श्रीराम के साथ मीडिया, सोशल मीडिया पूरी तरह से एकाकार हो चुका है. प्रत्येक प्राणी, एक-एक मंच राममय दिख रहे हैं. जो रामभक्त हैं वे उनका जयगान कर रहे हैं, जो इसके विरोधी हैं वे भी रामनाम जप रहे हैं. रामनाम की पावनता, उसकी दिव्यता, भव्यता आज सम्पूर्ण विश्व में प्रकीर्णित हो रही है. जन्मभूमि स्थल पर ही श्रीराममंदिर का निर्माण निश्चित ही गौरवान्वित करने वाला है.
22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, घर-घर दीपोत्सव के सम्मोहन में जन-जन सम्मोहित
है, आह्लादित है. अभिभूत होते इस
गौरवशाली क्षण में आँखें बार-बार नम होती हैं. इसका कारण एक तरफ़ जहाँ अपने सांस्कृतिक
वैभव को प्रतिष्ठित होते देखना है वहीं दूसरी तरफ़ नब्बे के दौर में इस प्रतिष्ठा के
लिए प्राण-प्रण से ओत-प्रोत नागरिकों का संघर्ष भी देखा है.
संघर्ष से वैभव की इस कठोर यात्रा में चटकती धूप के बाद मिली शीतल छाँव निश्चित
ही उन सभी बलिदानियों की आत्मा को शांति पहुँचा रही होगी, जो इस जन्मभूमि के लिए नींव का पत्थर बन श्रीराममंदिर
की विशालता को धारण कर चुके हैं.
उन सभी को बारम्बार नमन. जय श्रीराम.
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