25 November 2009

जवाब तो मिला नहीं, मिला नसीहतों का पुलिंदा


कल अपनी पोस्ट में कुछ महिलाओं के नाम देकर बस यही जानना चाहा था कि नारीवाद की समर्थक महिलाएँ इन महिलाओं के बारे में जानतीं हैं या नहीं? यह किसी तरह का टेस्ट नहीं था क्योंकि टेस्ट लेने का हक हमें कदापि नहीं है, होना भी नहीं चाहिए।
इसी पोस्ट को चोखेरबाली ब्लाग पर भी लगाया था, यह सोचकर कि यहाँ नारी समर्थित मुद्दों पर बड़ी ही सार्थक चर्चा होती है तो शायद इन नामों के बारे में और सार्थक जानकारी प्राप्त हो। सोचना मात्र सोचना ही रहा ऊपर से ढेर सारी नसीहतें मिल गईं। नसीहत तो स्त्री-विमर्श को समझने तक की मिल गई। सत्य है इस विषय को समझना होगा क्योंकि स्वयं स्त्री-विमर्श के समर्थक इस विषय को न तो समझ पा रहे हैं और न ही समझा पा रहे हैं तो हम ठहरे मात्र छात्र, कैसे समझ सकते हैं?
एक बात हमें भी ज्ञात है कि आज के तकनीकी भरे दौर में जबकि गूगल महाराज तुरत ही हाजिर हो जाते हैं अपना ज्ञान का पिटारा लेकर, हम कैसे यह गुस्ताखी कर सकते थे कि कोई जानकारी चाहते? एक बात और हमें इन नामों के बारे में जानने की बस इतनी इच्छा थी कि शायद ब्लाग के पढ़े-लिखे लोगों के बीच से कुछ और सामग्री प्राप्त हो जाये, किन्तु खाली हाथ बापस आ गये।
पोस्ट में कहा था कि 25 तारीख को इसका जवाब देंगे, उसका कारण था हमारा बाहर जाना। बहरहाल बाहर जाना हुआ नहीं और पिछली पोस्ट में ऐसा कुछ था नहीं जो 25 तक रुका जाता, (वैसे भी कुछ देर बाद 25 होने वाली ही है) सो उसी पोस्ट के बारे में बताने आ गये।
अब बतायें भी क्या, बताने जैसा कुछ है भी नहीं, आप सभी हमसे ज्यादा समझदार हैं। सभी को पता है इस कारण से मात्र 1 लोगों ने हमारे ब्लाग पर और चोखेरबाली पर 8 लोगों ने आने की और अपने विचार देने की जहमत उठाई, सभी का आभार।
जवाब तो आपको पता ही है, नहीं पता तो गूगल जी हैं ही। पर इस पोस्ट के द्वारा यह तो पता ही लग गया कि इन महिलाओं के बारे में वास्तव में ज्यादा जानकारी हमारे पास नहीं है। यदि इनके स्थान पर किसी अन्य बाला का नाम होता तो उसकी जन्म कुंडली तक बनाकर बता दी जाती पर यहाँ जवाब को इतना गोलमोल दिया गया कि, बस पूछिये नहीं। इतने तरह के जवाब आये कि बहुत पुरानी एक घटना याद आ गई। उससे समझ आया कि यदि आपको किसी सवाल का जवाब नहीं मालूम और आप अपने को अज्ञानी भी सिद्ध नहीं करना चाहते तो किसी और मुद्दे को उठा दीजिए, बस असली मुद्दा गया पीछे और सामने आपकी बात!!!
घटना ऐसी है कि हम एक बार झाँसी रेलवे-स्टेशन पर बैठे हुए भोपाल जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उसी समय एक हमउम्र लड़के ने आकर कंधे पर जोर से हाथ मार कर हमें नाम से पुकारा। एकदम से हम हड़बड़ा तो गये किन्तु नाम का सम्बोधन सुन लगा कि कोई परिचित ही है। पलटकर देखा तो एक परिचित चेहरा मुस्कुरा रहा था। याद आया कि यह लड़का हमारे साथ कालेज में पढ़ता था। उस समय उसे बहुत यारी-दोस्ती नहीं थी, इस कारण से चेहरा तो याद आया किन्तु नाम को याद नहीं कर सके।
कालेज से निकले भी लगभग 6 या 7 साल हो गये थे तो आत्मीयता भी झलकी। उसने पूछा कि और क्या हाल है? हमने भी उसी प्रफुल्लता से जवाब दिया, बस मजे में।
फिर उसकी ओर से अगला सवाल धमाके के रूप में आया, पहचाना? हमने भी अतिरिक्त अपनत्व दिखाते हुए कहा अबे! तुम्हें नहीं पहचानेंगे? यही कहकर फँस गये, उसने तुरन्त कहा, बताओ कौन?
अब हम घबराये कि यदि नाम नहीं बता पाते तो अगले को लगेगा कि हम पहचान नहीं पा रहे और उसके जोश का उफान ठंडा हो जायेगा। तुरन्त बुद्धि दौड़ाते हुए अपने स्वर में तल्खी सी लाते हुए हमने कहा, इतनी छोटी बात कर दी, अब हम तुम्हें पहचानते हैं इसके लिए तुम्हारे नाम का सबूत देना होगा? जाओ हम तुम्हें जानते ही नहीं कि तुम कौन हो।
उसने तुरन्त हमारे कंधे पर दोनों हाथ रखे और कहा कि यार तुम्हारी यही अदा तो कातिल है। बुरा न मानो हम तो देख रहे थे कि तुम्हें अभी भी गुस्सा आता है या कि कालेज से निकलते ही शान्त हो गये?
उसके बाद हम दोनों बैठे-बैठे बात करते रहे। लगभग 50 मिनट के बाद हमारी गाड़ी आ गई और तब तक हमें उसका नाम भी याद आ गया। वह हमें ट्रेन में बिठाने आया तो हमने डिब्बे में चढ़ते हुए उसे उसका नाम बताया और अपना दर्शन उड़ेला, अबे दोस्तों के बीच नाम की जरूरत नहीं दिल की जरूरत होती है।

कुछ यही लगा अपनी पोस्ट की महिलाओं के नाम जानने में। पता है नहीं और पिला दिया गया लेक्चर ढेर सारा, हमारे दर्शन की तरह। ये स्थिति तब है जबकि सारे नाम भारतीय महिलाओं के हैं।
कहो तो पूछें फिर एक सवाल? नहीं जी अभी इतनी जल्दी नहीं, फिर कभी। तब तक महिला मोर्चा का गुस्सा थोड़ा ठंडा हो जाये। हाँ उन नामों की जानकारी तो खोजिए ही, अभी हमने बताया नहीं है। गूगल जी हैं न!
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चित्र गूगल से साभार

2 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

डॉ. साहब नसीहतें बहुत काम आयेंगी!
सहेजकर रखना!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

जिंदगी का यही असली चेहरा है, जो आज आपको पता चल ही गया।
यहाँ लोग बोलते कुछ हैं और होते कुछ और हैं।
बहरहाल इस सत्य को उदघाटित करने के लिए आभार।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }