18 May 2010

अभी और कितनों के मरने का इंतज़ार है जनाब....




इस बार बस की बस उड़ा दी गई और लगभग 50 के आसपास लोग मारे गये। नागरिकों द्वारा समाचारों में साफ-साफ कहा जा रहा है कि यदि बस में पुलिस वाले नहीं बैठे होते तो बस को नक्सलियों ने उड़ाया नहीं होता। नागरिकों का आगे यह भी कहना है कि अब यदि बस में पुलिस वाले बैठेंगे तो वे लोग उस बस में यात्रा नहीं करेंगे।

कहीं यह नक्सलियों की तरफ से आम नागरिकों को डराने का तरीका तो नहीं? अब वे लोग किस मुँह से नक्सलियों के समर्थन में अपनी बात कहेंगे जो सरकारी तन्त्र को दोषपूर्ण बताकर नक्सली हमलों को सही ठहराते थे? अब तो आम आदमी भी इस हमले में मारे गये। यदि नक्सली आम आदमी के प्रति सकारात्मक भाव रखते थे तो उन्हें इस बस को नहीं उड़ाना था।


(चित्र गूगल छवियों से साभार)

माना कि उनका निशाना सिर्फ और सिर्फ वे पुलिस वाले ही रहे होंगे जो उस बस में सवार थे किन्तु नक्सलियों के प्रभावी सूचना तन्त्र को क्या इस बात की खबर नहीं रही होगी कि इस बस में आम आदमी भी सवार है। अब सरकारी तन्त्र के साथ उनके संघर्ष की पोल खुल गई है।

इस घटना के पीछे से एक ऐसे षडयन्त्र की बू आ रही है जो दर्शाने को काफी है कि आम आदमी भी किसी न किसी रूप में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस को सहायता प्रदान कर रहा था और नक्सली इससे भयग्रस्त हो गये होंगे। बस के उड़ाने से उन्होंने एक तीर से दो निशाने साध लिये। पुलिस वालों को भी मार डाला और आम आदमी के भीतर भी इस भय को पैदा कर दिया कि नक्सली मौका पड़ने पर आम आदमी को भी अपनी हिंसा का शिकार बना सकते हैं।

कुछ भी हो बस सरकार को ठोस और कड़े कदम उठाकर नक्सलवादियों को सबक सिखाने का प्रयास करना होगा। यदि शीघ्र ही ऐसा नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब देश के प्रत्येक हिस्से में नक्सली घटनाएँ आसानी से होती दिखा करेंगीं।


8 comments:

दीपक 'मशाल' said...

एकदम जायज़ सवाल किया आपने चाचाजी.. गलती नागरिकों की तो नहीं थी, उन्हें तो बख्शना चाहिए था... सीधे संसद में हमला क्यों नहीं करते ये करते ये सब??

मनोज कुमार said...

आपसे सहमत। विचारोत्तेजक!

Mithilesh dubey said...

गलत है हमारे यहाँ के ढिले सरकार की , जरुरत है इनके खिलाफ सख्त कार्य करने की ।

दिलीप said...

ab kya is dar se police waalon ka sath bhi nahi dega koi...50 jawaan mar gaye aur unhone ye kaha ki jahan police wale baithe homnge ham nahi baithenge...

हरि शर्मा said...

सार्थल लेखन को बढावा दे और ऊल जुलूल पोस्टो पर प्रतिक्रिया से बचे.
सादर
हरि शर्मा
http://hariprasadsharma.blogspot.com/
http://koideewanakahatahai.blogspot.com/
http://sharatkenaareecharitra.blogspot.com/

शिवम् मिश्रा said...

बहुत ही उम्दा आलेख !!

देवेश प्रताप said...

अब वक्त आगया है इन्हें जड़ से मिटा देना चाहिए ....

Tej Pratap Singh said...

pahle to aap ko dhnywaad jo aap mere blog par aaye aur sundar sujhao diya. aap ne jin sabdon ko pakda wo awron se na ho saka..iske liye badhaye. isse ye to baat spast hai ki kon log jada jada dhyaan dete hain blog padte aur likte hain.
aap ka asirwaad milta haie bas.