहुत सटीक!

Ankit.....................the real scholar said...

सही कहा ...............बहुत लोग असमय ही काल के गाल में समां चुके हैं इन 'मित्रों' के कारण

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

‘विशेष इमारत’ के सामने लगे ...

बहुत सटीक व्यंग

वन्दना said...

सटीक व्यंग्य्।

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत सटीक व्यंग !!
बहुत सुन्दर!