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06 June 2011

आओ अमूल बेबी, कहाँ छुप गए हो..


हर तरफ चर्चा है कि रामलीला मैदान की घटना के बाद से बेबी नहीं दिखाई दिया और न ही उसने कुछ कहा. काफी खोज-बीन के बाद पता लगा कि बेबी कुछ बिगड़ गया था, हर बात में कुछ कुछ बकवास करने की आदत हो गई थी. बड़ों के बीच में भी घुस जाया करता था.

चित्र गूगल छवियों से साभार

इधर घर में पिछले कुछ दिनों से सिब्बल अंकल, मोहन अंकल, दिग्गू अंकल उसकी मम्मी के पास किसी बाबा-बाबा नाम का पपलू खेलने आते थे. मम्मी को डर था कि कहीं बेबी बीच में घुस कर भांडा न फोड़ दे. इधर गर्मियों की छुट्टिय भी चल रही हैं...बेबी कि बड़ी बहिन और जीजा उसको अपने घर खेलने के लिए बहुत बार बुला भी चुके थे.....इधर बेबी भी कुछ खास नहीं कर पा रहा था... बिहार में, बंगाल में, कहीं और...

मम्मी ने सोचा कि घर में रहेगा तो गाड़ी में घूमेगा, पेट्रोल फूंकेगा और नाक कटवायेगा...इस बीच यदि भांडा फोड़ दिया तो बाबा नामक पपलू खेल भी नहीं खेला जा सकेगा. यही सोच मम्मी ने उससे कहा कि देख तू अपने पिता के लाड में बहुत बिगड़ गया है, अभी तक तेरी हर बात मानी...तुझको हेलिकोप्टर तक में घुमवाया...मोहन अंकल तक को डांटा....पर बा ये सब नहीं चलेगा. अब तू अपनी दीदी-जीजा के पास कुछ दिन घूम . इधर उधर घूमेगा तो पता नहीं कब माया मेमसाब, ममता दीदी, अम्मा तुझको उठवा ले. तू कुछ दिन घूम . तेरा भी मन बहल जायेगा.

बस इसी कारण से दिग्गू अंकल की तरह चपड़-चपड़ करने वाला, देश के कथित लोगों का चहेता बेबी इस काण्ड पर शांत है...उस बेचारे को पता भी नहीं है कि सोते हुए लोग भी उसकी मम्मी और शीला की जुबानी के लिए खतरा हो सकते थे. बेचारा बेबी...इस समय सभी को उसकी याद सता रही है...आओ अमूल बेबी, आओ.


6 comments:

डा० अमर कुमार said...


सही है, जी !

शिवम् मिश्रा said...

बेबी को मालुम है उसकी मम्मी ने बहुत से कुत्ते पाल रखें है जो सारा समय भोकते ही रहते है ... इस लिए बेबी अभी दूद्दू पी कर सेहत बना रहा है ! जब कुत्ते भोक भोक कर थक जायेंगे तब बेबी आएगा ... देश देश खेलने !

PADMSINGH said...

बेबी आएगा...अभी मम्मी ने मना किया है...जब मम्मी के आगे मोहन अंकल की नहीं चलती तो बेबी क्या है

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बात में दम है...गुमशुदा में इश्तिहार दिया जाना चाहिए...

Ratan Singh Shekhawat said...

:) :)

Ankit.....................the real scholar said...

5 JUNE रामलीला मैदान :एक छिपा हुआ सत्य एक प्रत्यक्षदर्शी के शब्दों में