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08 मई 2024

रहें सतर्क डिजिटल अरेस्ट से

तकनीकी के फैलते जाते मकड़जाल के बीच रहते हुए उससे सुरक्षित रहना आज बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है. कम्प्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट आदि ने जीवन-शैली को जितना आसान बनाया है उतना ही मुसीबत से भर दिया है. सूचना प्रौद्योगिकी के इस विकास के साथ-साथ होने वाले साइबर अपराधों में वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता है. यह आज के दौर में सभी को जानकारी है कि इंटरनेट के ज़रिए किए जाने वाले अपराधों को साइबर अपराध अथवा साइबर क्राइम कहते हैं. इस अपराध में कम्प्यूटर, इंटरनेट के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ीबैंक खाते से धन चुरानाहैकिंगअश्लीलता का प्रसार, वायरस का फैलावसॉफ़्टवेयर की चोरीदोषपूर्ण सॉफ़्टवेयर भेजकर कम्प्यूटर को ख़राब करना, किसी अन्य कम्प्यूटर नेटवर्क पर हमलापोर्नोग्राफी को बढ़ावा आदि शामिल रहता है. साइबर अपराध के तमाम सारे प्रकार में आजकल एक और प्रकार ने समाज के बीच फैलना शुरू कर दिया है, इसे साइबर अपराध की भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है.  

 

संभव है कि इस शब्दावली से आम आदमी परिचित न हो मगर इसके द्वारा जिस तरह का कृत्य किया जा रहा है उससे संभवतः प्रत्येक व्यक्ति का किसी न किसी रूप में सामना अवश्य ही हुआ होगा. न सही आप, आपके मित्र, रिश्तेदार, सहयोगी अथवा आसपास वाले किसी भी व्यक्ति के द्वारा ऐसा अवश्य ही सुनने में आया होगा कि उसको फोन के माध्यम से किसी के गिरफ्तार किये जाने की, उसके किसी पार्सल के गलत होने की, उसके बैंकिंग सम्बन्धी किसी समस्या के उत्पन्न होने की जानकारी दी गई होगी. इस तरह के अपराध में फोन के द्वारा बताया जाता है कि आपका बेटा, बेटी अथवा कोई अन्य रिश्तेदार पुलिस की, सीबीआई की अथवा नारकोटिक्स की हिरासत में है. उसके किसी अवैध गतिविधि में लिप्त पाए जाने की, ड्रग्स अथवा किसी अन्य नशे वाले पदार्थ के साथ पकडे जाने की खबर दूसरी तरफ से दी जाती है. इस तरह के फोन के अलावा अक्सर ऐसा फोन भी आता है जिसमें व्यक्ति के नाम से किसी पार्सल के आने की जानकारी देते हुए बताया जाता है कि उस पार्सल में आपत्तिजनक सामग्री आई हुई है अथवा विदेश से कोई अवैध सामान आया है. ऐसे फोन आने की स्थिति में दूसरी तरफ से बोलने वाला व्यक्ति खुद को पुलिस अथवा किसी प्रशासनिक विभाग का अधिकारी बताता है.

 

आजकल इस तरह के फोन कॉल आना साइबर अपराध में आम बात हो गई है. साइबर अपराध के क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों ने इस नए तरीके की ठगी को, अपराध को बहुत बुरी तरह से फैलाया हुआ है. ऐसे मामलों में अपराधियों द्वारा तकनीक का सहारा लेते हुए पुलिस का, सीबीआई का अथवा किसी अन्य प्रशासनिक विभाग का फर्जी वीडियो बनाकर वीडियो कॉल के द्वारा इस तरह से प्रदर्शन किया जाता है मानो फोन सत्य है और किसी आधिकारिक व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है. ऐसे अपराधी सामान्यजन की मानसिकता को भली-भांति जानते-समझते हैं. कोई भी जनसामान्य ऐसे किसी फोन पर तत्काल घबरा जाता है जिसमें उसके किसी नजदीकी के गिरफ्तार होने की सूचना दी जाये. कानूनी पचड़े में पड़ने से घबराने वाला सामान्य व्यक्ति ऐसी किसी भी बात से बहुत दूर रहता है जो उसे किसी अवैध कृत्य में संलिप्त कर दे. इस कारण ऐसे फोन आते ही सामान्य व्यक्ति तत्काल खुद को इस परेशानी से मुक्त करवाने का मार्ग खोजने लगता है. यह मार्ग फोन करने वाला अपराधी ही उसे बताता भी है. ऐसे में फर्जी फोन अथवा वीडियो कॉल के द्वारा सामान्य व्यक्ति अपराधियों के चंगुल में फंसकर ठगी का शिकार हो जाता है. अपने नजदीकी को हिरासत से मुक्त करवाने के लिए अथवा अपने आपको किसी अवैध पार्सल का मालिक साबित न होने देने के लिए वह अपराधियों के बताये तरीके से उनको धनराशि उपलब्ध करवा देता है. 

 

आजकल इस तरह के बढ़ते अपराधों के बाद शासन, प्रशासन ने सक्रियता बढ़ाई और गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर ने धोखाधड़ी से जुडी एक हजार से ज्यादा आईडी को ब्लॉक किया है. यहाँ शासन, प्रशासन के साथ-साथ व्यक्ति को खुद को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है. ऐसे किसी भी फोन अथवा वीडियो कॉल आने पर खुद को संयमित रखते हुए सबसे पहले वह इत्मिनान करे कि क्या वाकई उसका कोई नजदीकी रिश्तेदार अथवा परिचित ऐसा कर सकता है जिससे वह हिरासत में आये? इसके साथ-साथ व्यक्ति यह भी ध्यान में रखे कि आजकल इस तरह के कृत्य साइबर अपराधियों द्वारा किये जा रहे हैं. ऐसे में वह तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत कर दे अथवा अपने नजदीकी साइबर सेल में जाकर पुलिस को, प्रशासन को इस तरह के फोन आने की जानकारी दे. डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की अधिकता को देखते हुए प्रशासन द्वारा 1930 पर कॉल करके भी जानकारी देने की सुविधा सामान्य नागरिकों को उपलब्ध करवाई जा रही है.

 

शासन, प्रशासन के साथ-साथ हम सबको भी सतर्क रहने की आवश्यकता है. अपनी जानकारियों को, अपने व्यक्तिगत विवरणों को इंटरनेट पर, सोशल मीडिया पर शेयर करने से बचना चाहिए. जहाँ तक संभव हो अपने परिवार की जानकारियाँ भी इंटरनेट पर शेयर करने से बचना चाहिए. छोटे कदम उठाकर बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है. 






 

03 अक्टूबर 2023

साइबर अपराध की खामोश दस्तक

वर्तमान में कम्प्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से काम बहुत आसान हुआ है. सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ साइबर अपराधों में वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता है. सामान्य भाषा में इंटरनेट के ज़रिए किए जाने वाले अपराधों को साइबर अपराध अथवा साइबर क्राइम कहते हैं. कोई भी ऐसा आपराधिक, अवैध, अवांछनीय कार्य जो कम्प्यूटर, इंटरनेट अथवा संचार माध्यम से सम्बद्ध है, वह साइबर अपराध है. उदाहरणार्थ यदि कम्प्यूटर, इंटरनेट के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी, बैंक खाते से धन चुराना, हैकिंग, अश्लीलता का प्रसार, वायरस का फैलाव, सॉफ़्टवेयर की चोरी, दोषपूर्ण सॉफ़्टवेयर भेजकर कम्प्यूटर को ख़राब करना, किसी अन्य कम्प्यूटर नेटवर्क पर हमला, पोर्नोग्राफी को बढ़ावा, आंतरिक सूचनाओं और बौद्धिक संपदा की चोरी आदि को साइबर अपराध कहा जाता है. 


इनके अलावा कुछ साइबर अपराध ऐसे हैं जिनका प्रभाव सरकारों पर, राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है. इनमें साइबर जासूसी, साइबर युद्ध, साइबर आतंकवाद आदि आते हैं. साइबर युद्ध अथवा साइबर वारफेयर अन्य देशों के खिलाफ युद्ध के कार्यों को संचालित करने के लिए साइबरस्पेस का उपयोग है. भूमि, महासागर, वायु और अंतरिक्ष के बाद साइबरस्पेस को युद्ध का पाँचवाँ आयाम माना जाता है. आजकल साइबर आतंकवाद को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाया जाता है. इसके द्वारा आतंकवादी कंप्यूटर नेटवर्क पर हमला कर जनता के बीच बड़े पैमाने पर विनाश या भय को पैदा करके सरकार को निशाना बनाते हैं. इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा पर आक्रमण करना और रणनीतिक महत्व की जानकारी को नष्ट करना है. यह किसी भी देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है. 




राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2021 में भारत में साइबर अपराध के 52,974 मामले दर्ज किये गए जो वर्ष 2020 (50,035 मामले) की तुलना में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं. सीईआरटीइन (इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) के आँकड़ों के अनुसार 2022 में भारत में सबसे अधिक साइबर क्राइम के मामले दर्ज किए गए हैं. सीईआरटी साइबर सुरक्षा हमलों से निपटने के लिए केन्द्र सरकार की एक नोडल एजेंसी है जो सूचना प्रौद्यौगिकी मंत्रालय के तहत काम करती है. आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के 4047 मामले, ओटीपी जालसाजी के 1093 केस, डेबिट क्रेडिट कार्ड से ठगी की 1194 घटनाएँ और एटीएम से सम्बन्धित 2160 मामले दर्ज किए गए. रिपोर्ट में बताया गया कि सोशल मीड़िया पर फर्जी सूचना के 578 केस, ऑनलाइन परेशान करने या महिलाओं और बच्चों को साइबर धमकी से जुड़े 972 मामले, फर्जी प्रोफाइल के 149 और आँकड़ों की चोरी के 98 मामले जारी किए गए हैं.


भारत सरकार ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए सूचना प्रौद्यौगिकी अधिनियम 2000 पारित किया था, साथ ही आईपीसी की धाराओं में भी कुछ प्रावधान किए गए हैं. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की कुछ धाराओं में संशोधन भी किया गया है ताकि अपराधियों के विरुद्ध और सहजतापूर्वक कार्यवाही की जा सके. धारा 69ए के तहत पुलिस को अधिकार है कि किसी भी वेबसाइट को ब्लॉक कर सकती है. वर्तमान दौर में प्रत्येक हाथ में मोबाइल है, इंटरनेट है और उसका उपयोग भी बहुत तेजी से हो रहा है, ऐसे में आम जनसामान्य को बहुत अधिक सतर्क, समझदार होने की आवश्यकता है. सामान्य व्यक्ति की एक लापरवाही, एक गलती से साइबर अपराधी को अवसर मिल जाता है और वह किसी भी स्तर का संकट पैदा कर देता है, किसी भी तरह का नुकसान कर देता है. 


व्यक्तियों को अपने सिस्टम को लगातार अपडेट करते रहने की आवश्यकता है. इसके लिए अपने सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को नवीनतम स्थिति में बनाये रखा जाना चाहिए. इसके साथ-साथ कंप्यूटर अथवा मोबाइल में एंटी-वायरस का भी उपयोग करना चाहिए. इसके द्वारा अवांछित रूप से वायरस के हमले को रोका जा सकता है. व्यक्ति की जिम्मेवारी बनती है कि वह अपने खातों, सेवाओं से सम्बंधित पासवर्ड मजबूत बनायें. इसके अलावा अपने पासवर्ड को समय-समय पर बदलते भी रहना चाहिए. किसी अनजान ई-मेल को, स्पैम ई-मेल को खोलने से बचना चाहिए. 


नागरिकों के साथ-साथ प्रशासन को भी आवश्यक कदम उठाये जाने चाहिए, जिससे कि नागरिकों के हितों की सुरक्षा हो सके और साइबर अपराधियों के हौसले पस्त हों. इसके लिए ई-वाणिज्य और ई-प्रशासन को बढ़ाने देने के लिए पुलिस एवं उपकरणों को प्रशिक्षित करके इस योग्य बनाया जाये कि वे साइबर अपराध की जाँच कर सकें. पुलिस में कम्प्यूटर के क्षेत्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षित करके इस अपराध से निपटने के योग्य बनाना चाहिए. उनको शोषित व्यक्ति के प्रति सहानुभूति दर्शाते हुए दोस्ताना एवं मधुर वार्तालाप बनाये जाने को भी प्रेरित किया जाना चाहिए.


इंटरनेट हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है. यह भी एक तरह का समाज बन गया है जहाँ प्रत्येक मानसिकता के लोग रह रहे हैं. यहाँ भले लोग भी हैं तो आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी हैं. ऐसे में साइबर अपराधियों से बचने के हम सबको ही सतर्क रहने की आवश्यकता है. लापरवाही से बचने की जरूरत है. कुछ सुरक्षात्मक उपायों को अपनाये जाने की आवश्यकता है. यदि प्रशासन एवं आम जनता इस सन्दर्भ में दिए जाते सुझावों पर अमल करती है तो निश्चित ही इन अपराधों और समस्याओं से बचा जा सकेगा.


28 अगस्त 2023

सोशल मीडिया की भेड़चाल से बचने की आवश्यकता

वर्ष 2021 का समय था जबकि खबर आई थी कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा प्रसिद्द सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक को Meta (मेटा) के नाम से जाना जाएगा. इस नाम परिवर्तन पर कम्पनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बताया कि हम इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक ही सीमित नहीं रखना चाहते हैं. अब जो हम करने जा रहे हैं, उसके लिए नए नाम के साथ आगे जाने की आवश्यकता है. मेटा का अर्थ ग्रीक भाषा में होता है हद से पार, कम्पनी के द्वारा नाम बदलने को लेकर एक कारण यह भी रहा कि वे इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कहीं आगे एक वर्चुअल दुनिया में ले जाना चाहते हैं. इसमें कम्पनी एक ऐसी वर्चुअल दुनिया बना रही है जहाँ लोग अपने कमरे में बैठकर एक समय में कई जगहों पर वर्चुअली रूप से अलग-अलग काम कर सकते हैं. इंटरनेट की इस नई दुनिया को मेटावर्स का नाम दिया गया है.

 



कम्पनी के सीईओ ने खुद इसका नाम बदलकर इसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से कहीं और आगे ले जाने का सपना देखा जबकि इसी प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय लोग भेड़चाल में फँसे हुए हैं. सोशल मीडिया पर आये दिन एक तरह की भेड़चाल शुरू होती है, जहाँ पर बिना सोचे-समझे इसके उपयोगकर्ता उसके अंधानुकरण में लग जाते हैं. आप सभी ने गौर किया होगा कि आये दिन सोशल मीडिया पर कुछ इस तरह की पोस्ट तेजी से वायरल होती हैं जिसमें किसी विशेष तारीख को रात के कॉस्मिक किरणों के पृथ्वी के करीब से गुजरने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान होने, पृथ्वी को खतरा होने की बात कही जाती है. किसी पोस्ट में किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चे के इलाज के लिए धन का एकत्रण लाइक, शेयर आदि के द्वारा किया जाता है. कभी किसी लापता बच्चे को खोजने का निवेदन होता है, कभी किसी के गुम हुए कागजात के बारे में पोस्ट वायरल होती है. सोशल मीडिया पर एकदम से फ्री बैठा उपयोगकर्ता बिना कुछ आगा-पीछा सोचे ऐसी पोस्ट को शेयर करने में लग जाता है. आजकल इसी तरह की भेड़चाल सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही है जहाँ पर मुफ्त में इस्तेमाल किये जा रहे प्लेटफ़ॉर्म को ही नोटिस देने वाली पोस्ट बुरी तरह से छाई हुई हैं.  

 

तेजी से और बुरी तरह से वायरल होती इस पोस्ट में फेसबुक को अपनी निजता का उल्लंघन न करने, अपनी फोटो, वीडियो आदि के सार्वजनिक न किये जाने के सम्बन्ध में चेतावनी, नोटिस दिए जा रहे हैं. आईपीसी की विशेष धारा का उल्लेख करते हुए फेसबुक पर कार्यवाही करने की बात इस पोस्ट में है. निजता के उल्लंघन न करने की, फोटो, वीडियो आदि को सार्वजनिक न करने की बात को लिखने वालों ने कभी विचार किया है कि इंटरनेट पर किसी भी प्लेटफ़ॉर्म का जब भी उपयोग किया जाता है तो उसकी बहुत सारी शर्तों, नियमों पर अपनी अनुमति दी जाती हैं. क्या कभी इन नियमों या शर्तों को पढ़ने की फुर्सत निकाली गई? क्या किसी भी प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करने के पूर्व उसकी चरणबद्ध प्रक्रिया को पूरा करने की जल्दबाजी में हम सबने अपनी सहमति देने के पहले उनको पढ़ने की, समझने की कोशिश की?

 

आखिर हम सभी मुफ्त के ऐसे तमाम सारे एप्लीकेशन का उपयोग करने, उस प्लेटफ़ॉर्म पर अपने आपको सर्वाधिक सक्रिय दिखाने की अतिशय जल्दबाजी में भुला बैठते हैं कि अपने उपकरण में, चाहे वह कम्प्यूटर हो या फिर मोबाइल, हम ही उस सॉफ्टवेयर को भीतर तक झाँकने की अनुमति देते हैं. उसको अपने कॉन्टेक्ट्स, अपनी गैलरी, अपनी लोकेशन, अपना कैमरा, अपना माइक आदि का उपयोग करने की अनुमति देते हैं. ऐसा करने के बाद ही सम्बंधित एप्लीकेशन हमारे उपकरण में इंस्टॉल होती है और उसके बाद ही हम उसका उपयोग कर पाते हैं. ऐसा करने के बाद हमारे हाथ में निजता जैसी, गोपनीय जैसी कोई बात रह नहीं जाती है. सोशल मीडिया के मुफ्त में मिलते प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करने की चाहत में हम स्वयं ही अपनी गोपनीयता, अपनी निजता किसी दूसरे सॉफ्टवेयर के हाथों में थमा देते हैं. अब पूर्व में दी गई हमारी अनुमति के आधार पर वह हमारे उपकरण में सेंधमारी करता रहता है; हमारी सक्रियता पर निगाह रखता है; हमारे क्रियाकलापों को देखता रखता है. क्या आपने कभी इस पर गौर नहीं किया कि सोशल मीडिया के किसी मंच पर आपकी उपस्थिति का स्वागत उन्हीं वस्तुओं, सेवाओं, उत्पादों के विज्ञापन से होती है जिनको आपने सर्च इंजन में खोजा होता है? क्या आपने कभी विचार किया है कि आपके विभिन्न एप्लीकेशन, विभिन्न वेबसाइट, विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म के पासवर्ड भूल जाने की स्थिति में यही इंटरनेट आपको दूसरा पासवर्ड उपलब्ध करवा देता है?

 

ध्यान रखिये, इंटरनेट के उपयोग की स्थिति में अब हमारा-आपका कुछ भी गोपनीय नहीं है, कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है. हमारी सारी की सारी जानकारी, क्रियाकलाप, घूमना-फिरना, खाना-पीना आदि किसी न किसी सर्वर के माध्यम से दूसरे हाथों में है. वायरल होती ऐसी अनावश्यक चेतावनी वाली पोस्ट से एकबारगी आप भले अपने आपको संतुष्ट कर लें मगर इंटरनेट की दुनिया में अपनी खुराफात के लिए सक्रिय तत्त्वों ने तो अपना काम कर ही लिया. देखा जाये तो अब हम सब इंटरनेट के गुलाम हैं. हमारे सभी कंप्यूटर, मोबाइल, तमाम संस्थान, अनेकानेक जानकारियाँ आदि किसी न किसी सर्वर के कब्जे में हैं. वर्तमान दौर में इंटरनेट से दूर रह पाना संभव नहीं ऐसे में यहाँ के आपराधिक तत्त्वों से बचने का उपाय सिर्फ सावधानी है, ऐसी बेवकूफी भरी पोस्ट का शेयर करना नहीं. इंटरनेट का उपयोग करके ज्ञानवान, प्रतिभावान बनिए न कि दूसरे के हाथों में खेलते हुए बेवकूफ बनिए.  

 






 

16 जनवरी 2023

ऑनलाइन धोखाधड़ी का फैलता जाल

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की हालिया रिपोर्ट में ऑनलाइन धोखाधड़ी से सम्बंधित मामलों के आँकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि डराने वाले भी हैं. रिपोर्ट के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में देश में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में तीन गुना से भी अधिक की वृद्धि हुई है. पाँच वर्ष पूर्व ऑनलाइन धोखाधड़ी की दर्ज शिकायतों की संख्या साठ हजार से कम थी जो बढ़कर एक लाख चौरासी हजार तक पहुँच गई है. ये चिंताजनक इसलिए है क्योंकि ये वे आँकड़े हैं जिनकी शिकायत साइबर सेल में दर्ज हुई है. बहुत से मामले तो ऐसे होंगे जिनमें शिकार व्यक्तियों ने शिकायत दर्ज नहीं करवाई होगी.


वर्तमान दौर तकनीक का है. बहुसंख्यक लोग इंटरनेट के माध्यम से खरीदारी करने का काम करते हैं. अपने मनपसंद सामान को लेने के बाद तत्काल ही एक क्लिक पर उसका भुगतान हो जाता है. ऑनलाइन खरीददारी के साथ-साथ ऑनलाइन भुगतान वाली स्थिति भी लोगों के लिए बहुत सामान्य सी हो गई है. उनके लिए अब पर्स में नकद धनराशि रखने वाली समस्या नहीं है, उसकी सुरक्षा की चिंता नहीं है. मोबाइल, लैपटॉप आदि के माध्यम से पलक झपकते ही भुगतान हो जाता है मगर यही सुविधा उपभोक्ताओं के साथ ठगी भी करवा रही है. ऑनलाइन आर्थिक गतिविधियों के सञ्चालन में एक तरफ वे लोग हैं जो इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, इसके दूसरी तरफ वे अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी हैं जो इन ऑनलाइन तकनीक का लाभ उठाकर धोखाधड़ी कर रहे हैं, उपभोक्ताओं को लूट रहे हैं. सामान्य बोलचाल में इसे साइबर अपराध या साइबर क्राइम कहा जाता है.




वर्तमान में सरकार के सामने साइबर सुरक्षा बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने है. साइबर सुरक्षा ऐसा क्षेत्र है जो बहुत ज़्यादा अस्थिर है. साइबरस्पेस से जुड़े खतरे और उनके अलग-अलग तरीक़ों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है. अभी हाल ही में रैनसमवेयर अटैक के कारण नई दिल्ली के एम्स में साइबर सुरक्षा में लगी सेंध इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है. वर्ष 2022 की माइक्रोसॉफ्ट डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र और राज्य अपने-अपने स्तर पर लगातार बढ़ते साइबर हमलों का सामना कर रहे हैं. ये हमले मुख्य रूप से सूचना तकनीक क्षेत्र में, वित्तीय सेवाओं में, परिवहन प्रणाली के साथ-साथ संचार से जुड़े बुनियादी ढाँचे पर हो रहे हैं. साइबर अपराध से जुड़े लोग न केवल सामान्यजन को अपना निशाना बनाते हैं वरन सरकार की सेवाओं और सुविधाओं को जन-जन तक पहुँचाने वाले मंचों को भी अपना निशाना बनाते हैं. इसी कारण से साइबर सुरक्षा सरकार की दृष्टि से भी और आमजन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है.


नेशनल कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों अर्थात राष्ट्रीय सीईआरटी द्वारा देश की सीमा के भीतर और सीमा पार से संभावित साइबर खतरों को पहचानने में महत्त्वपूर्ण कार्य किया है. आज भी साइबर सुरक्षा उल्लंघनों और इससे जुड़ी घटनाओं की सूचना देने में सीईआरटी सबसे आगे है. कह सकते हैं कि सरकारी तंत्रों में साइबर अपराधियों के सेंध लगाये जाने को रोकने के अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उपाय हैं किन्तु आमजन जरा सी लापरवाही के कारण ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है. यद्यपि सरकार की तरफ से भी नागरिकों के हितों की रक्षा के प्रयास लगातार किये जाते हैं इसके बाद भी सामान्य उपभोक्ता साइबर अपराधी द्वारा ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है. ऐसी स्थिति में नागरिकों को स्वयं में सचेत और सजग रहने की महती आवश्यकता है.


साइबर क्राइम वास्तव में एक अपराध ना होकर विभिन अपराधों का समूह है जिसमे हैकिंग, ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, स्पैम ईमेल, रैनसमवेयर, पोर्नोग्राफी, ऑनलाइन ब्लैकमेल एवं इसी प्रकार के अन्य अपराध आते है. किसी भी साइबर अपराधी द्वारा किये जाने वाला सबसे आम साइबर अपराध हैकिंग और अनाधिकृत प्रवेश है. इसमें अपराधी मानसिकता के किसी भी व्यक्ति द्वारा कम्प्यूटर अथवा किसी नेटवर्क में बिना सम्बंधित व्यक्ति की अनुमति के उसका सञ्चालन करना हैकिंग अथवा अनाधिकृत प्रवेश कहलाता है. इसके द्वारा विभिन्न प्रकार की निजी जानकारियाँ और महत्वपूर्ण सीक्रेट डाटा को चुराया जाता है, जिसके माध्यम से यूजर को वित्तीय एवं अन्य प्रकार से नुकसान पहुँचता है. सबसे अधिक अपराध ऑनलाइन ठगी द्वारा किया जा रहा है. अपराधियों द्वारा उपभोक्ता की बैंकिंग जानकारियाँ चुरा ली जाती हैं और उसके माध्यम से उपभोक्ता के बैंक खाते से रकम निकाल ली जाती है. ऑनलाइन ठगी में एक अन्य रूप में फ़ोन कॉल के द्वारा लोगों से उनके फ़ोन नंबर पर किसी सेवा सुविधा के लिए ओटीपी, क्रेडिट-कार्ड, डेबिट कार्ड नंबर आदि देने को कहा जाता है. जैसे ही उपभोक्ता के द्वारा ऐसा किया जाता है, साइबर अपराधी उसके बैंक खाते में सेंध लगाकर धन की निकासी कर लेते हैं. इसके अलावा कई बार उपभोक्ता को स्पैम ईमेल भेजी जाती है. उपभोक्ता द्वारा उस लिंक पर क्लिक करते ही सिस्टम को हैक कर लिया जाता है. इस तरह भी उपभोक्ता अपनी निजी या बैंकिंग जानकारियाँ अनजाने ही साइबर अपराधियों तक पहुँचा देते हैं.  


ऐसा नहीं नही कि साइबर अपराधियों से बचने का कोई तरीका ही नहीं है. बचने के लिए सबसे प्रमुख है उपभोक्ता का स्वयं में जागरूक रहना. अक्सर इंटरनेट यूजर को ऐसे ईमेल और मैसेज आते रहते हैं जिन पर अनजान लिंक मौजूद होते हैं. इन ईमेल और मैसेज से सावधान रहना चाहिए. कुछ इसी तरह की स्थिति उस समय होती है जबकि कोई व्यक्ति किसी वेबसाइट पर अपने उत्पाद, सम्बंधित सेवा की तलाश कर रहा होता है. यहाँ ध्यान रखा जाये कि अनजान वेबसाइट पर क्लिक न किया जाये. आये दिन हम सभी किसी न किसी एप्लीकेशन को अपने मोबाइल या लैपटॉप में डाउनलोड करते हैं. मुफ्त के एप्लीकेशन और उनके साथ-साथ अन्य दूसरे एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के लालच से बचना चाहिए. यदि किसी एप्लीकेशन द्वारा किसी भी तरह की अनुमति माँगी जा रही है तो उसे देने के पहले अवश्य जाँच लें कि सम्बंधित कदम की आवश्यकता उस एप्लीकेशन के लिए कितनी है. इंटरनेट उपभोक्ता को अपनी व्यक्तिगत, बैंकिंग सम्बन्धी और अन्य गोपनीय जानकारियाँ सबके साथ शेयर नहीं करनी चाहिए. अक्सर इनके द्वारा भी साइबर अपराधी द्वारा अपराध किये जाते हैं.


उपभोक्ता अपने नेटवर्क को सुरक्षित रखें. कोशिश करें कि अपने मोबाइल, लैपटॉप आदि को यथसंभव अपडेट करते रहें. इसके अलावा सार्वजनिक वाई-फाई की सुविधा का इस्तेमाल करने से भी यथासंभव बचें. यह माध्यम भी साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके साथ-साथ अपने एप्लीकेशन में, अपनी वेबसाइट अथवा किसी भी अन्य ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म में प्रयोग किये जाने वाले पासवर्ड को मजबूत और सुरक्षित बनायें. सुरक्षित बनाये गए पासवर्ड को भी समय-समय पर बदलते रहें. ध्यान रखें यदि हम सावधानी बरतेंगे, जरा से सजग रहेंगे तो साइबर अपराधियों द्वारा फैलाये गए जाल में फँसने से बच सकेंगे.  





 

25 जनवरी 2022

साइबर अपराध से सतर्क रहने की आवश्यकता

वर्तमान तकनीकी दौर में मोबाइल ने जिस तेजी से जनमानस के बीच अपनी जगह बनाई है उतनी शायद ही किसी और उपकरण ने बनाई हो. मोबाइल, कम्प्यूटर, इंटरनेट आदि के समन्वय ने रोजमर्रा के कामों को भी बहुत हद तक सरल किया है. वर्तमान में समाज के लगभग सभी कार्य इंटरनेट के माध्यम से होने लगे हैं. सरकार हो या आम आदमी, सरकारी संगठन हों या फिर निजी संस्थान, व्यापार हो या फिर नौकरी, शिक्षा हो या समाजसेवा सभी क्षेत्र आज इंटरनेट का लाभ उठा रहे हैं. इन तकनीकी उपकरणों के आरंभिक उपयोग में लोगों द्वारा, समाजशास्त्रियों द्वारा, मनोविज्ञानियों  आदि द्वारा इसके नुकसान बताते हुए इनके कम से कम उपयोग के लिए जोर दिया जाता था. सलाहों को बहुत हद तक स्वीकारा भी गया, बहुद हद तक अस्वीकार भी किया गया. जहाँ-जहाँ आवश्यकता समझ आई वहाँ इस तकनीक का उपयोग किया गया.

 

विगत दो वर्षों में, जबकि कोरोना ने अपना कहर मचाया, ज्यादातर समय में लोगों को लॉकडाउन जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा हो, संस्थानों को बंद करके उनके कर्मचारियों को घर से ही काम करने के निर्देश दिए गए हों तब इस तकनीक की महत्ता और भी निखर कर सामने आई. न केवल संस्थानों में बल्कि शैक्षिक संस्थाओं में भी इस तकनीक के द्वारा पठन-पाठन का काम आरम्भ किया गया. जनमानस को इस तकनीक में लाभ दिखाई देने लगा. लॉकडाउन जैसी स्थिति में लोगों के काम भले ही सामान्य गति से न चले हों मगर इस तकनीक के माध्यम से बहुत से कामों में गति बनी रही.

 

इस लाभ के साथ अनचाहे ही बहुत से नुकसान भी समाज में दिखाई देने लगे हैं. इंटरनेट जहाँ एक तरफ लोगों को लाभान्वित कर रहा है वहीं दूसरी तरफ वह नुकसान भी पहुँचा रहा है. इस तरह के तमाम सारे नुकसान को साइबर क्राइम या फिर साइबर अपराध के नाम से जाना जाता है. सामान्य रूप में इंटरनेट पर किया जाने वाला कोई भी अपराधिक कार्य साइबर अपराध के अंतर्गत आता है. इस तरह के अपराध में हैकिंग तो शामिल है ही साथ ही बैंकिंग धोखाधड़ी, किसी का डाटा, जानकारी का चुराया जाना, किसी तरह की धोखाधड़ी करके किसी दूसरे के एकाउंट, ईमेल आदि को हैक कर लेना भी साइबर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है. कोरोना के चलते इंटरनेट का उपयोग बहुतायत में हो रहा है. ऐसे में साइबर अपराधियों को भली-भांति जानकारी है कि ऐसे समय में साइबर क्राइम करना सहज हो सकता है.

 

साइबर अपराध में जिस तरह के कार्यों को मुख्य रूप से शामिल किया गया है, उनमें वित्तीय अपराधअवैध सामग्रियों को बेचनाअश्लील सामग्री का प्रसार-प्रचार, बौद्धिक संपत्ति की चोरीजालसाजीआदि हैं. साइबर अपराध की श्रेणी में मुख्य रूप से हैकिंग को शामिल किया गया है. इसमें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जानकार व्यक्ति द्वारा किसी कंप्यूटर को लक्ष्य करके उसके लिए सम्बंधित प्रोगाम का निर्माण किया जाता है. इसके बाद वे उस लक्ष्य कंप्यूटर में अपने प्रोग्राम के द्वारा एंट्री करके उस सम्बंधित कंप्यूटर से डाटा चोरी करते हैं. ऐसे हैकर्स का मुख्य लक्ष्य आर्थिक लाभ उठाना होता है. वे इसके लिए किसी अन्य व्यक्ति के कंप्यूटर में अवैध प्रवेश करके उसके कंप्यूटर से बैंक, क्रेडिट कार्ड, एटीएम आदि की सूचनाएँ हासिल कर लेते हैं. किसी व्यक्ति की आर्थिक सूचनाओं को चोरी करने के साथ-साथ ऐसे लोग बड़े-बड़े संस्थानों में भी सेंध लगाते हैं.

 

आर्थिक चोरी के साथ-साथ वर्तमान में इंटरनेट पर बहुत बड़ा बाजार पोर्नोग्राफी का है. बहुत सी वेबसाइट इसके लिए वयस्कों से सम्बंधित बने नियम-कानूनों का इस्तेमाल करके अपना कारोबार करती हैं मगर बहुत सी वेबसाइट ऐसी हैं जो बाल यौन सम्बन्धी सामग्री का प्रसार करती हैं. देखा जाये तो वैश्विक स्तर पर बाल यौन सामग्री का सर्वाधिक प्रसार इंटरनेट के माध्यम से हो रहा है. इंटरनेट पर अश्लील सामग्री अत्यंत सुलभ है. आजकल हर हाथ में मोबाइल होने से औ हर हाथ में इंटरनेट होने से इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री को किसी तक पहुँच बनाना कठिन काम नहीं रह गया है. बच्चे भी अब इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री से दूर नहीं रह पाते हैं. यौन अपराध में लिप्त लोग इसी कारण से यौन अपराध के लिए बच्चों को लक्ष्य करते हैं. इसके लिए वे बच्चों में अश्लील सामग्री, वीडियो, फोटो आदि प्रसारित कर उन्हें बहकाते हैं. ऐसी सामग्री को देखने के बाद बहुत से बच्चे भटक जाते हैं. यही बच्चे इन यौन अपराधियों के द्वारा जबरन यौन अपराध में लिप्त कर दिए जाते हैं.  

 

इन दो मुख्य अपराधों के अलावा साइबर अपराधी भ्रामक ईमेल भेजने के कार्य करता है, जिससे कि यूजर से निजी सूचना लेकर उसके एकाउंट से चोरी करने का प्रयास किया जाये. ईमेल के द्वारा सम्बंधित यूजर को बताया जाता है वह किसी और वेबसाइट में जाकर अपने बैंक की, अपने आधार कार्ड की, अपने पैन कार्ड की, अपने एटीएम की, अपने अन्य किसी दस्तावेज़ की जानकारी भर कर उसे अपडेट करवा ले. ऐसा करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यूजर की समस्त जानकारियों को प्राप्त करना होता है. ऐसा करके साइबर अपराधी सम्बंधित यूजर के साथ धोखाधड़ी कर लेता है. इसके लिए साइबर अपराधी कई बार फोन कॉल करके ओटीपी अथवा अन्य गुप्त कोड को बताने की बात करता है. अब जबकि इंटरनेट का उपयोग सर्व-सुलभ रूप से किया जाने लगा है और यह उपयोग हमारे दैनिक जीवन की दैनिक क्रियाओं की तरह हो गया है तो हम सबको इसके उपयोग में सावधानी बरतने की भी आवश्यकता है. यहाँ हमें ध्यान रखना होगा कि अपने किसी भी इंटरनेट खाते का पासवर्ड सरल नहीं बनाना चाहिए. हमें अपने खातों का पासवर्ड ऐसा बनाना चाहिए जिसे हैक करना सहज न हो. कभी भी अपने नाम, अपनी जन्मतिथि, अपने मोबाइल नंबर, अपने परिजनों के नाम आदि से सम्बंधित पासवर्ड नहीं बनाना चाहिए. ऐसे पासवर्ड को डिकोड करना आसान होता है.

 

इसके अलावा किसी को भी फोन पर अपने किसी भी इलेक्ट्रॉनिक कार्ड का ओटीपी, पिन आदि नहीं बताना चाहिए. कई बार साईबर अपराधी स्वयं को सम्बंधित बैंकिंग संस्थान का व्यक्ति बताकर गुप्त कोड की जानकारी कर लेता है. इसके लिए ऐसी किसी भी तरह की कॉल आने पर पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए. इसी तरह से अपने सोशल मीडिया खातों के लिए, अपने बैंक खातों के लिए, अपने व्यापारिक खातों के लिए डबल स्टेप सुरक्षा व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए. इस व्यवस्था में लॉग इन करने पर मोबाइल पर एक गुप्त कोड तत्काल प्राप्त होता है. इस तरह की टू वे वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनाये जाने से भी बहुत हद तक साइबर अपराध को रोका जा सकता है.

इधर देखने में आ रहा है कि साइबर अपराधियों ने कोरोना महामारी को भी अपनी धोखाधड़ी के लिए हथियार बना लिया है. उन्होंने कोरोना सम्बन्धी वैक्सीनेशन को भी अपनी धोखाधड़ी का माध्यम बना लिया है. ये अपराधी कहीं वैक्सीनेशन के नाम पर, कहीं उसको प्रमाणित करने के नाम पर धोखा फर्जी वेबसाइट के द्वारा आर्थिक धोखाधड़ी कर रहे हैं. इसी तरह कोरोना के नाम पर सरकारी सहायता देने के नाम पर, राशन वितरण के रूप में, कहीं बैंक खातों में धनराशि पहुँचाये जाने का लालच देकर जनमानस के बैंक खातों की जानकारी प्राप्त करके धोखाधड़ी कर रहे हैं.

 

इसके अलावा सबसे ऊपर जो बात है, वो ये कि हम सभी को सजग रहने की आवश्यकता है. हम इंटरनेट पर जो भी काम कर रहे हैं, उनसे सम्बंधित सुरक्षा उपायों को, क़दमों को अपनाते हुए ही आगे बढ़ें. किसी भी तरह के इंटरनेट कार्य को करने के पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह सुरक्षित है और साथ ही उस इंटरनेट सम्बन्धी कार्य से हम भी तो अनजाने में कोई साइबर अपराध तो करने नहीं जा रहे. ध्यान रखें कि सावधानी ही बचाव है.



(उक्त आलेख आज दिनांक, 25 जनवरी 2022 के बीपीएन टाइम्स समाचार-पत्र में सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ है.)
 

02 जनवरी 2022

साइबर क्राइम से बचा जा सकता है

साइबर अपराध या साइबर क्राइम आज एक प्रचलित शब्द है. आखिर ये साइबर अपराध क्या है? सहज शब्दों में कहें तो इंटरनेट का उपयोग करके कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल के द्वारा किया गया कोई भी गैर-कानूनी कार्य साइबर अपराध है. इसके द्वारा एक व्यक्ति मोबाइल, कंप्यूटर आदि के द्वारा इंटरनेट का उपयोग करके किसी दूसरे व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी करके गैर कानूनी तरीके से किसी भी कार्य को करता है तो उस व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य साइबर अपराध कहलाता है. ऐसे कार्य करने वाले व्यक्ति को साइबर अपराधी कहते हैं.


इस तरह के अपराध में साइबर अपराधी कोई ना कोई गैर कानूनी तरीके से ऑनलाइन मोड में किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी जैसे उसके लेनदेन करने के खाते का, व्यापारिक गतिविधि के खाते का, सोशल मीडिया खाते का लॉग इन आईडी, उसका पासवर्ड, उसकी निजी जानकारी, उसके बैंक से सम्बंधित जानकारी, केडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, आदि की जानकारी लेने अथवा चुराने का प्रयास किया जाता है या फिर चुरा लिया जाता है. ऐसा करने के बाद साइबर अपराधी आर्थिक नुकसान पहुँचाता है.




आर्थिक अपराध के अलावा इंटरनेट पर अब बिना सम्बंधित व्यक्ति की जानकारी के, बिना उसकी अनुमति के उसकी सामग्री का चोरी किया जाना भी आम बात होती जा रही है. ऐसे में यह भी एक तरह का अपराध है.


इसके साथ-साथ किसी व्यक्ति की निजी जानकारी के लिए किसी भी अवैध तरीके से उसके लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल आदि में प्रवेश करके सामग्री, जानकारी का चोरी करना भी साइबर अपराध है.


साइबर अपराध में किसी भी अपराधी को कंप्यूटर, मोबाइल के साथ-साथ एक इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है. उसी के द्वारा वह किसी व्यक्तिगत या सरकार की आर्थिक संपत्ति अथवा अन्य तरह के अपराध करता है.


साइबर अपराध में केवल किसी दूसरे की जानकारी को चोरी करना, आर्थिक चोरी करना ही अपराध नहीं है बल्कि किसी दूसरे की किसी भी तरह की डिवाइस में किसी ऐसे वायरस को पहुँचाना भी अपराध है जिससे उस सम्बंधित कंप्यूटर, मोबाइल आदि को नुकसान पहुँचाया जा सके. इसी तरह किसी भी व्यक्ति की निजी अथवा किसी सार्वजनिक जानकारी का उपयोग बिना उसकी जानकारी, अनुमति के करना भी साइबर अपराध है. किसी दूसरे व्यक्ति की मेल आईडी का गैर-कानूनी इस्तेमाल करना अथवा उसकी क्लोनिंग करके किसी दूसरे से ठगी, धोखाधड़ी करना आदि भी साइबर अपराध की श्रेणी में आता है.


इधर सोशल मीडिया का उपयोग भी बहुतायत हो रहा है. इंटरनेट की मदद से सोशल साइट्स पर गैर कानूनी फोटो, वीडियो, सामग्री, जानकारी को फैलाना से भी साइबर अपराध माना गया है. इसमें इस तरह की जानकारी, सामग्री भी अपराध की श्रेणी में शामिल है जिसके द्वारा सांप्रदायिक तनाव बढे, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो, देश हित से सम्बंधित किसी भी जानकारी का गैर-कानूनी इस्तेमाल हो.


इसके अलावा तमाम सोशल साइट्स एप्स जैसे Watsaap, Facebook, Twitter, Teligram, Instagram आदि पर फर्जी नाम या फर्जी आईडी बना कर गैर कानूनी तरीके से किया गया कोई भी कार्य साइबर अपराध कहलाता है.


साइबर अपराधियों से खुद को बचाए रखने के लिए आवश्यक है कि हम सभी अपने सुरक्षा कदमों को मजबूत रखें. अपने खातों से सम्बंधित जानकारियों को सार्वजनिक न करें.


किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि में उपयोग होने वाले प्लेटफोर्म में उपयोग किये जाने वाले किसी भी गुप्त कोड को किसी के साथ भी शेयर न करें.


समय-समय पर अपनी आईडी का पासवर्ड बदलते रहें. अनजान मैसेज लिंक या मोबाइल पर आए नोटिफिकेशन पर तब तक क्लिक न करें जब तक कि उसके बारे में पुख्ता जानकारी हासिल न हो.


यदि मनी ट्रांसफर करने वाले तमाम एप्प्स, जैसे SBI नेटबैंकिंग, Phone Pay, Google Pay आदि का यदि उपयोग करते हों तो उनकी टू स्टेप सुरक्षा व्यवस्था करें. साथ ही उसमें काम करने के बाद तुरंत Logout कर दें.


ऐसे अनेक छोटे-छोटे कदम हैं, जिनके उठाये जाने के बाद साइबर अपराधियों के क़दमों को रोका जा सकता है. यह हम सबकी सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है.


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08 अक्टूबर 2020

साइबर अपराधियों से सतर्क रहने की आवश्यकता

वर्तमान में समाज के लगभग सभी कार्य इंटरनेट के माध्यम से होने लगे हैं. सरकार हो या आम आदमी, सरकारी संगठन हों या फिर निजी संस्थान, व्यापार हो या फिर नौकरी, शिक्षा हो या समाजसेवा सभी क्षेत्र आज इंटरनेट का लाभ उठा रहे हैं. इस लाभ के साथ अनचाहे ही बहुत से नुकसान भी समाज में दिखाई देने लगे हैं. इंटरनेट जहाँ एक तरफ लोगों को लाभान्वित कर रहा है वहीं दूसरी तरफ वह नुकसान भी पहुँचा रहा है. इस तरह के तमाम सारे नुकसान को साइबर क्राइम या फिर साइबर अपराध के नाम से जाना जाता है. सामान्य रूप में इंटरनेट पर किया जाने वाला कोई भी अपराधिक कार्य साइबर अपराध के अंतर्गत आता है. इस तरह के अपराध में हैकिंग तो शामिल है ही साथ ही बैंकिंग धोखाधड़ी, किसी का डाटा, जानकारी का चुराया जाना, किसी तरह की धोखाधड़ी करके किसी दूसरे के एकाउंट, ईमेल आदि को हैक कर लेना भी साइबर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है.


साइबर अपराध में जिस तरह के कार्यों को मुख्य रूप से शामिल किया गया है, उनमें वित्तीय अपराध, अवैध सामग्रियों को बेचना, अश्लील सामग्री का प्रसार-प्रचार, बौद्धिक संपत्ति की चोरी, जालसाजी, आदि हैं. साइबर अपराध की श्रेणी में मुख्य रूप से हैकिंग को शामिल किया गया है. इसमें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जानकार व्यक्ति द्वारा किसी कंप्यूटर को लक्ष्य करके उसके लिए सम्बंधित प्रोगाम का निर्माण किया जाता है. इसके बाद वे उस लक्ष्य कंप्यूटर में अपने प्रोग्राम के द्वारा एंट्री करके उस सम्बंधित कंप्यूटर से डाटा चोरी करते हैं. ऐसे हैकर्स का मुख्य लक्ष्य आर्थिक लाभ उठाना होता है. वे इसके लिए किसी अन्य व्यक्ति के कंप्यूटर में अवैध प्रवेश करके उसके कंप्यूटर से बैंक, क्रेडिट कार्ड, एटीएम आदि की सूचनाएँ हासिल कर लेते हैं. किसी व्यक्ति की आर्थिक सूचनाओं को चोरी करने के साथ-साथ ऐसे लोग बड़े-बड़े संस्थानों में भी सेंध लगाते हैं.




आर्थिक चोरी के साथ-साथ वर्तमान में इंटरनेट पर बहुत बड़ा बाजार पोर्नोग्राफी का है. बहुत सी वेबसाइट इसके लिए वयस्कों से सम्बंधित बने नियम-कानूनों का इस्तेमाल करके अपना कारोबार करती हैं मगर बहुत सी वेबसाइट ऐसी हैं जो बाल यौन सम्बन्धी सामग्री का प्रसार करती हैं. देखा जाये तो वैश्विक स्तर पर बाल यौन सामग्री का सर्वाधिक प्रसार इंटरनेट के माध्यम से हो रहा है.


इंटरनेट पर अश्लील सामग्री अत्यंत सुलभ है. आजकल हर हाथ में मोबाइल होने से औ हर हाथ में इंटरनेट होने से इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री को किसी तक पहुँच बनाना कठिन काम नहीं रह गया है. बच्चे भी अब इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री से दूर नहीं रह पाते हैं. यौन अपराध में लिप्त लोग इसी कारण से यौन अपराध के लिए बच्चों को लक्ष्य करते हैं. इसके लिए वे बच्चों में अश्लील सामग्री, वीडियो, फोटो आदि प्रसारित कर उन्हें बहकाते हैं. ऐसी सामग्री को देखने के बाद बहुत से बच्चे भटक जाते हैं. यही बच्चे इन यौन अपराधियों के द्वारा जबरन यौन अपराध में लिप्त कर दिए जाते हैं.  


इन दो मुख्य अपराधों के अलावा साइबर अपराधी भ्रामक ईमेल भेजने के कार्य करता है, जिससे कि यूजर से निजी सूचना लेकर उसके एकाउंट से चोरी करने का प्रयास किया जाये. ईमेल के द्वारा सम्बंधित यूजर को बताया जाता है वह किसी और वेबसाइट में जाकर अपने बैंक की, अपने आधार कार्ड की, अपने पैन कार्ड की, अपने एटीएम की, अपने अन्य किसी दस्तावेज़ की जानकारी भर कर उसे अपडेट करवा ले. ऐसा करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यूजर की समस्त जानकारियों को प्राप्त करना होता है. ऐसा करके साइबर अपराधी सम्बंधित यूजर के साथ धोखाधड़ी कर लेता है. इसके लिए साइबर अपराधी कई बार फोन कॉल करके ओटीपी अथवा अन्य गुप्त कोड को बताने की बात करता है.


अब जबकि इंटरनेट का उपयोग सर्व-सुलभ रूप से किया जाने लगा है और यह उपयोग हमारे दैनिक जीवन की दैनिक क्रियाओं की तरह हो गया है तो हम सबको इसके उपयोग में सावधानी बरतने की भी आवश्यकता है. यहाँ हमें ध्यान रखना होगा कि अपने किसी भी इंटरनेट खाते का पासवर्ड सरल नहीं बनाना चाहिए. हमें अपने खातों का पासवर्ड ऐसा बनाना चाहिए जिसे हैक करना सहज न हो. कभी भी अपने नाम, अपनी जन्मतिथि, अपने मोबाइल नंबर, अपने परिजनों के नाम आदि से सम्बंधित पासवर्ड नहीं बनाना चाहिए. ऐसे पासवर्ड को डिकोड करना आसान होता है.


इसके अलावा किसी को भी फोन पर अपने किसी भी इलेक्ट्रॉनिक कार्ड का ओटीपी, पिन आदि नहीं बताना चाहिए. कई बार साईबर अपराधी स्वयं को सम्बंधित बैंकिंग संस्थान का व्यक्ति बताकर गुप्त कोड की जानकारी कर लेता है. इसके लिए ऐसी किसी भी तरह की कॉल आने पर पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए.


इसी तरह से अपने सोशल मीडिया खातों के लिए, अपने बैंक खातों के लिए, अपने व्यापारिक खातों के लिए डबल स्टेप सुरक्षा व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए. इस व्यवस्था में लॉग इन करने पर मोबाइल पर एक गुप्त कोड तत्काल प्राप्त होता है. इस तरह की टू वे वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनाये जाने से भी बहुत हद तक साइबर अपराध को रोका जा सकता है.


इसके अलावा सबसे ऊपर जो बात है, वो ये कि हम सभी को सजग रहने की आवश्यकता है. हम इंटरनेट पर जो भी काम कर रहे हैं, उनसे सम्बंधित सुरक्षा उपायों को, क़दमों को अपनाते हुए ही आगे बढ़ें. किसी भी तरह के इंटरनेट कार्य को करने के पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह सुरक्षित है और साथ ही उस इंटरनेट सम्बन्धी कार्य से हम भी तो अनजाने में कोई साइबर अपराध तो करने नहीं जा रहे. ध्यान रखें कि सावधानी ही बचाव है.


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