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11 May 2014

मोदी-विरोध का राग, विरोधियों की खिसियाहट




अभी तक नरेन्द्र मोदी के वे धुर विरोधी जो मोदी लहर नामक किसी भी अवधारणा को नकारने में लगे थे, वे भी आज गुपचुप रूप से इसे स्वीकारने लगे हैं. लहर का कथित तौर पर बनाया जाना और जनसामान्य का स्वतः ही लहर बनकर उभरना दो अलग-अलग बातें हैं. लहर के बनने-बिगड़ने के सन्दर्भ में यहाँ अन्ना आन्दोलन तक जाना होगा, जहाँ जनता ने स्वतः स्फूर्त रूप से समूचे देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम छेड़ रखी थी. संभव हो कि उस आन्दोलन के पीछे भीड़ जुटाने के लिए एक प्रकार का प्रबंधन कार्य कर रहा हो किन्तु इसके बाद भी अधिसंख्यक जनता स्वतः ही आंदोलित हुई थी. आज कुछ ऐसी स्थिति मोदी लहर के नाम पर दिखती है. अनेक आरोपों, जांचों के बीच नरेन्द्र मोदी ने खुद कि सफल मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित किया है. गुजरात का विकास, जितना भी..जैसा भी, उनकी सोच का परिणाम है. इसको योजना आयोग द्वारा भी कई बार प्रमाणित किया जाता रहा है साथ ही बेहतर राज्य के लिए भी, श्रेष्ठ मुख्यमंत्री के लिए भी उनको सम्मानित किया जा चुका है, ऐसे में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लोकतंत्र की हत्या किस तरह होगी, समझ नहीं आता. मोदी के सत्ता में आने के बाद राष्ट्रहित किस तरह तिरोहित कर दिए जायेंगे समझ से परे है. स्थितियाँ कैसे और बदतर हो जाएँगी, ये समझ पाना मुश्किल हो रहा है.
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लोकतान्त्रिक व्यवस्था में निर्वाचन पश्चात् ही व्यक्ति विधायक, सांसद आदि बनता है. नरेन्द्र मोदी खुद भी तीन बार चुनाव जीतकर अपने को साबित कर चुके हैं. जिस गुजरात विकास को उनके विरोधी झूठ बताते प्रचारित करते हैं, उसी राज्य की जनता ने उन्हें बार-बार चुनने का काम किया है. वर्तमान दौर में ये कहना नितांत दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि मोदी समर्थक बलात मतदान अपने पक्ष में करवा लेते हैं. यदि ऐसा होता तो गुजरात में विरोधी दल किस तरह और कहाँ से जीत कर आते हैं. उनके विरोधियों द्वारा मोदी के नाम पर बार-बार गुजरात दंगों की कालिख लगाकर देश को गुमराह करने का काम बखूबी किया जा रहा है किन्तु अनेक जाँच आयोगों, समितियों द्वारा भी मोदी को दोषी साबित नहीं किया जा सका है. ये क्या दर्शाता है, कि या तो मोदी वाकई निर्दोष हैं अथवा वे इतने शक्तिशाली बन चुके हैं कि देश की किसी भी जाँच एजेंसी को डरा-धमका कर अपने पक्ष में जाँच मोड़ दे रहे हैं. इसी के आलोक में उनको विरोधी, जो सिर्फ गुजरात दंगों का राग आलापते रहते हैं, बताएं कि २००२ के बाद से गुजरात कब और कितनी बार दंगों का शिकार हुआ?
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किसी व्यक्ति के बार-बार निर्दोष सिद्ध होने के बाद भी उसे कटघरे में खड़ा करना, लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से बारम्बार निर्वाचित होने वाले व्यक्ति के सत्तासीन होने से देश को खतरा बताना, एक दशक से ज्यादा समय से बेहतर राज्य सरकार सञ्चालन करने वाले मुख्यमंत्री को मानवता के लिए खतरा बताया जाना कहीं न कहीं विरोधियों की खिसियाहट ही है. केंद्र सरकार के विगत दस वर्षों के कार्यों, कारनामों के पश्चात् आम जनता परिवर्तन चाहती है और उसे परिवर्तनकारी माध्यम नरेन्द्र मोदी के रूप में मिल गया है.

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