15 अप्रैल 2026

सोशल मीडिया उपयोग का दबाव क्यों?

सरकार द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों को विभिन्न कार्यक्रम संपन्न करवाए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव भेजा जाना समझ आता है. इन कार्यक्रमों की रिपोर्ट बनाना, उसको जियो-टैगिंग फोटो-वीडियो के साथ सम्बंधित कार्यालय को भेजना भी समझ आता है. इस समझ आने वाली स्थिति के बीच समझ ना आने वाली स्थिति ये है कि इन कार्यक्रमों की फोटो, वीडियो को सोशल साइट्स (फेसबुक,  इन्स्टाग्राम, यूट्यूब आदि) पर अपलोड करके उसकी लिंक भी उपलब्ध करवाना होता है. आखिर ऐसा क्यों? ये सोशल साइट्स न तो आधिकारिक रूप से सरकार के अंग हैं, न ही इनको किसी भी प्राध्यापक, संस्थान द्वारा उपयोग में लाना जाना अनिवार्य बनाया गया है.

 

सरकार की इस तरह की अनावश्यक गतिविधि ही किसी भी संस्थान के तानाशाह प्रवृत्ति की मानसिकता के लिए उत्प्रेरक का कार्य करती है. यही कारण है कि विश्वविद्यालय स्तर पर, महाविद्यालय स्तर पर, विभागीय स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप की भरमार है. इस तरह के जी के जंजाल से कभी मुक्ति मिलेगी या फिर ये जंजाल किसी दिन सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था की जान लेकर ही मानेगा?


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