हिन्दी की जितनी दुर्दशा, दुर्गति हम हिन्दी वालों ने की है, उतनी तो शायद
लॉर्ड मैकाले की औलादों ने भी नहीं की होगी. इधर सोशल मीडिया के स्थानीय संस्करणों
में उरई का एक वीडियो तैरने में लगा है, जिसमें एक विद्यालय के नाम को लेकर पत्रकारिता आजमाई जा रही है.
पत्रकारिता के नाम पर अब तो किसी डिग्री की, डिप्लोमा की, किसी संस्थान की, कैमरे की आवश्यकता ही नहीं, बस जेब में हाथ डाला, मोबाइल निकाला और बन गए
पत्रकार. ऐसे ही किसी पत्रकार महोदय द्वारा एक द्वार का वीडियो बनाया गया और सोशल
मीडिया पर उछाल दिया गया. इस उछाल के साथ एक सवाल भी चिपका दिया गया मगर बिना किसी
ज्ञान के साथ, बिना
किसी व्याकरण की जानकारी के.
समस्या अकेले उन महाशय की नहीं, समस्या उनके साथ उछलते अनेक ज्ञानियों की है
जिन्होंने हिन्दी व्याकरण तो छोड़िए, हिन्दी से भी उतना ही नाता रखा है, जितना घर-बाजार में बोलने के काम
आता है. हिन्दी व्याकरण से, उसके सामान्य रूप से, वर्णों से, वर्णमाला के वर्गों से, पंचम वर्णों से, उनके प्रयोग से कोई लेना-देना नहीं है. लॉर्ड मैकाले की
दुनिया में विचरण करते इन लोगों को हिन्दी की सामान्य जानकारी ही नहीं और ऐसे लोग
ही इधर-उधर हिन्दी के प्रति सवाल उठाते हुए उसे बदनाम करने का काम करते रहते हैं.
यहाँ उस वीडियो से,
उस नाम से, उस विद्यालय से सन्दर्भ भले हो मगर उनकी चर्चा किये बिना सीधे-सीधे हिन्दी के
वर्गों, पंचम वर्णों के बारे में कुछ सामान्य जानकारी दे
दें. इसी से अंदाजा लगा लिया जायेगा कि उस वीडियो की,
विद्यालय के लिखे नाम की वास्तविकता क्या है. हिन्दी वर्णमाला में स्वर, व्यंजन के बारे में तो आपको जानकारी होगी ही और संभवतः उनको भी जानकारी
होगी जो उस वीडियो के आसपास भटक रहे हैं.
अब हिन्दी वर्णमाला के स्वर, व्यंजन पर चर्चा करने के बजाय चर्चा करते हैं वर्गों की. यहाँ सामान्य
रूप से ये वर्ग स्वीकार्य हैं....
क वर्ग = इसमें आते हैं क, ख, ग, घ, ङ
च वर्ग = इसमें हैं च, छ, ज, झ, ञ
ट वर्ग = इस वर्ग में हैं ट, ठ, ड, ढ, ण
त वर्ग = इसमें हैं त, थ, द, ध, न
प वर्ग = इसमें प, फ, ब, भ, म
अब बात करते हैं लिखने में इनके प्रयोग की. जिस शब्द ‘गांधी’ की बात हो रही है, जो ‘गान्धी’ लिखा हुआ है. इसी से
समझा जाये. जब किसी शब्द को लिखने में उस वर्ग के पंचम वर्ण का प्रयोग होता है तो
वह उसी वर्ग के वर्ण के ठीक पहले अर्धरूप प्रयोग किया जाता है. जैसे ‘गांधी’ में ‘ध’
के पूर्व पंचम वर्ण का प्रयोग किया जाना है तो यहाँ देखना होगा कि ‘ध’ है त वर्ग का
और त वर्ग का पंचम वर्ण है ‘न’ इसलिए हिन्दी व्याकरण के अनुसार ‘गांधी’ में ‘ध’ के
पूर्व इस वर्ग का पंचम वर्ण ‘न’ अर्धरूप में आएगा अर्थात ‘आधे न’ के रूप में.
इसलिए सही शब्द होगा ‘गान्धी’. लेखन में और टाइपिंग में सहजता बनाने के लिए पंचम
वर्ण को आधा लिखने के स्थान पर अनुस्वार (अर्थात बिन्दु के रूप में) लगाया जाना
मान्य किया गया है. इसलिए सर्वमान्य रूप में ‘गान्धी’ को ‘गांधी’ लिखा हुआ ही सही
समझा जाने लगा है. (वैसे वीडियोधारी पत्रकार महोदय और उनके संगी-साथियों के लिए
अनुस्वार, अनुनासिका शब्द भी अपरिचित होंगे. इस पर बाद में.)
इस विद्यालय के बोर्ड में आगे ‘इण्टर’ लिखा हुआ है. पता नहीं पत्रकार महाशय के
कैमरे ने इसे गलत क्यों नहीं बताया? सम्भव है कि वे इसे ‘इंटर’ लिखे जाने का समर्थन करते हुए ‘इण्टर’ को गलत
बता देते. यहाँ भी एक मिनट रुककर पंचम वर्ण और वर्ग के साथ समझ लें तो आने वाले
समय में बहुत से इण्टर कॉलेज बचे रहेंगे कैमरे से. ‘इण्टर’ को देखिये और समझिये.
यहाँ आधा वर्ण आना है ट वर्ग के पहले, ऐसे में इसी वर्ग का
पंचम वर्ण आधा होकर लगेगा. अब गौर करिए ट वर्ग पर, इसका पंचम
वर्ण है ‘ण’ और इसे ही आधा होना है. अब यह ‘ट’ के पहले आधा होगा तो सही शब्द होगा ‘इण्टर’.
बाकी तो ये है कि टाइपिंग और लेखन की सहजता के लिए इसे ‘इंटर’ भी लिखा जाने लगा
है. यह भी सही है. इस सही का तात्पर्य यह कतई नहीं कि ‘इण्टर’ गलत है.
हाँ, ये याद रखियेगा
कि गांधी या गान्धी के स्थान पर गाँधी अवश्य ही गलत है. ऐसा इसलिए क्योंकि गांधी
में स्वर अनुनासिका (चन्द्रबिन्दु) के स्थान पर अनुस्वार (बिन्दु) का है. नहीं हो
रहा हो विश्वास तो चन्द्रबिन्दु (अनुनासिका) और बिन्दु (अनुस्वार) का उच्चारण करके
देखना, सही शब्द पकड़ में आ जाएगा. हिन्दी का सम्मान न कर सकें, उसके प्रति आप ज्ञानवान न बन सकें तो कम से कम हिन्दी का अपमान तो न करें.

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