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11 January 2013

बस शर्म ही शर्म...और कोई न कर्म



मंत्रियों, सांसदों, विधायकों के भ्रष्टाचार -- शर्म, शर्म, शर्म
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घोटालों की राशि का लगातार बढ़ते जाना -- शर्म, शर्म, शर्म
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महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में लगातार वृद्धि होते जाना -- शर्म, शर्म, शर्म
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अपराधों, घोटालों, भ्रष्टाचार में उच्चाधिकारियों का शामिल होना -- शर्म, शर्म, शर्म
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राजनीति का अपराधीकरण, अपराधियों को शरण देने में राजनीतिज्ञ सबसे आगे -- शर्म, शर्म, शर्म
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तमाम सारे आपत्तिजनक बयानों का आये दिन दिया जाना -- शर्म, शर्म, शर्म
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धर्मनिरपेक्षता, साम्प्रदायिकता के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश, तुष्टिकरण की नीति लागू करने का प्रयास -- शर्म, शर्म, शर्म
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मंहगाई को किसी भी स्तर पर रोकने में सरकार की नाकामी -- शर्म, शर्म, शर्म
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आर्थिक मोर्चे पर लगातार असफलता -- शर्म, शर्म, शर्म
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विदेश नीति के मामलों में भी खास सफलता न मिलना -- शर्म, शर्म, शर्म
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पाकिस्तानी सेना, आतंकवादियों द्वारा आये दिन देश में अराजकता -- शर्म, शर्म, शर्म
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शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म
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आखिर कितनी शर्म है हममें और हमारी सरकार में?

1 comment:

प्रतिभा सक्सेना said...

शर्म!कहाँ बची? कब का घोल कर पी गए !