06 मई 2013

सुधार तभी संभव जब जनता जागे



विगत कुछ वर्षों से देश में जैसे हालात दिख रहे हैं, देश के केन्द्रीय नेतृत्व के जैसे चाल-चलन दिख रहे हैं, नागरिकों की जो मानसिकता दिख रही है उससे घनघोर अलोकतांत्रिक स्थिति का आभास होता है. केन्द्रीय मंत्रिमंडल निर्लज्जता से भ्रष्टाचार में लिप्त है और इसके बाद भी उसके हाव-भाव में किसी तरह का संकोच, शर्म परिलक्षित नहीं होता है. आये दिन मंत्रियों के द्वारा, उनके रिश्तेदारों के द्वारा करोड़ों, अरबों के घोटाले किये जा रहे हैं और उतनी ही बेशर्मी से केन्द्रीय सरकार द्वारा उनका बचाव किया जा रहा है. देश की अलोकतांत्रिक स्थिति में सिर्फ मंत्रियों का, उनके रिश्तेदारों का घोटाले करना, भ्रष्टाचार करना अकेले ही शामिल नहीं है इन मंत्रियों के अधीनस्थ कर्मचारियों के द्वारा भी बुरी तरह से अमर्यादित आचरण किया जा रहा है. इधर देखने में आ रहा है कि तमाम जाँच रिपोर्टों में छेड़खानी, उनमे बदलाव करना, उनको बदलवा देना, गोपनीय रिपोर्टों को जारी करवा देना आदि ऐसी हरकतें हैं जो किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं समझी जा सकती हैं. 

इन हालातों के मध्य विद्रूपता तो तब होती है जब केन्द्रीय मंत्रिमंडल ऐसे भ्रष्ट मंत्रियों को, उनके रिश्तेदारों को बचाने के लिए पूरी बेशर्मी से सामने आकर कुतर्क करता दिखाई देता है. किसी भी रूप में नहीं लगता है कि सरकार खुद को जनता का प्रतिनिधि समझ कर कार्य कर रही है और इस तरह के भ्रष्ट आचरण वालों को सजा देने का काम कर रही है. नेताओं, मंत्रियों के आचरणों पर आजकल चर्चा करना समय की बर्बादी ज्यादा लगने लगा है. सरकार को गाली देने वाले दल खुलेआम उसका समर्थन करते दिखते हैं. ये स्थिति भी केन्द्रीय नेतृत्व को और निरंकुश, और निर्लज्ज बनाती है.

इस आचरण के पीछे से आम जनता, जो इन तमाम काले कारनामों की, भ्रष्टाचार की भुक्तभोगी है, वो सीना ठोंक कर सरकार का समर्थन करती दिखती है. जिस बेशर्मी से सरकारी प्रवक्ता अपने भ्रष्ट मंत्रियों के पक्ष में ताल ठोंकते दिखते हैं ठीक वैसे ही अंदाज़ में जनता के चंद लोग भी पूरी ताकत से सरकार के पक्ष में ताल ठोंकते दिखाई देते हैं. जनता के वे लोग जो किसी न किसी रूप में सम्बंधित सरकार के, सम्बंधित मंत्री के, सम्बंधित नेता के, सम्बंधित राजनैतिक दल के पदाधिकारी, समर्थक, रिश्तेदार हैं, का समर्थन करना तो वाजिब समझ आता है पर ऐसे लोग जिनका सिवाय इन लोगों के बारे में पढने, उनको टीवी में देखने के अलावा और कोई सम्बन्ध नहीं वे भी बजाय देश-हित के इन भ्रष्ट नेताओं, मंत्रियों के पक्ष में खड़े दिखते हैं तो यहाँ ये समझ से परे हो जाता है कि ऐसा किस कारण से है? जनता के बीच से इस तरह से मिलने वाले समर्थन के कारण ही ये मंत्री-नेता पूरी ताकत से भ्रष्टाचार में लिप्त होकर इसी जनता का खून चूसने में लग जाते हैं.

यहाँ ये बात ध्यान करने योग्य है कि जब तक जनता की तरफ से भ्रष्टाचार का खुलकर विरोध नहीं होगा, जब तक भ्रष्ट नेता-मंत्री का विरोध नहीं होगा, गलत को गलत और सही को सही कहने की मानसिकता जाग्रत नहीं होगी तब तक इसी तरह की विषम स्थिति पैदा होती रहेगी. मात्र इस कारण से किसी भी राजनैतिक दल का, नेता-मंत्री का समर्थन करना कि उसको हमारा खानदान समर्थन देता रहा है, वो हमारे धर्म-जाति का है, हमारे क्षेत्र का है, किसी भी रूप में सही नहीं है. हम भले ही किसी नेता-मंत्री के, राजनैतिक दल के समर्थक हैं पर यदि ऐसे लोगों की नीतियां देश-विरोधी हैं, जन-विरोधी हैं; इनके कारनामे भ्रष्ट हैं तो हमें इनका पुरजोर विरोध करना ही चाहिए. याद रखना होगा कि बिना खुद के जागे अब जागरण संभव नहीं, अब विकास संभव नहीं, अब सुधार संभव नहीं.  
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