02 January 2009

या बस बधाई देते रहोगे??????

नए वर्ष में मिला देशवासियों को बम धमाके का तोहफा. क्या इसी तरह हम सुख, समृद्धि, उल्लास की कामना कर सकते हैं? कल कुछ ब्लॉग को पढ़ रहे थे तो उनके विचारों को जान कर लगा कि देश के बहुत बड़े समुदाय के ऊपर अभी भी मीडिया की प्रेत-छाया हावी है. इन ब्लोग्स की पोस्ट पर और टिप्पणी से जाहिर हो रहा था कि उन लोगों को नव वर्ष मनाने की जल्दी है, क्योंकि मुंबई बम धमाकों में मरने वाले उनके अपने नहीं हैं, बहुत अमीर लोग हैं, नेताओं के लाडले हैं........आदि-आदि. बहरहाल मेडिस ने ताज और नरीमन को दिखाया तो लगा कि मरने वाले सिर्फ़ अमीर हैं. एक पल को किसी को कोसने से पहले देखिये और याद कीजिए छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का नजारा, जहाँ पर मरने वाले अमीर नहीं रेल में सफर करने वाले आम नागरिक थे.

चलिए हम क्यों किसी के उत्सव में बढ़ा खड़ी करें? मनाइए और गाली दीजिये नेताओं को और मतदान के समय अपने-अपने घरों में बैठे रहना. जब जीत जाएँ अपराधे और बदमाश तब कोसना...............

अब ज़रा याद कर लो वर्ष 2009 की पहली तारिख जब आतंकियों ने बम धमाके करके असं में कईयों को मार दिया...........अरे!!!!! अरे!!!!!!! ये तो हमारे भाई नहीं....................मजे करो............

कहिये कैसा रहा नव-वर्ष?????

अब तो कुछ करो आतंक के विरुद्ध या बस बधाई देते रहोगे??????

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