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24 जुलाई 2020

पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले.....

एक बहुत पुराना मधुर गीत है, पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही. इस गीत को जितनी बार सुनो, एक अलग तरह का सन्देश देता है. अब यह सन्देश सभी सुनने वालों के लिए एक जैसा होता होगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता. इस गीत को दो तरह से समझने की आवश्यकता है. एक तरफ यदि इस गीत को देखा जा रहा है तो यह गीत विशुद्ध रूप से दो व्यक्तियों के बीच की आपसी स्थिति को दर्शाता है. इन दो लोगों में एक प्रेमी है, एक प्रेमिका है; एक स्त्री है, एक पुरुष है. देखने के सन्दर्भ में इस गीत के मायने प्रेमी-प्रेमिका के बीच की स्थिति से जुड़ते हैं. यही दृश्य समूचे गीत को प्रेमी-प्रेमिका वाले प्रेम के साथ संदर्भित भी करता है. देखा जाये तो यह गीत भी इसी तरह के दृश्य की पूर्ति करता हुआ आगे बढ़ता है.



इसके सापेक्ष यदि इस गीत की आरंभिक पंक्ति पर ध्यान दिया जाये तो यह गहन अर्थ का सन्दर्भ देती है. पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही, यह पंक्ति महज प्रेमी-प्रेमिका के दृश्य को उद्घाटित नहीं करती है. यदि इस एक पंक्ति के सन्दर्भ निकाले जाएँ, भावार्थ निकाले जाएँ तो समझ आता है कि प्यार को पाने के लिए कोई व्यक्ति कितना लालायित है, भले ही वह झूठा प्यार ही क्यों न हो. आखिर लोगों के जीवन में प्यार की इतनी कमी कैसे हो गई है? या फिर प्यार का सन्दर्भ महज प्रेमी-प्रेमिका के प्यार से लगाया जाने लगा है? क्या व्यक्ति का एकाकी होना उसके प्यार में कमी का परिचायक बनता जा रहा है? क्या व्यक्ति का अकेलापन उसके भीतर प्यार की कमी का एहसास करवा रहा है?


देखा जाये तो लगता है कि इस कोरोना काल में ही नहीं वरन बहुत पहले से व्यक्ति खुद में निपट अकेलापन महसूस करता रहा है. इस अकेलेपन में उसे कोई ऐसा साथ चाहिए होता है जो उसकी भावनाओं को समझ सके, उसके साथ दो पल हँस कर बिता सके. यहाँ समर्पण, विश्वास, प्रेम की बहुत आवश्यकता होती है. जिस तरह का समाज, जिस तरह की दुनिया विगत वर्षों में हम बना चुके हैं उसे देखते हुए लगता है कि व्यक्ति अकेले रहने में बहुत स्वतंत्र है, खुश है मगर वास्तविकता इसके कहीं उलट है. जीवन के तमाम सुखद पलों के बीच भी एक पल ऐसा आता है जबकि प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी साथी की, किसी न किसी दोस्त की आवश्यकता महसूस होती है. इसी आवश्यकता के सन्दर्भ में इस गीत की पहली पंक्ति महत्त्वपूर्ण समझ आती है. कोई अकेला व्यक्ति कैसे किसी के प्यार को पाने की चाह रखता है, भले ही वह दो पल का हो, भले ही वह झूठा ही हो.

ये समय ऐसा है जबकि हम सभी निपट अपने में ही समय नहीं बिता रहे हैं या कहें कि बिता नहीं पा रहे हैं. ऐसे में हमें अपने आसपास के लोगों का, अपने साथियों का, अपने दोस्तों का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है. उसे भी हमारे साथ की, हमारे प्यार की आवश्यकता है. उसकी यह आवश्यकता दो पल की न हो, झूठी न हो इसका हमें ध्यान रखना होगा. यदि इतना ध्यान हम सभी रख सके तो सभी एक-दूसरे का प्यार, साथ पा रहे होंगे, वो भी सच्चा वाला, सदा-सदा के लिए.


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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर।
    आप अन्य ब्लॉगों पर भी टिप्पणी किया करो।
    तभी तो आपके ब्लॉग पर भी लोग कमेंट करने आयेंगे।

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