13 January 2010

अपने आसपास के राजनीतिक हाकर को पहचानिए !!!


पिछले कुछ वर्षों से राजनीति में जिस तरह का क्षरण देखने को मिल रहा है वह चिन्ता का विषय होना चाहिए। कहने को तो चिन्ता का विषय है किन्तु चिन्ता किसी को नहीं है। हम सभी आपस में मिल कर बैठते हैं, चर्चा करते हैं और फिर राजनीति को, लोकतन्त्र को, देश को उसी हाल में छोड़ देते हैं।

यदि राजनीतिक परिदृश्य पर गौर किया जाये तो धन बल, सत्ता बल, बाहु बल का खुल कर प्रयोग होने लगा है। इस अतिशयता के पीछे के कारणों को चर्चा का बिन्दु तो बनाया जाता है किन्तु उसके समाधान के तरीकों को खोजने का प्रयास नहीं होता है।

बहरहाल, ये समस्या चल रही है और कब तक चलेगी, इसका पता नहीं। हाँ, इतना तो जरूर पता है कि अब राजनीति में भी हाकर्स होने लगे हैं जिनका अपनी नियमित मित्र चर्चा के दौरान नामकरण किया गया ‘राजनीतिक हाकर्स’



अब आप स्वयं देखिये कि विगत चुनावों में और वर्तमान स्थानीय निकाय चुनावों में धन का प्रयोग हुआ है; सभी राजनैतिक दलों द्वारा अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते हुए आयातित प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाया, सत्ता का, बल का प्रयोग, लालच, धमकी का प्रयोग किया गया। इससे उन सभी कार्यकर्ताओं को निराशा ही हुई होगी जो वर्षों-वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे थे।

यह भी देखा गया है कि पार्टी को समर्पित व्यक्ति सिर्फ नारे लगाने के लायक ही रह जाता है। आज ज्यादातर प्रत्याशी अथवा विजयी लोग किसी न किसी रूप में आयातित ही कहे जायेंगे। ऐसी स्थिति में वे लोग जो अपने समर्थक दलों की नीतियों का, नेताओं के विचारों का, सिद्धान्तों का प्रचार-प्रसार करते घूमते हैं, उन्हें क्या राजनीतिक हाकर न कहा जाये?

जाति, धर्म के नाम पर होने वाली राजनीति ने यह दिखा दिया है कि अब दलों का कोई अर्थ नहीं। अपनी जाति के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार-प्रसार करने में अब कोई गुरेज नहीं। ऐसी स्थिति भी हाकर जैसी ही होती है तो बिना अपने मालिक के समर्पण के उस दिशा में भागता है जहाँ कमीशन अधिक होता है।

वर्तमान स्थानीय निकाय चुनावों में बहुत से राजनीतिक हाकर्स देखने को मिले हैं। आपके आसपास भी ऐसे राजनीतिक हाकर्स अवश्य ही होंगे। बस ध्यान देने की आवश्यकता है।


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चित्र साभार गूगल छवियों से
कृपया ध्यान दें.....ये राजनीतिक हाकर नहीं है...

3 comments:

दीपक कुमार भानरे said...

जी सही कह रहे हो । अब तो राजनीति आयतित नेताओं से हो रही है या फिर बेटा बेटियों से या फिर पारिवारिक सदस्यों से । बाकि कार्यकर्ता चाहे वह भाड़े के हो या समर्पित राजनीतिक हाकर्स’ ही तो है ।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

राजनीति में जब से मार्केटिंग ने प्रवेश किया है। वोटर तक पहुँच बनाने के लिए हॉकरों की जरूरत बन गई है।

पी.सी.गोदियाल said...

काश कि हमारे लोग इतना समझ पाने में सक्षम होते !