11 September 2010

आज तक वालों, यदि दम हो तो मुसलमानों का भी स्टिंग ऑपेरशन चलाओ --- अपनी औकात मालूम हो जायेगी



हे राम, ये वे दो शब्द हैं जिनका उच्चारण महात्मा गाँधी ने अपने प्राण त्यागते समय किया था। हालांकि कुछ उपद्रवी तत्वों ने बाद में अपना शोध एवं खोज ज्ञान दिखाते हुए बताया कि महात्मा गाँधी ने हे राम नहीं कहा था बल्कि कुछ और ही कहा था। यह तो एक विवाद का विषय है कि महात्मा गाँधी ने उन अंतिम समय में क्या कहा था किन्तु वर्तमान में अब फिर से हे राम नाम से नया विवाद खड़ा किया जा रहा है।

गाँधी की हत्या के लिए जिम्मेवार गोडसे की आड़ लेकर पूरे हिन्दू समाज को आज तक कलंकित किया जाता है। उस एक व्यक्ति के कार्य से (वह सही था या गलत यह तो अदालती कार्यवाही में दफन है) आज भी पूरी हिन्दू जाति को हिंसात्मक मान लिया गया है। बहरहाल बात को दूसरी ओर नहीं मोड़कर अपनी आज की बात पर आते हैं। आज हे राम के नाम पर विवाद पैदा करने का काम आज तक चैनल वाले कर रहे हैं। कल से लगातार एक कार्यक्रम प्रसारित हो रहा है ‘हे राम’ के नाम से, जिसमें तमाम सारे बाबाओं, साधुओं, संतों की पोल खाली जा रही है।

यही कार्यक्रम आज तक वालों की ओर से कुछ माह पहले भी दिखाया जा चुका है। ऐसे में आज फिर इसकी आवश्यकता क्यों पड़ गई, ये बात तो चैनल वाले ही जानें।

एक बात तो है कि चैनल वाले बधाई के पात्र हैं कि वे हिन्दू धर्म के नाम पर लोगों को बरगलाने वालों का पर्दाफाश कर रहे हैं। आज कार्यक्रम शुरू होने के पहले आज तक चैनल की ओर से एक संदेश ‘संदर्भ’ के रूप में चलाया गया जिसका आशय था कि ऐसा करके वे किसी की भावनाओं का, किसी अन्य साधु-संत का विरोध नहीं कर रहे हैं, किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है, ऐसा करके वे लोगों को सचेत करना चाहते हैं इन बाबाओं से, साधु-संतों से जिनके बारे में आज तक चैनल पर दिखाया जा रहा है।

बधाई हो बधाई आज तक वालो। तुम न होते तो हिन्दू समाज को दिशा देने वाले भी न होते और हिन्दू धर्म अंधकार की राह चलता हुआ पाताल में समा जाता।





हिन्दू धर्म का नाम ले-लेकर कल से आज तक और इस पोस्ट को लिखने तक जो भी तुम दोनों एंकर के मुखारविन्द से जो भी निकल रहा है वह दर्शाता है कि आप किस तरह देश की सेवा में रत हैं। हिन्दू धर्म से इस तरह के कार्यक्रम के माध्यम से बुराई को दूर करने का रास्ता हमें दिख रहा है। आपकी सेवा के लिए हम आपसे कुछ निवदन करना चाहते हैं कृपया हमारे प्यारे भारत देश के हितार्थ आप एक और कार्यक्रम इस तरह का चलायें तो बेहतर रहेगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा हम आपको बता देते हैं। हम छोटे से पढ़ते चले आ रहे हैं कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई, आपस में सब भाई-भाई। यदि ऐसा है तो यह ज्यादती नहीं है कि आजतक वाले आप लोग केवल एक भाई हिन्दूओं को सुधारने में लगे हैं? अरे ऐसा करके आप हिन्दू धर्म को तो रसातल में जाने से बचा लेंगे और शेष धर्मों को कौन बचायेगा?

आजतक वालों आप हिन्दू धर्म के अलावा और भी दूसरे धर्मों के महात्माओं, मौलवियों, पादरियों आदि का भी कच्चा चिट्ठा खोलने की ओर भी ध्यान दें।

अब असल बात पर आ जायें................ठेंठ बुन्देली भाषा और गँवई स्टायल में कहें तो आजतक वालो या उनको समझाने वाला कोई या फिर उनको आदर्श-प्रेरणास्त्रोत मानने वाला कोई इस पोस्ट को पढ़े तो बता दे आजतक वालों को कि जिन्होंने इन बाबाओं का स्टिंग ऑपरेशन किया है यदि उनकी औकात में हो और असल बाप की औलाद हों तो दूसरे कट्टर धर्म मुस्लिम धर्म के बारे में इस तरह का स्टिंग ऑपरेशन करने की हिम्मत दिखायें।

24 सितम्बर आने वाली है ऐसे में सभी किसी न किसी रूप में मुसलमानों के साथ तुष्टिकरण की नीति अपनाते दिख रहे हैं। मीडिया को चाहिए कि वह जनता के बीच सौहार्द्र का वातावरण कायम करने की कोशिश करे किन्तु ऐसा करने के स्थान पर वह भावनाओं को भड़काने का कार्य करने में लगा है।

शर्म की बात है कि ईद जैसे शांति वाले पर्व को मनाने वालों ने भी कहीं इस कार्यक्रम के द्वारा हिन्दू धर्म की भावनाओं के साथ इस खिलवाड़ का विरोध नहीं किया। प्रशासन भी इस समय 24 सितम्बर को ध्यान में रखकर हिन्दू-मुस्लिम सामन्जस्य को बिगाड़ने वालों को, मोबाइल पर संदेश भेजने वालों को, गलत बयानवाजी करने वालों को, पोस्टर-बैनर चिपकाने वालों को पकड़ने में लगा है पर इस कार्यक्रम पर और इसकी आड़ में किये जा रहे हिन्दू धर्म पर हमले को लेकर कहीं कोई हलचल भी नहीं हुई। आखिर आज वे सब गले मिलने-मिलाने को बेताबी से मस्जिदों के बाहर लाइन लगाये जो खड़े हैं।

हिन्दू धर्म के नाम पर हो रहे खिलवाड़ के लिए कोई और नहीं स्वयं हिन्दू ही जिम्मेवार है। खुद हिन्दू ही अपने धर्म को अपने आराध्यों को गाली देता घूमता है और इसी कारण से दूसरों की हिम्मत हो जाती है हमारे धर्म को गरियाने की, हमारे आराध्य देवों को गरियाने की। जागो हिन्दू जागो, अरे! अब तो जागो।




चित्र गूगल छवियों से साभार

9 comments:

Anonymous said...

de mara janab. ho gaya kam

AlbelaKhatri.com said...

जो हुआ वो भी दुर्भाग्यपूर्ण है

जो देखा हमने वो भी दुर्भाग्यपूर्ण है

जिस मकसद से दिखाया गया वो भी दुर्भाग्यपूर्ण है

स्थिति विकट है
लगता है
क़यामत निकट है

दीपक 'मशाल' said...

ये बहुत ही शर्मनाक है.. मीडिया का ये भौंडापन पाता नहीं और कितने साल चलेगा.. इनका खुद का ईमान धरम ही नहीं कोई..

Anonymous said...

Sir ji, Aapne bilkul sahi baat kahi hai aur aap dekhna is vishay par js blog par bhi aapke samarthan men bahut hi kam log aayenge.
ye aisa vishay hai jiske dwra aap hindoo ko gali dete raho uar samaj men apne achchhe hone ka saboot dete raho.
Rakesh Kumar

Anonymous said...

Media ka kya hai wo to wahi dikha raha hai jo bik raha hai, dekhe nahi Vigyapan aapne.
main bhi dekha par???

Suresh Chiplunkar said...

आज तक तो क्या, किसी भी चैनल में यह हिम्मत नहीं है कि वे दिखाएं कि मस्जिदों और मदरसों में क्या होता है? सिस्टर अभया बलात्कार और हत्या मामले में क्या हुआ? क्यों पूरे यूरोप में बाल यौन शोषण के मामले में पादरी एक के बाद एक फ़ँस रहे हैं… चर्च के पास भारत में सबसे अधिक मुफ़्त ज़मीन क्यों है? आदि-आदि-आदि…

यह सब दिखाने के लिए चैनल के पिछवाड़े में दम होना चाहिए, यह दम सिर्फ़ हिन्दुओं के मामले और उन्हें बदनाम करते समय आता है…

जो "भावनाएं आहत करने सम्बन्धी" जो सन्दर्भ वगैरह दिखाया जा रहा है वह भी सिर्फ़ इसलिये कि अभी कुछ दिनों पहले ही दिल्ली के दफ़्तर में घुसकर कुछ लोगों द्वारा इन्हें पीटा गया था… अब इतनी जल्दी दोबारा पिटाई न हो इसलिये थोड़ी लीपापोती कर रहे हैं…।

6M के हाथों बिके हुए मीडिया से पहले भी कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन बजरंग दल वाले क्या कर रहे हैं…?

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बात में दम तो है.

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति के प्रति मेरे भावों का समन्वय
कल (13/9/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
काव्यशास्त्र (भाग-1) – काव्य का प्रयोजन, “मनोज” पर, आचार्य परशुराम राय की प्रस्तुति पढिए!