कभी अपने बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना था कि समय पंख लगाकर उड़ता है. ऐसा होता
हुआ अब समझ में भी आता है. पता नहीं आप लोगों को ऐसा महसूस होता है नहीं पर हमें
तो लगता है कि जैसे समय वाकई उड़ता है. वर्तमान में खड़े होकर अतीत की किसी भी घटना
को याद किया जाये तो लगता है जैसे कल की ही बात है मगर जब समय का आकलन किया जाता
है तो समझ आता है कि बहुत-बहुत समय गुजर गया है. ऐसा न केवल सुखद घटनाओं के
सन्दर्भ में होता है बल्कि दुखद घटनाओं के सन्दर्भ में भी होता है.
अपने जीवन की बहुत सी न भुलाये जाने वाली घटनाओं में एक घटना आज, 22 अप्रैल को घटित हुई थी. आज पलट
कर उस दिन को याद किया तो समझ आया कि ये कल की घटना नहीं बल्कि 21 वर्ष पुरानी बात
है. चूँकि इस पर हमें आश्चर्य इसलिए नहीं हुआ क्योंकि पहले दिन से लेकर आजतक एक पल
को भी उस घटना को भुला नहीं सके हैं. भुलाना चाहते तो भी न भुला पाते, आखिर वो घटना महज एक घटना नहीं बल्कि हमारे अस्तित्व से जुड़ गई घटना थी.
सुबह उठने से लेकर देर रात सोने तक एक-एक पल, एक-एक कदम,
एक-एक काम उस घटना से जुड़ा रहता है, उस घटना को जीवित बनाये
रखता है. ऐसी स्थिति में उस दिन को, उस घटना को भुलाया जाना
सम्भव ही नहीं.
बहरहाल, जीवन की
साँस, धड़कन की तरह हमारी ज़िन्दगी से जुड़ चुकी वह घटना आज पूर्ण रूप से बालिग़ हो गई
है. 21 वर्ष की समयावधि पलक झपकते नहीं गुजरी है बल्कि इन 21 वर्षों के गुजरने ने
बहुत बड़ी कीमत वसूली है, बहुत सारा दर्द दिया है, बहुत सारा कष्ट दिखाया है. बावजूद इसके चलना जारी है, समय का पूरे उत्साह से गुजरना बना हुआ है. शौक जिंदा है, एहसास जिंदा है.

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