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03 September 2014

भारत सतर्क रहे पाकिस्तान के अंदरूनी बिगड़ते हालातों से



बँटवारे, नफरत, हिंसा आदि की जमीन पर निर्मित पाकिस्तान में जब कुछ समय पूर्व लोकतान्त्रिक सरकार का गठन हुआ तो वहाँ सुखद स्थितियों के बनने का आभास हुआ। लोकतान्त्रिक तरीके से संपन्न चुनाव से हर उस व्यक्ति को पाकिस्तान में कुछ शांति की आशा की किरण दिखाई दी, जो वहाँ की स्थिरता-अस्थिरता को भारतीय सन्दर्भ में देखते हैं। पाकिस्तान में शांति, स्थिरता न केवल पाकिस्तान की दृष्टि से वरन भारतीय परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। इसका प्रमुख कारण ये है कि पाकिस्तान की तरफ से आज़ादी के बाद से अद्यतन देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिशें होती रही हैं; देश के विभिन्न भागों में आतंकवादियों की मदद से खून-खराबा मचाया जाता रहता है; सीमा-पार से आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है; सीमा पर आये दिन गोलीबारी की जाती रहती है; आये दिन जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की हवा चलाई जाती है; प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से देश के विभिन्न अंदरूनी भागों में; विभिन्न विभागों में, कार्यालयों में जासूसी करवाए जाने के कारनामे भी सामने आते रहे हैं। इस कोढ़ में खाज का काम यहाँ के उन फिरकापरस्त लोगों द्वारा किया जाता है जो तुष्टिकरण के नाम पर देश के मुसलमानों को वोट-बैंक में परिवर्तित करने में लगे हैं।
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अब पाकिस्तान में कुछ दिनों से फिर अराजकता का माहौल बना हुआ है। उसकी अंदरूनी राजनीति में उठापटक जैसे आसार दिख रहे हैं। विद्रोही लोगों ने पाकिस्तान टीवी पर, सचिवालय पर कब्ज़ा कर लिया है। नवाज़ शरीफ के इस्तीफे की लगातार माँग की जा रही है। सेना ने भी कार्यवाही करने जैसी मंशा दिखाई है, जिससे पाकिस्तान का लोकतंत्र पुनः सेना के बूटों तले रौंदे जाने के आसार दिखने-बनने लगे हैं। भारत सरकार को सतर्क रहने की आवश्यकता है। इतिहास गवाह रहा है जब भी पाकिस्तान के अंदरूनी हालात बिगड़े हैं तब-तब पाकिस्तानी हुकुमरानों की तरफ से सीमा पर घुसपैठ, गोलीबारी जैसी स्थितियाँ निर्मित कर दी गईं। इनके पीछे पाकिस्तानी जनता का, विद्रोहियों का, सेना का ध्यान अंदरूनी विवाद से हटाकर भारत-विवाद पर केन्द्रित कर देना रहा है। वर्तमान परिदृश्य में यदि ऐसे हालात बनते हैं तो वे भारत की सुरक्षा की दृष्टि से, आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से, नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। विगत कुछ समय से जिस तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण का खेल खेला जा रहा है, अवैध शरणार्थियों को वैधता देने के प्रयास किया जा रहा है वो एक अलग कहानी कहता दिख रहा है। सरकारों द्वारा किसी न किसी रूप में देश के मुस्लिमों के वोटों के लालच में सीमापार से चलते इस्लामिक आतंकवाद पर भी एकतरफा नजरिया बना लिया गया है; शरणार्थियों को (जो अवैध तरीके से देश में बसने के साथ-साथ अवैध कार्यों में, अराजक कार्यों में, आतंकी कार्यों में लिप्त होते पाए गए हैं) भारतीय नागरिक के रूप में बसाये जाने की कवायद होती रहती हैं; ऐसे लोगों के निवास प्रमाण-पत्र, वोटर कार्ड, राशन कार्ड आदि भी अवैध तरीके से बनवाकर इनको वैध करने का प्रयास किया जा रहा है। ये सब कहीं न कहीं मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर, उनके वोट पाने के लालच में किया जा रहा है।
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इन सबके अलावा विगत कुछ समय से जिस तरह से हिन्दू लड़कियों के साथ शादी करके उनका जबरन धर्म-परिवर्तन करवाने की कोशिश, उन पर शारीरिक अत्याचार करने, बलात्कार, गैंग-रेप जैसी वारदातों के अंजाम देने में मुस्लिम युवकों की संलिप्तता पाई जा रही है, वो कहीं न कहीं एक दूसरी तरह का आतंकवाद कहा जा सकता है। पाकिस्तान इस बात को विगत कई युद्धों और छिटपुट झड़पों के दौरान भली-भांति समझ चुका है कि आमने-सामने की लड़ाई में वो भारत से किसी भी रूप में जीत नहीं सकता है, ऐसे में उसके द्वारा देश में अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध छेड़ रखा गया है। यदि उसके अंदरूनी हालात और बिगड़ते हैं, वहाँ सत्ता-परिवर्तन की आहट दिखाई देती है, सेना के सत्ता पर कब्ज़ा कर लेने जैसी स्थितियाँ बनती हैं तो अपनी आदत के अनुरूप पाकिस्तान सीमा पर तो अपनी कारगुजारी दिखा सकता है, साथ ही वो देश में छिपे अपने गुर्गों के द्वारा माहौल को अशांत बना सकता है। इस तरह की एक हरकत को देश मुम्बई-काण्ड के रूप में पहले भी भुगत चुका है। पूर्व में देश के भीतर की आतंकी साजिशों में पाकिस्तान आतंकवादियों के, पाकिस्तान के संलिप्त होने, अवैध रूप से घुसपैठ करने के, सीमा पर बार-बार शांति-विराम का उल्लंघन करने के, देश में माहौल ख़राब करने के पर्याप्त सबूत मिल चुके हैं। उन सभी के और वर्तमान माहौल के आलोक में पाकिस्तान में चल रहे उपद्रव, सरकार के विरुद्ध होते विद्रोह पर केन्द्र सरकार को, राज्य सरकारों को, ख़ुफ़िया एजेंसियों को, सशस्त्र-बलों को, सेनाओं को व्यापक नज़र रखनी होगी। हमारे पड़ोसी की अशांति हमारे देश में अराजकता ला दे, नागरिकों को असुरक्षित कर दे तो ये किसी भी रूप में सही नहीं होगा।
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1 comment:

राजीव कुमार झा said...

सटीक विश्लेषण.पाकिस्तान के अंदरुनी हालात जब भी ख़राब होते हैं सीमा पार से भारत विरोधी गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं.
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