25 April 2010

हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है...


इस समय कुछ हल्का फुल्का सा--
गुलाम अली, मेंहदी हसन की गाई हुईं कुछ ग़ज़लों के चन्द शेर हमें बहुत ही पसंद आते हैं, शायद आपको भी आयें?

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अंदाज अपने देखते हैं आईने में वो,
और ये भी देखते हैं कोई देखता हो।

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दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने दिया,
जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया।
इसका रोना नहीं क्यूँ तुमने किया दिल बर्बाद,
इसका ग़म है बहुत देर में बर्बाद किया।।

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वो उन्हें याद करें जिसने भुलाया हो कभी,
हमने उनको भुलाया कभी याद किया।

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दिल के लुटने का सबब पूछो सबके सामने,
नाम आयेगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही।

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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए ,
फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ।
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हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है,
डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है

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बस आज मूड कुछ अच्छा नहीं लगा तो ग़ज़ल सुनने बैठ गये। (अपनी ग़ज़ल सुनाते तो आप भाग उठते, इसी कारण चन्द शेर।)


5 comments:

शिवम् मिश्रा said...

कोई बात नहीं यही सही !
उम्दा पोस्ट !

संजय भास्कर said...

वो उन्हें याद करें जिसने भुलाया हो कभी,
हमने उनको न भुलाया न कभी याद किया।

इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

दीपक 'मशाल' said...

ye to mere bhi pasandeeda sher hain Mehndi Hasan saab ke gaaye hue..

बेचैन आत्मा said...

वाह! मेरी पसंद के सभी शेर...

अजय कुमार झा said...

बहुत खूब सभी एक से बढकर एक । आप अपनी वाली भी सुना ही दीजिए , आखिर हम कहां तक भाग के जाएंगे । हा हा हा । अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा