23 November 2009

हो न हो, महिलायें ही चाहतीं हैं कुमारी, सुश्री, श्रीमती जैसे संबोधन


सबसे पहले तो एक निवेदन कि इसको विवाद का विषय बिलकुल न बनायें; हाँ सार्थक बहस का विषय हो सकता है। बहुत ही असमंजस की स्थिति में इसे लिखने बैठे हैं, कारण स्पष्ट है कि आप कुछ भी कहो ऐसे विषय पर स्त्री-पुरुष दोनों की ओर से पूर्वाग्रह भरा रवैया रहता है।
मुद्दा यह है कि विगत कुछ वर्षों से जबसे देश में ‘स्त्री-विमर्श’ की बहार आई है तबसे महिलाओं को सम्बोधित करने वाले शब्दों जैसे कुमारी, सुश्री, श्रीमती को लेकर भी बयानवाजियाँ होतीं रहीं हैं और आज भी होतीं हैं। स्त्री-विमर्श जैसे गम्भीर और संवेदनशील विषय को भी पूर्वाग्रह के कारण विवादास्पद बना दिया गया है। यदि कोई पुरुष इस विषय पर लिख रहा है अथवा अपने विचार दे रहा है तो उसे या तो महिलाओं के समर्थन में कहना चाहिए अन्यथा की स्थिति में वह महिलाओं के प्रति दुरावस्था जैसी स्थिति को पालने का आरोपी है।
कुछ इसी तरह के आरोप महिलाओं के नाम के पूर्व लगाये जाने वाले सम्माननीय शब्दों को लेकर लगते रहे हैं। यह सर्वथा सत्य है कि समाज पुरुष प्रधान रहा है और बहुत सी व्यवस्थाएँ पुरुषों ने अपने मनानुकूल बना लीं। इनमें एक व्यवस्था महिलाओं की प्रस्थिति को पहचानने की सुविधा के चलते उसके नाम के पूर्व के शब्द-निर्धारण को लेकर भी रही हो। विवाहित एवं अविवाहित महिलाओं के नाम के पूर्व लगे शब्दों के द्वारा आसानी से पता चल जाता है कि फलां महिला शादीशुदा अथवा गैर-शादीशुदा है।
मसला यहाँ आकर फँसा कि हम ठहरे एक बहुत छोटी सी साहित्यिक पत्रिका स्पंदन के सम्पादक। अब हमें बहुत सी महिला रचनाकारों को रचनाओं की प्राप्ति हेतु, उन्हें पत्रिका प्रेषित करने के उद्देश्य से पत्र डालने होते हैं। कई बार उनसे सीधे सम्पर्क न हो पाने की स्थिति में उनका नाम, पता आदि किसी दूसरी पत्रिका से प्राप्त होता है। ऐसी दशा में कई बार यह ज्ञात ही नहीं हो पाता है कि अमुक महिला रचनाकार के नाम के आगे कौन सा शब्द लगा दिया जाये? हम भारतीयों को जन्म से एक संस्कार बड़ों और छोटों का सम्मान करने का भी दिया जाता है। इस कारण यह भी अच्छा नहीं लगता कि पते में सीधे नाम ही लिख दें।
इस असमंजस की स्थिति में कई बार हम महिलाओं के नाम के पूर्व माननीया ही लिखकर भेज देते हैं। कई बार ज्ञात न होने की स्थिति में सुश्री लगा देते हैं पर श्रीमती अथवा कुमारी लगाने से बचते हैं। विगत कई माह में भेजे गये पत्रों और पत्रिका के प्रत्युत्तर में कई महिला रचनाकारों, पाठकों की ओर से आपत्ति भी आई कि आप नाम के आगे सम्बोधन ठीक से नहीं लगाते हैं। किसी-किसी ने तो माननीया पर ही आपत्ति उठाई तो किसी ने सुश्री पर। अब समझ नहीं आया कि यदि महिला शादीशुदा है तो वह अपने पते में स्पष्ट करे अथवा सुश्री को स्वीकार करे।
यहाँ चूँकि विगत कुछ वर्षों से हम भी स्त्री-विमर्श जैसे विषय को अपने अध्ययन का विषय बनाये हैं इस कारण भी ऐसे मुद्दों को बड़े ही जोर-शोर से सबके सामने रखते हैं। लगा कि अब महिला-मुक्ति का जमाना है। नारी चेतना किसी भी रूप में कम नहीं है। महिलाओं ने अपने आन्दोलनों के कारण अपनी प्रस्थिति को उन्नत कर लिया है फिर वह क्यों पुरुषों के दिए सम्बोधन को स्वीकार किये है? क्या आवश्यक है कि आज शादीशुदा स्त्री अपने नाम के आगे श्रीमती लगाये?
जब हमारे पास आपत्तियाँ आईं, एक आपत्ति तो आज ही आई जिसमें कहा गया कि आप पुरुष जानबूझकर हम महिलाओं के साथ इस तरह का अन्याय करते हैं, तो हमें लगा कि इसे सबके सामने रखना ही उचित है कि कहीं महिलाएँ ही तो स्वयं को श्रीमती अथवा सुश्री या कुमारी के साँचे में फिट रखना चाहतीं हैं? आज नारी जागरूक है तो वह स्वयं तय करे कि उसके नाम के आगे क्या लगाया जाये? इस बात का भी ध्यान रखा जाये कि खाली नाम न लिखने को कहा जाये क्यों कि बड़ों का नाम खाली लिया जाना अभी हमारी सभ्यता नहीं है।
महिलाएँ चाहें तो जब तक इस समस्या का निदान नहीं हो जाता हमें सभी के नाम के आगे सुश्री लिखने की छूट प्रदान की जाये। हम कहाँ तक पता करते घूमेंगे कि कौन विवाहित और कौन अविवाहित है? यदि किसी के पास हल हो तो वह भी बतायें ताकि आगे के लिए इस समस्या से बचा जा सके।

7 comments:

अल्पना वर्मा said...

Main sochti hun--'Shushri'-naam ke aage lagana sab se surakshit tareeka hai.

khali naam suNne mein hamen bhi achcha nahin lagataa.


Waise yahan Is arab desh mein is tarah ke sambodhano ka chalan nahin hai.agr ayesha hai to use ayesha hi bulate hain mrs ya miss nahin lagate...

Udan Tashtari said...

सुश्री लगाने में अगर किसी ने आपत्ति जताई है तो फिर वो मात्र जताने के लिए जताई है और वो हर हाल में आपत्ति करती हीं...ऐसे लोगों का कोई उपाय नहिं मात्र मौन रह जाने के.

Arvind Mishra said...

सुश्री और क्या ?

वाणी गीत said...

सिर्फ नाम ही लिखे जाने में क्या आपत्ति हो सकती है ...सुश्री , कुमारी और श्रीमती जैसे संबोधनों की लाचार क्यों बने नारी ...!!

बी एस पाबला said...

सुश्री लगाने में भी आपत्ति!?
उसे अपने महिला होने पर ही संशय होगा :-)

बी एस पाबला

Mithilesh dubey said...

सवाल तो आपका बहुत ही पेचीदा है, शायद किसी के पास जवाब हो ।

वन्दना said...

dekhiye sushri bhi uchit hai aur agar us par bhi aapatti ho to simple naam hi likh diya karein jaise purushon ka likha jata hai vaise sensible tarika to sushri hi hai.