25 September 2010

बेढंगे समाधान देने वालों अपनी जुबान बंद रखो, अपनी औकात में रहो


मीडिया की कृपा से अयोध्या का मामला सभी की निगाह में आ गया और सभी लोग फिर अपने-अपने हिसाब से इसका समाधान खोजने में लग गये है। अदालत ने अपनी कार्यवाही के बाद दिन भी तय कर दिया था किन्तु कोई त्रिपाठी जी बीच में समाधान का झुनझुना लेकर कूद पड़े। इस कूदमकूद में हमारा सर्वोच्च न्यायालय भी उनको और उछाल दे गया।

चित्र गूगल छवियों से साभार


न्यायालय की किसी भी प्रकार से अवमानना और उसके फैसले पर बिना कोई सवाल उठाये सिर्फ यह कहना चाहते हैं कि यदि ऐसा नहीं होता तो इस समय देशवासी चैन से घर में बैठे होते। भले ही वे शांति से होते अथवा दंगों की आग के बीच। वैसे यह बात तो तय है कि पिछले कई वर्षों की उठापटक के बाद लोगों को भी लगने लगा है कि इसका कोई समधान निकले।

इसी समाधान निकालने की कड़ी में कोई अस्पताल का सुझाव दे रहा है तो कोई स्कूल का। किसी ने अनाथालय की बात की है तो कोई कुछ और समाधान सुझा रहा है। इन समाधानों के पीछे भावनाएं नहीं हैं बस अपने मन की भड़ास है। अपने बाप की जमीन होती --- क्षमा करिएगा, शब्द कुछ ज्यादा ही कड़वे आयेंगे आज--- तो एक-एक इंच के लिए अपने सगे भाई तक को जान से मार डालते। यहां तो अपने बाप का सवाल है नहीं देश की जमीन का मामला है, हिन्दुओं से सम्बन्धित मामला है तो जो चाहे कह डालो, जो मर्जी है बनवा डालो।

रही समाधान की तो बातचीत का रास्ता तो लगभग बन्द ही है और यदि अदालत की बात मानने में भी परहेज है तो फिर एक बार दंगा हो ही जाये और वो भी अपनी पूरी ताकत से। गीता के सन्देश में कृष्ण भगवान कहते भी हैं कि सभ्यता का विकास विनाश के बाद भी होता है। इसी दर्शन के आधार पर एक बार विनाश हो जाये, जो अधिसंख्यक रूप में बचेगा, जमीन उसी की और जो कम संख्या में बचेगा वह आजीवन इतना सिसियाया रहेगा कि किसी विवाद को जन्म ही नही देगा।

ये बातें आपको विध्वंसकारी लगती होंगी किन्तु देश के दीर्घकालीन हित में हैं। रोज-रोज घुट-घुट कर मरने से अच्छा है कि एक बार ठीक से मर लिया जाये। हिन्दुओं को भी इस जलालत से छुटकारा मिलेगा कि उन्हें अपने राम के जन्मस्थल को सिद्ध करना पड़ रहा है और मुसलमानों के लिए भी आराम रहेगा कि उनके आराध्य बाबर द्वारा बनाई मस्जिद की जगह सुरक्षित रह गई।

हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई की संकल्पना अब देखने में नहीं आती है। यदि ऐसा होता तो राम के बजाय बाबर को अहमियत मुसलमानों द्वारा कदापि नहीं दी जाती। अरे, नेता संख्या में कितने हैं, आम मुसलमान वर्ग यदि चाह ले तो हिन्दुओं को वह स्थान आज मिल जाये किन्तु यहां कोई एक स्थान नहीं समूचे देश में बहुतायत संख्या में मंदिरों के साथ यही हालात हैं।

अब एक बात उन तमाम लोगों से जो इस तरह के समाधान दे रहे हैं वे जान लें कि यहां सवाल जमीन का नहीं भावनाओं का है। जैसे उन्हें अपने बाप का पता अपने विश्वास के आधार पर है और अपने पुरखों के प्रति सम्मान भी भावनाओं और विश्वास के नाते है ठीक यही स्थिति अयोध्या और राम को लेकर है। यदि डी0एन0ए0 टेस्ट जैसी सुविधा न हो तो ऐसे लोगों के लिए अपने बाप का पता लगाना भी सम्भव नहीं पता नहीं अभी तक किसके विश्वास पर किस आदमी को अपना बाप बताते चले आ रहे हैं। ऐसे लोग चलो पहले अपना डी0एन0ए0 टेस्ट करवाओ।

एक बात साफ कर दें कि हमारा मकसद इस विषय पर इस तरह की भाषा में कुछ भी नहीं लिखने का था किन्तु लगातार पढ़ते-पढ़ते, सुनते-सुनते कान पक गये। किसी के लिए अस्पताल तो किसी के लिए स्कूल, किसी ने औरंगजेब के कागजों को देखा है तो किसी के लिए बाबर उनके बाप हो गये हैं। इस देश की मिट्टी से, यहां की संस्कृति से तो कोई वास्ता ही नहीं। बस यही गुबार निकल पड़ा, बस तो नहीं चलता है नहीं तो चार सुनाते और बस........।

इस तरह के विवाद खड़ा करने वाले और इस तरह के समाधान देने वालो सब अपने-अपने तथाकथित बापों की जय बोलो हम तो बोलेंगे जय श्री राम।


17 comments:

AlbelaKhatri.com said...

होई है वही जो राम रचि राखा...........


भले ही आज आपकी भाषा थोड़ी तल्ख़ है, लेकिन तल्ख़ भाषा आदमी मजाक में प्रयोग नहीं करता ...मजबूरन करता है

आपकी वेदना पूरे देश की वेदना है मित्र !

परन्तु अब सवाल मन्दिर और मस्जिद का नहीं,

सवाल अब सियासती नाकाबंदियों का है ..कौन कितने वोट कैसे फांसता है - ये है दुर्भाग्य इस देश का

जय सिया राम !

Anonymous said...

siya bal raam chandra ki jay.
jay sri ram

Anonymous said...

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jay sri ram

Anonymous said...

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Anonymous said...

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Ratan Singh Shekhawat said...

आपकी वेदना में १००% साझेदार

ललित शर्मा said...


बेहतरीन लेखन के बधाई
जय बुंदेलखंड

तेरे जैसा प्यार कहाँ????
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

रेखा श्रीवास्तव said...

पढ़ के लगा कि बुंदेलखंड का शेर गरजा है और बेबाक गरजा है. कुछ गलत नहीं लिखा इसके लिए आपसे पूरी तरह से सहमत हूँ. फिर भी देखें कि क्या हल मिलता है?
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मो सम कौन ? said...

जिस दिन यह आवाज दस प्रतिशत लोगों की भी हो गई, उस दिन के बाद इस देश में कोई दंगा-फ़साद नहीं होगा।
ये होते ही इसलिये हैं कि तुष्टीकरण जैसी नीतियों के चलते और वोट बैंक के चक्कर में हम हिप्पोक्रेट्स बने रहते हैं। अपना और अपने धर्म का अपमान करके और करवाके दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना बेवकूफ़ी के अलावा कुछ नहीं है।

Poorviya said...

lagata hai ki desh main bhagawa atankwad kayam hoga.
Aur chidambra uske nayak honge.
Babar atankwadi kab sai musalmano ka pagamber ho gaya kehi kisi kuran main to aaisa nahi likha hai

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...

jai shri ram....badhayee

शिवम् मिश्रा said...

सत्य वचन, महाराज !

samraat said...

AAP KE ES LEKH ME EK SACHE BHARTIYE OR HINDU KI DILI AAWAZ KO BAL MILA HAI....DANYWAD JI....

Anonymous said...

aaj Desh ko Kshatriya netrataw ki jarurat hai. jai siyaram