10 December 2016

डिजिटल युग ही भविष्य है

ये अपने आपमें कितना विद्रूप है कि एक तरफ देश को विश्वगुरु बनने के सपने देखे जा रहे हैं, दूसरी तरफ आधुनिक तकनीक से वंचित किये जाने की कोशिश भी की जा रही है. केंद्र सरकार द्वारा पाँच सौ रुपये और एक हजार रुपये के नोट बंद किये जाने के बाद से लगातार डिजिटल ट्रांजेक्शन पर जोर दिया जा रहा है. नोटबंदी के दीर्घकालिक परिणाम क्या होंगे और कैसे होंगे ये अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन ये बात स्पष्ट है कि नोटबंदी के बाद से कालेधन पर, जाली मुद्रा पर अवश्य ही अंकुश लगेगा. भविष्य में पुनः जाली मुद्रा का कारोबार देश के अन्दर अपना साम्राज्य न फैला सके इसके लिए सरकार द्वारा लगातार कैशलेस सोसायटी बनाये जाने पर जोर दिया जा रहा है. आम आदमी को खुद प्रधानमंत्री द्वारा संबोधित करके अधिक से अधिक मौद्रिक आदान-प्रदान इलेक्ट्रॉनिक रूप में किये जाने को कहा जा रहा है. आज वैश्विक स्तर पर देखा जाये तो सभी विकसित देशों में लगभग समस्त मौद्रिक आदान-प्रदान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जाता है. हमारे पडोसी देशों में चीन में भी कैश के रूप में मात्र दस प्रतिशत लेनदेन होता है.


विपक्ष द्वारा जिस तरह से नोटबंदी का विरोध किया जा रहा है, उसकी अपनी राजनीति है. इसके उलट जिस तरह से कैशलेस सोसायटी का विरोध किया जा रहा है, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन का विरोध किया जा रहा है वो कहीं न कहीं देश के विकास को बाधित करने जैसा ही है. ऐसे मुद्दे पर देश की सबसे पुरानी पार्टी होने का दम भरने वाली कांग्रेस का विरोध भी हास्यास्पद है. उसे इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उसी पार्टी के एक पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा देश में कम्प्यूटर लाये जाने की बात लगभग सभी के द्वारा एकसमान रूप से की जाती है, उसी के द्वारा तकनीक का विरोध किया जा रहा है. कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की, सुदूर क्षेत्रों तक इंटरनेट की पहुँच न होने की बात कहकर डिजिटल ट्रांजेक्शन को अनावश्यक बताया जा रहा है. उन सभी लोगों को विचार करना होगा कि आखिर देश में छह दशक से अधिक तक केंद्र की सत्ता संभालने वाली कांग्रेस ने देश के ग्रामीण अंचलों में शिक्षा का, तकनीक का, बैंकों का, विद्युत् व्यवस्था का उचित प्रबंध क्यों नहीं किया?

ये सत्य है कि आज अचानक से देश को कैशलेस बना देना न तो आसान है और न ही उचित है. आज भी देश का बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो एटीएम का उपयोग करने में घबराता है. आज भी बहुत बड़ा बुद्धिजीवी वर्ग ऐसा है जो नेट बैंकिंग का, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन के प्रति शंकित भाव रखता है. आज भी देश में बहुत से भाग ऐसे हैं जहाँ इंटरनेट सुविधा नहीं पहुँच सकी है. ऐसी हालातों में निश्चित ही कैशलेस सोसायटी की अवधारणा एक स्वप्न के समान ही लगती है. इसके बाद भी इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि भविष्य इसी तरह के लेनदेन का है. देश को यदि विश्व के अन्य उन्नत देशों, विकसित देशों के साथ आर्थिक, राजनैतिक, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा करनी है; उनके साथ तालमेल बैठाना है तो इस तरह के ट्रांजेक्शन को अपनाना ही होगा. इसके लिए अभी कठिनाइयाँ भले ही सामने दिख रही हों मगर देश के महानगरों के साथ-साथ छोटे-छोटे शहरों, कस्बों, गांवों में ऐसे लोगों को जागरूकता का कार्य करना होगा जो इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन के बारे में सहज हैं. इस विधि, तकनीक से अपरिचित लोगों को परिचित करवाना पड़ेगा. व्यापारी वर्ग को, नौकरीपेशा वर्ग को, महिलाओं को, संस्थानों को कैशलेस सोसायटी बनाने के लिए अपना सहयोग देना होगा.  


इस देश में हमेशा से आधुनिक तकनीक का अपने स्तर पर विरोध किया जाता रहा है, आज भी हो रहा है. इस विरोध के अपने-अपने राजनैतिक लाभ है मगर कैशलेस सोसायटी के लाभों को समझते हुए अधिकाधिक उपयोग करने पर जोर देना ही होगा. इस तरह के लेनदेन से जहाँ नकद मौद्रिक चलन कम होगा, इससे नकली नोट के बाजार में आने की सम्भावना समाप्त हो जाएगी. इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन होने से रिश्वतखोरी को, भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी. सरकारी स्तर पर, निजी स्तर पर आम आदमी को परेशान करने की, काम लटकाए जाने की प्रवृत्ति से छुटकारा मिलेगा. संभव है कि राहजनी, लूटमार आदि की घटनाओं में कमी आये. वैश्विक स्तर पर देश की आर्थिक स्तर पर साख भी मजबूत होगी और देश विकसित देशों के साथ सहजता से प्रतिस्पर्धा कर सकेगा. इसके अलावा बहुत से लाभ ऐसे हैं जो देशहित में हैं और याद रखना चाहिए कि देशहित से ही नागरिकहित बनता है. यदि इसी तरह तकनीक का विरोध होता रहता तो आज देश में कम्प्यूटर का युग न आया होता और देश की अनेक कम्प्यूटर प्रतिभाएं वैश्विक स्तर पर अपना लोहा न मनवा रही होती. आज विरोधी लोग भले ही मोदी के नाम पर, पे टू मोदी के नाम से कटाक्ष करके कैशलेस सोसायटी बनाये जाने का, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन का विरोध करें मगर देश के उन्नत, विकसित भविष्य के लिए इसे अपनाना ही होगा. देश को कैशलेस बनना ही होगा, देशवासियों को डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए खुद को तैयार करना ही होगा. 

2 comments:

Ravishankar Shrivastava said...

कैशलेस का विरोध या तो मूर्खता है या शयाणापन (भ्रष्टाचारी, कालाधन रखने वाले और दो-नंबरी कभी ये नहीं चाहेंगे कि उनके ट्रांजैक्शन कहीं भी दर्ज हों! इसीलिए हल्ला है :)

HindIndia said...

बेहतरीन पोस्ट। ... Thanks for sharing this!! :) :)