अब चुनाव हारने के बाद राजनीतिक आलोचक, चुनाव विश्लेषक मत बनिए बल्कि खुद का आकलन करिए.
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टिकट निर्धारण के पहले अक्सर पोस्ट आ रही थीं कि भाजपा ने वादा किया है टिकट देने का तो टिकट दिया जाये. आखिर किस जिम्मेदार ने ऐसा वादा किया था, क्या आपको याद है या स्थानीय किसी व्यक्ति की बात को वादा मान लिया? क्या कभी ये पता किया था कि ऐसा ही वादा प्रयागराज क्षेत्र से भी किया गया था? इस चुनाव हेतु अपनी प्रत्याशिता को लेकर कई बार 'ऊपर के लोगों से' मुलाकात-बातचीत की गई. हर बार हमें एक निर्धारित जवाब मिलता कि झाँसी-प्रयागराज खण्ड में शिक्षक का टिकट बुन्देलखण्ड को दिया जा चुका है, स्नातक का टिकट प्रयागराज को दिया जायेगा.
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टिकट हो जाने के बाद आप लोग ही बैंड-बाजा-बारात के साथ प्रबल जीत के दावे करने
वाला सोशल मीडिया खेल खेलने में लगे रहे किन्तु किसी ने एक बार भी किसी असंतुष्ट
कार्यकर्त्ता, व्यक्ति
के पास जाने का प्रयास किया?
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इस वर्ष के शुरू से ही स्पष्ट दिख रहा था कि यूजीसी विनियम, एससी/एसटी एक्ट आदि सहित अन्य कई
मुद्दों पर लोगों में नाराजगी है. ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान एक पल को भी नहीं
लगा कि किसी भी स्तर से इस तरफ कोई कदम उठाया गया है. क्यों?
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एक बार अपने लिए भी विचार करिए कि आखिर ऐसा क्या था कि टिकट मिलते ही सभी को
जीत निश्चित दिखने लगी थी? यदि पार्टी सिम्बल ही जीत का आधार होता तो फिर कहीं से भी भाजपा की हार
नहीं होनी चाहिए थी. जो पहले जीत के कारण बताते नहीं थक रहे थे वही अब हार के कारण
पानी पी-पी कर बताने में लगे हैं. आखिर इतनी नीर-क्षीर विवेकिनी दृष्टि कहाँ से
लाते हो?
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ध्यान रखिये, इस हार
के कारण बहुत बड़े नहीं हैं और इतने छोटे भी नहीं कि देखने से दिखाई न दें मगर उसके
लिए निरपेक्ष दृष्टि का होना आवश्यक है. इस बार भीड़ बनकर आप लोगों ने न केवल
प्रत्याशी का बल्कि पार्टी का बुरा किया है. इसे कहने में कोई गुरेज नहीं कि अशोक
राठौर ने पिछले दो शिक्षक निर्वाचनों में जिस क्षमता से अपनी ताकत दिखाई थी,
इस बार उसकी आधी भी कहीं नजर नहीं आई. ऐसा चुनाव परिणामों में ही
साफ़-साफ़ दिखता है जबकि अंतिम परिणाम पहले अंक की गणना में ही निकल आया.
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हाँ, एक बात और.....
जनपद जालौन में ही हमारे जैसे सैकड़ों मतदाता होंगे जिनको अब भाजपा के द्वारा
मतदाता भी नहीं माना जा रहा है. अन्यथा ऐसा क्या था कि तमाम घरों, स्थानों, मोहल्लों में अपने देवतुल्य कार्यकर्ताओं
के साथ अपने दिव्य दर्शन देते आप लोग हमें अपने दर्शन देने नहीं आये? ऐसी हजारों मतदाताओं की संख्या अकेले प्रयागराज में है.... लेकिन आपको
इसकी खबर नहीं होगी क्योंकि आपकी आँखों में आज 'सुबह तक जीत
वाला चश्मा' लगा हुआ था.
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बाकी, यदि
वास्तविकता में कारणों की जानकारी करनी हो, चुनाव का
विश्लेषण जानना हो तो यहाँ नहीं..... व्यक्तिगत रूप से हमसे मिलना.... बताने में
भी मजा आएगा.
#झाँसी-प्रयागराज खण्ड स्नातक निर्वाचन 2026
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