27 June 2010

प्यार - देह से देह तक की कहानी



चंदन सा बदन,
चंचल चितवन,
धीरे से तेरा ये मुस्काना,
मुझे दोष न देना जग वालो,
हो जाऊँ अगर मैं दीवाना।
इस गाने में प्यार का इजहार हो रहा है, लड़की के रूप रंग की बातें हैं परन्तु कहीं भी लडकी के गुणों की चर्चा तक नहीं है।
इस तरह के प्यार को पहली नजर का प्यार कहकर महिमामंडित किया जाता है।
इसे आज की भाषा में कहें तो यह प्यार सीधे सीधे देह के आकर्षण में बँधा दिखता है। देह से शुरू होकर देह पर समाप्त होने वाले प्यार को आज का युवा वर्ग सर्वाधिक महत्वपूर्ण मान कर समाज है विद्रोह करने पर उतारू है।
परम्परा की दुहाई देकर हत्याओं का समर्थन करने वाले और युवा वर्ग के प्यार करने के तरीकों को समर्थन देने वाले सब कुछ बन्द कर युवाओं को प्यार की सही परिभाषा सिखायेँ।

11 comments:

नीरज गोस्वामी said...

बहुत सही बात कही है आपने...आजकल प्रेम देह तक ही सिमित हो गया है...रांझा मजनू महिवाल के ज़माने गए...मेरा एक शेर है:-

जिस्म से चल कर रुके, जो जिस्म पर
उस सफ़र का नाम ही, अब प्यार है

नीरज

वन्दना said...

कभी इसी पर एक रचना लिखी थी आप भी देखिये---
जिस्म के रिश्ते

प्यार यहाँ होता है कहाँ
सिर्फ़ शरीरों का व्यापर होता है यहाँ
रोटी , कपड़ा और मकान के बदले
सिर्फ़ शरीरों के सौदे होते हैं यहाँ
सौदों का बाज़ार सजा है
जिस्म जहाँ व्यापार बना है
जरूरत के बाज़ार में सिर्फ़
जरूरतों के सौदे होते हैं
कीमत चुकाकर शरीरों की
आत्मा को बेचा जाता है
प्यार की कीमत न जाने कोई
शरीरों को जाना जाता है
जिस्म की भूख से पीड़ित जो
वो रूह की भूख को क्या जाने
ये शरीर के भूखे भेडिये
दिलों की आवाज़ कब सुन पाते हैं
शरीरों को चाहने वाले कब
प्यार को पहचान पाते हैं
जिस्मों के बाज़ार में
प्यार का कोई मोल नही
ख़ुद को मिटा देती है जो
उसके अरमानों का कोई मोल नही
जिस्म खुदा बन जाए जहाँ
वहां जज्बातों का मोल कहाँ
ये जिस्मों से बंधे जिस्मों के रिश्ते
जिस्मों के बाज़ार में ख़रीदे बेचे जाते हैं
जिस्मफरोशी की रूह भी काँपे जहाँ
ये इतनी क़यामत ढाते हैं
ये जिस्मों के रिश्ते
जिस्मों पर ही सिमट जाते हैं

Anonymous said...

सही कहा आपने और आजकल इसी पर ही हंगामा मचा हुआ है।

Anonymous said...

सही कहा आपने और आजकल इसी पर ही हंगामा मचा हुआ है।

Anonymous said...

क्यों जी कहीं आप प्यार में हो रही हत्याओं के समर्थन में तो नहीं हैं?

Anonymous said...

क्यों जी कहीं आप प्यार में हो रही हत्याओं के समर्थन में तो नहीं हैं?

राजकुमार सोनी said...

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए
ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए
यह गाना भी तो थोड़ा ठीक नहीं है।

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH said...

Is jamane me sab sahi hai. Apna kaam nikalna chahiye.
Waise is topic pe vistar se likho.

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH said...

Ek baat aur samaj me pyar ki ghatna ke piche ki psychology ko samajhna padega. Isme jati ka bada important role hai, isko janna hoga.

Anonymous said...

?
??
???
Kya kaha jaye.

Sushil Shail said...

Very Interesting Kahani Shared by You. Thank You For Sharing.
प्यार की बात