16 August 2009

समस्या से जूझें या झंडा फहराएं?

अभी-अभी हम भारतवासी बरसते पानी के साथ अपना स्वतन्त्रता दिवस मनाकर उठे हैं। कितना सार्थक और कितना आवश्यक रह गया है हमारे लिए ध्वजारोहण करना? यह सवाल तब और भी प्रासंगिक लगने लगता है जब हम लगातार समस्याओं से जूझते हुए आगे बढ़ रहे होते हैं।
समस्याएँ भी ऐसीं कि जिनका हल है पर कोई निकालना ही नहीं चाहता। लोकतन्त्र की हालत यह है कि आम आदमी के लिए जीना मुश्किल है। रोटी-पानी के लाले हैं, घर की समस्या है, रोजगार की चिन्ता है, समस्या का हल करने वाले बैठे हैं पर उन्हें जेबें भरने से फुर्सत नहीं है, ऐसे लोकतन्त्र में किसे तमन्ना है कि वह तिरंगा फहराये?
हमने कई बार इस तरह की बातों को उठाया तो ज्यादातर लोगों की ओर से देशभक्ति से भरा जवाब मिलता है कि हमारे वीर शहीदों ने अपने प्राण गँवाने तक के बारे में नहीं सोचा और तुम जरा सी बिजली-पानी की समस्या का रोना लेकर बैठे हो। सच है, हमारे वीर-बाँकुरों ने अपनी जान की परवाह नहीं की पर किससे? फिरंगियों से, हम क्या अपने भारतीय फिरंगियों से लड़ने के लिए अभी तैयार हैं?

सवाल नहीं बस अपनी ही समस्या के बहुत छोटे-छोटे से हिस्से, उसके बाद फैसला आपका।

  • जनपद जालौन, चार सांसद, जिनमें एक लोकसभा के लिए शेष तीन राज्यसभा के लिए। लोकसभा के लिए चुने गये सांसद महोदय सपा के शेष तीनों राज्यसभा के मनोनीत सांसद बसपा के।
  • जनपद जालौन में चार विधानसभाएँ, चार विधायक चुने गये। एक विधायक (सदर) कांग्रेस के शेष तीन विधायक बसपा के। इनमें से एक विधायक राज्यमंत्री भी हैं। कांग्रेस विधायक प्रदेश कार्यकारिणी में भी शोभायमान हैं।
  • अब पूरे जनपद जालौन का तो नहीं बस यहाँ के मुख्यालय का हाल भी जान लीजिए (हो सकता है कि आपको बोर कर रहे हों पर स्वतन्त्रा दिवस पर इतना जश्न तो आवश्यक है)
  • उरई के पाँच मुहल्ले जहाँ ट्रांसफार्मर फुँकने से पिछले चार-पाँच-छह दिनों से बिजली नहीं आ रही है। अभी इनके बदलने के कोई आसार नहीं। अधिकारियों के कानों पर जूँ भी नहीं रेंगती।
  • अधिकारियों के पास मोबाइल हैं जिन्हें आफ न करने के सख्त निर्देश हैं। इस निर्देश का पूरा पालन होता है, आफ तो नहीं होते पर कोई उठाता भी नहीं। एकाध बार कोई सुन भी ले तो समस्या का निदान नहीं किया जाता, उलटे कहिए हड़का दिया जाये।
  • बिजली व्यवस्था का हाल यह है कि पूरे दिन में सुबह आठ से ग्यारह तथा दोपहर दो बजे से रात आठ बजे तक कटौती घोषित है। इसके बाद भी बिजली आने पर दो-चार घंटे तो जाना ही जाना है।
  • इसके बाद भी बिजली बिल की मार उसी पर जो नियम से जमा करता है। बजरिया जैसी जगह पर कटिया का आलम यह है कि वहाँ अधिकारी घुसने से भी डरते हैं, साम्प्रदायिक होने का खतरा है। सौहार्द्र बनाने के लिए बिजली चोरी करवाई जानी जायज है।
  • हाईटेंशन तारों का लगभग रोज ही टूटना होता है। रोज ही आदमियों का मरना तय है (शहीद नहीं होते हैं)
  • कानून व्यवस्था का हाल यह है कि सुबह नौ बजे भी हत्या होती है, शाम सात बजे भी हत्या होती है। अकेले में हत्या होती है, भरे बाजार हत्या होती है।
  • चोरी, चेन खींचना, जेब काटना तो उस तरह हैं जैसे खाने में अचार या चटनी।
  • जेल में तक हत्या का प्रयास होता है, अन्य करोबार का बाजार गर्म रहता है।

और बहुत कुछ है। यह हाल तो प्रशासन का है। शिक्षा जगत, चिकित्सा जगत, व्यापार, बैकिंग, डाकघर, नगर पालिका............कौन नहीं है जो स्वतन्त्र नहीं है कुछ भी कहने को, कुछ भी करने को। आखिर स्वतन्त्र है यानि की स्व का तन्त्र है जिसे मानना हो माने न मानना हो न माने।
इन सब पर लिखने बैठा जाये तो शायद इंटरनेट पर कुल स्पेस कम हो जायेगा पर इनकी कारगुजारियाँ समाप्त नहीं होंगीं।
अब बताइये ऐसे में कोई आम आदमी कैसे ध्वजारोहण करने के लिए आनंदित होगा? समस्याओं का पुलिंदा थामे कोई कैसे भारत माता की जय बालेगा? कौन कैसे वन्देमातरम कहेगा?

(वन्देमातरम तो कहना ही जुर्म है?)

नोट - तीन दिन बाद आज बिजली मिली है सो मन का गुबार निकाल रहे हैं। इसी कारण अभी तक आप सबसे दूर भी रहे।

2 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

ये समस्याएँ लगभग भारत के हर कोने में है लेकिन इन्हें कोई भी सुलझाने को तैयार नहीं ! यहाँ सिर्फ उन्ही मुद्धो पर काम होता है जिनसे वोट मिलने की सम्भावना हो | पार्क में मूर्तियों के नाम करोडो रूपये बहा दिए जायेंगे लेकिन वहां आने वालों के लिए एक पीने के पानी का नल नहीं लगेगा |

AlbelaKhatri.com said...

AISEE DUKHTI HUI BAHUT SI RAGEN HAIN
AAP TOH HAATH RAKHTE JAAIYE....
JAI HIND !