26 March 2010

भगवान के साथ भी आदमी का व्यापार चालू है



इधर देखने में आया है कि आदमी ने अपनी फितरत में परिवर्तन तो किये ही हैं, इन्हीं परिवर्तनों के साथ उसने अपने आराध्यों के रूप-रंग में भी परिवर्तन कर दिये हैं। व्यक्ति अपने कार्य और स्वभाव के अनुसार अपने लक्षणों को बदलता रहता है ठीक उसी तरह वह भगवानों, देवी-देवताओं में भी लक्षणों का परिवर्तन देखता और करता रहता है।



ऐसा अनुभव किया है कि वह इन लक्षणों को देखता नहीं है, बदलता मात्र है। भगवान के लक्षणों को कैसे देखेगा और पहचानेगा ये तो इंसान ही बताये किन्तु हमने जो महसूस किया वो आपको बता सकते हैं।

अकसर देखा गया है कि किसी छोटे से मंदिर की किसी समय कोई भी मान्यता नहीं होती है और एकाएक उस मंदिर के प्रति लोगों में श्रद्धा और आदर भाव बढ़ जाता है। ठीक इसी तरह होता यह भी है कि किसी मंदिर के प्रति किसी समय में उमड़ता हुआ श्रद्धा-भक्ति का भाव लगभग समाप्ति की ओर जाने लगता है।

इस तरह के उदाहरण हमने स्वयं अपने शहर में देखे हैं। हमारे स्कूल के पास एक मंदिर हुआ करता था ‘हुलकी माता का मंदिर’, उस मंदिर की हालत एकदम जीर्णशीर्ण थी। हम लोग छोटे में जब स्कूल जाते तो घर बापस आते समय उसी मंदिर के रास्ते से होकर आते थे। आज उस मंदिर का कायाकल्प हो गया और लोगों में उस मंदिर के प्रति श्रद्धा भाव बहुत अधिक बढ़ गया है। इसी तरह का एक और मंदिर था शंकर जी का मंदिर, आज उसकी भी कदर बढ़ गई है। एक हनुमान जी के मंदिर की भी दशा सुधर गई है।

दशा बिगड़ने वाले मंदिरों में एक मंदिर हनुमान जी का ही है ‘ठड़ेश्वरी मंदिर’, यहाँ हनुमान जी की मूर्ति खड़ी है और मान्यता है कि इस मूर्ति को ले जाने वाला यहाँ रखने के बाद इस मूर्ति को उठा नहीं पाया था। किसी समय में इस मंदिर की मान्यता बहुत थी, आज है पर उतनी नहीं जितनी कभी थी। कारण, हनुमान जी का एक और मंदिर शहर में बन गया है जिसमें दक्षिणमुख किये हुए हनुमान जी की मूर्ति है। माना जाता है कि दक्षिणमुखी हनुमान कष्ट निवारक होते हैं।

पता नहीं कौन कष्ट निवारक होता है और कौन कष्ट दाता पर एक बात तो लगती है कि भगवानों की स्थिति भी दुकानदारों और ट्यूशन देते मास्टरों की तरह होती है या कहें कि प्रेक्टिस करते वकीलों और डाक्टरों की तरह। पता नहीं कब दुकान से ग्राहक कम होने लगें और दुकान बन्द। कब ट्यूशन करने वाला कोई दूसरा मास्टर आ जाये और ट्यूशन बन्द। ठीक वकीलों और डाक्टरों के मामले में भी यही है कि कोई नया आया नहीं कि पुराने की दुकान बन्द।

कुछ ऐसा ही भगवान के साथ हो रहा है। नया भगवान आया नहीं कि पुराने की सिद्धियाँ समाप्त। नये का चमत्कार हुआ नहीं कि पुराने का चमत्कार बन्द। नये की चकाचौंध भरी मान्यता को मान्यता मिली नहीं कि पुराने की मान्यता समाप्त।

भगवान के साथ भी आदमी का व्यापार चालू है।



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चित्र गूगल छवियों से साभार


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