30 March 2010

टिप्पणी दें कि यदि समाज के लिए आवश्यक है ये सब, तो घर से ही शुरुआत करें




विशेष - इन विषयों पर चर्चा जरूरी समझ में आई, इस कारण आज टिप्पणी कि सुविधा शुरू की जा रही हैकृपया टिप्पणी करने के लिए नहीं, कोई विचारात्मक चर्चा के लिए यहाँ आयें
विस्तार से कहना चाहें तो कृपया हमें मेल भी करियेगानिवेदन है, ये
e-mail - dr.kumarendra@gmail.com
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कल शाम हम मित्रों की बैठकी लगी तो कुछ मतलब के और कुछ बिना मतलब के विषयों पर चर्चा छिड़ गई। अब पता नहीं कि ब्लाग संसार के लिए यह विषय मतलब का है या नहीं पर हमें लगा कि समाज के लिए मतलब का होना चाहिए।

आजकल एकदम से समलैंगिकता, लिवइन रिलेशनशिप, विवाहपूर्व सम्बन्ध, नाबालिग विवाह, कुँवारा मातृत्व आदि पर चौंकाने वाले परिणाम और निर्णय आते दिख रहे हैं। यहाँ किसी भी विषय पर अपने विचारों को नहीं रखना है क्योंकि हमें पता है जब तक समाज से स्त्री-पुरुष का विभेद समाप्त नहीं होगा तब तक ऐसे विषयों पर सिर्फ और सिर्फ बहस ही जारी रहेगी।


हमारा इस पोस्ट को सामने लाने का मात्र इतना ही उद्देश्य है कि क्या महिलाओं और पुरुषों के लिए सेक्स का माहौल एकदम से खुला कर देने से दोनों का विकास हो जायेगा?

क्या समलैंगिक सम्बन्धों से, लिव इन रिलेशन से भी दोनों का व्यक्तित्व विकास अथवा चेतनात्मक विकास होने लगेगा?

और भी ऐसे विषय जिन पर हमें लगता है और कहीं न कहीं हम सभी को लगता है कि भारतीय संस्कृति के मूल रूप से छेड़छाड़ है, वे क्या हमारे समाज और परिवार के लिए आवश्यक हैं?

यदि हाँ, तो हम आज से ही अपनी बहिन, बेटी, माँ, पत्नी को समाज में खुला छोड़ दें। लिव इन रिलेशन के लिए, किसी से भी यौन सम्बन्ध बनाने के लिए, विवाहेत्तर सम्बन्ध बनाने के लिए, कुँवारी माँ बनने का सौभाग्य उठाने के लिए, एक पति की अवधारणा से अलग कई-कई मर्दों की बाजारू परम्परा के निर्वाह के लिए।

यदि यह सही है तो हम अपने भाई, पुत्र, पिता और स्वयं को भी बाजार में उतार दें, एक बाजारू संस्करण की तरह से, एक उत्पाद की तरह से, इधर-उधर सम्बन्धों की शारीरिकता की तलाश में।

यदि यह सब सही है तो क्यों न हम इसे अपने घर से ही अपनाना शुरू करें। हमारे घर में तो हम सभी को भी इन सभी की चाह रहती ही है।

क्या कहना है आप सभी का, इस तरह के मामलों की वकालत करने वालों का?





चित्र गूगल छवियों से साभार

5 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया
जय बजरंग बली ....

दीपक 'मशाल' said...

bilkul sahi.. shuruaat ghar se karne ke naam par sare aandolan band ho jayenge in logon ke.

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

मेरा आज का पोस्ट ही इस मुद्दे पर है...पूरा पोस्ट ही मेरे कमेन्ट के रूप में लें.....
.........................
भविष्य में नारियाँ शक्तिशाली होती जायेंगी ......पुरुष कमजोर होते जायेंगे....
http://laddoospeaks.blogspot.com/

Suman said...

nice

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

यदि टेम्पलेट बैक ग्राऊंड बदल देंगे तो पढ़ने में आसानी होगी.