25 June 2010

समाज के माता-पिता --- अपने दत्तक बापों का सम्मान करना सीखो




खुशी मनाने के कुछ बिन्दु

1- आपके परिवार के बेटे-बेटी मानने लगें कि उनका जन्म आपके परिवार की अभिलाषा नहीं वरन् उन बच्चों के माता-पिता के शारीरिक सुखों की परिणति है।

2- आपके बच्चे मानते हों कि आपने उनके लिए कभी कुछ किया ही नहीं जो कुछ किया है वो इस कारण से क्योंकि आपने अपने शारीरिक सुखों के एवज में उनको पैदा करने का अपराध जो किया था।

3- इस अपराध की सजा के रूप में आपने अपने बच्चों की परवरिश की।

4- खुशी मनाइये कि आपके बच्चे अब आपका कहा हुआ बिलकुल भी नहीं मानते।

5- आपका कुछ भी कहना उनके ऊपर तानाशाही दिखाने जैसा लगने के कारण वे अब घर से बाहर रहना शुरू कर रहे हैं।

6- जलसा मनाइये कि आपके बच्चे अब खुल्लमखुल्ला अपने विपरीतलिंगियों के साथ दिन गुजारने के साथ-साथ रातें भी गुजार रहे हैं।

7- यह आपके लिए खुशी की बात है कि इतनी उम्र के बाद भी आपकी बेटी गर्भवती नहीं हुई है और न ही किसी लड़की ने आकर आपके बेटे से कहा है कि मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ, अर्थात दोनों सुरक्षित साधनों का प्रयोग कर रहे हैं।

8- खुशी अब मनाइये कि आपके बच्चों ने आपको दादा-नाना बनाने वाली खुबर सुना दी, वह भी बिना शादी किये। इसका मतलब है कि आपके बच्चे उतने पिछड़े नहीं जितना कि मुहल्ले वाले समझ रहे थे।

9- यह क्या कम खुशी की बात है कि आपके मना करने की स्थिति में आपके बच्चे घर से भाग सकते हैं। आप उनके भागने का नहीं उनके किसी भी ऐरे-गैरे से शादी करने का इंतजाम करिये।

10- खुश होइये कि आपके ऊपर यह दोष नहीं आयेगा कि आपने अपनी बेटी को किसके पल्ले बाँध दिया अथवा बेटे के पल्ले किसको बाँध दिया।

11- यह तो बहुत खुशी की बात है कि आपकी बेटी ने ऐसे व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुना है जो लगातार अपराध की दुनिया से जुड़ा रहा। आखिर आप ऐसा दामाद खोज सकते थे?

12- यह भी खुश होने वाली खबर है कि आपका बेटा अब तक कइयों लड़कियों को झाँसा देकर गर्भवती बनाता रहा और अब तो शादी कर ही बैठा किसी शादीशुदा महिला से, उसको भगा कर।

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खुश
होने के और भी बिन्दु हैं पर कृपया खुशी में ऑनर किलिंग जैसी हरकत नहीं कीजिए। आप स्वयं विचार करके देखें कि आपको इतनी इज्जत और कौन देगा? आपके बेटे और बेटी ही यदि इस तरह की इज्जत नहीं देंगे तो क्या समाज देगा? आप अपने बेटे और बेटी का बस यहीं तक अच्छा सोच सकते थे, इसके बाद तो सोचना उनका काम है कि किस लड़के अथवा लड़की के साथ वो सुखी रहेंगे।

आप क्यों बिलावजह अपने आदेश को पारित करने का प्रयास करते हैं। याद रखिये एक उम्र के बाद आपके बेटे और बेटियाँ आपके बाप हो जाते हैं। इस अवस्था में आपको अपने इन दत्तक बापों का आदर करना चाहिए।

ऐसे बेटे और बेटियों को ससम्मान समाज में प्रतिष्ठित करो जो अपने माता-पिता की गरिमा, उनकी भावनाओं का आदर नहीं कर सकते हैं।

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(चित्र गूगल छवियों से साभार)


सन्देश---
ऊपर के संदेश का सार समझें और आइये समाज हित में किसी भी तरह की हिंसा को, किलिंग (जो कम से कम ऑनर जैसी तो नहीं है) को बन्द करें।


10 comments:

vikas said...

bahut hi savedansheel aur uchit baat kahi aapne...

vikas pandey

www.vicharokadarpan.blogspot.com

शिवम् मिश्रा said...

एक ने कही और दूजे ने मानी,
हम कहे कि दोनों ज्ञानी !

Anonymous said...

sunen aur gunen...
gunen aur chunen...

Anonymous said...

sunen aur gunen...
gunen aur chunen...

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH said...

Ye sahi hai.

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH said...

Ye sahi hai.

Devendra said...

अब इस पर हम क्या कहें.... वैसे आपने सही लिखा है.

Devendra said...

अब इस पर हम क्या कहें.... वैसे आपने सही लिखा है.

sajid said...

Ab sir main aap ko kya likhu aap ne jo likha theek hi hai

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 27.06.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/