23 August 2010

रिश्वतखोरी और गुलामी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हो चुकी है




आज एक खबर पढ़ी, कॉमनवेल्थ के बारे में। वैसे अब तो रोज ही खबरें आ रहीं हैं पर इस खबर ने समझाया कि कैसे हम भारतीय इतिहास रचने में माहिर होते हैं।


(चित्र गूगल छवियों से साभार)

खबर के अनुसार कलमाड़ी (चतुर खिलाड़ी) ने इन खेलों के आयोजन को पाने के लिए जो तुरुप चाल चली वो ये कि उन्होंने बैठक में कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल होने वाली प्रत्येक टीम को वे पहले ही एक लाख डॉलर देंगे।

खबर के अनुसार ही यह भी मालूम हुआ कि अभी तक के कॉमनवेल्थ गेम्स इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी देश का राष्ट्राध्यक्ष स्वयं रानी के दरवार में क्वीन बैटन लेने के लिए उपस्थित हुआ हो। यहाँ भी हमारी महामहिम राष्ट्रपति जी ने इतिहास रच डाला। रानी के दरवार में बैटन लेने वे स्वयं उपस्थित हुईं।

खबर से हमें लगा कि पहली घटना किसी किसी रूप में घूसखोरी को व्यक्त करती है और दूसरी हमारी गुलाम मानसिकता की। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की हरकतें, वो भी एक देश के द्वारा हमारी स्वयं की स्थिति की परिचायक हैं।

बात-बात में देश में काला दिन मनाने वाले राजनैतिक दलों और तथाकथित जागरूक मीडिया द्वारा इन घटनाओं पर काला दिन नहीं मनाया गया। लगता है रिश्वतखोरी और गुलामी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और सहज स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

11 comments:

Anonymous said...

sir ji,
bhrashtachar to sahaj sweekar hai par uchcha star par bhi aisa hoga ye nahin socha tha.
Rakesh Kumar

Anonymous said...

sir ji,
bhrashtachar to sahaj sweekar hai par uchcha star par bhi aisa hoga ye nahin socha tha.
Rakesh Kumar

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH said...

खेल का तमाशा और तमाशे का खेल है ये
देश के लिए इनको कुछ नहीं करना है बस?

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH said...

खेल का तमाशा और तमाशे का खेल है ये
देश के लिए इनको कुछ नहीं करना है बस?

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH said...

खेल का तमाशा और तमाशे का खेल है ये
देश के लिए इनको कुछ नहीं करना है बस?

Devendra said...

भाईजी, अभी कलमाड़ी के बारे में किसी पत्रिका में पढ़ा था की सुनील दत्त ने उसको गैर भरोसे का व्यक्ति बताया था. और भी कुछ था, ये खेल खिलाडियों के कम आयोजन समिति के अधिक हो गए हैं. गुलामी का क्या कहना?

Devendra said...

एक और बात, क्या आपने इस आयोजन में सामानों का खर्चा देखा है? कमाल है कुछ हजार के सामान पर लाखों खर्च

Devendra said...

हो सके तो इसी पर भी कुछ धाँसू सा लिखिए.

ललित शर्मा-للت شرما said...

बेहतरीन पोस्ट, श्रावणी पर्व की शुभकामनाएं

लांस नायक वेदराम!---(कहानी)

zeashan zaidi said...

एक तमाशा यू पी में भी हो रहा है. किसानों से उनकी ज़मीन हड़पने के लिए तरह तरह की स्कीमें बनाई जा रही हैं. उन्हें नौकरी का लालच दिया जा रहा है. यानी पहले उनकी ज़मीन लेकर उन्हें मालिक न रहने दो फिर उन्हें नौकरी देकर गुलाम बना दो.

honesty project democracy said...

ये सारा भ्रष्टाचार और देश की इस दर्दनाक हालत के लिए हमारे इस वक्त के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी जिम्मेवार हैं ,क्योकि जब किसी व्यक्ति का मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है तो उसे गंदगी और सफाई में अंतर महसूस नहीं होता है जिसकी वजह से वह गन्दगी से घिरा रहता है ,ठीक उसी तरह हमारे देश का मस्तिष्क प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद पर बैठे व्यक्ति को अब भ्रष्टाचार और ईमानदारी में अंतर महसूस होना बंद हो गया है जिसकी वजह से यह देश एक नरक में परिवर्तित होता जा रहा है | अब तो इसे साफ करने की जिम्मेवारी सिर्फ और सिर्फ जनता की है और वो भी सर पर कफ़न बांधकर ...