04 November 2009

कैसे गुजर जाता है समय पता नहीं चलता????

आज ब्लाग पर आये हुए पूरा एक वर्ष और छह माह हो गये हैं। इन डेढ़ वर्षों में ब्लाग संसार के बहुत से खट्टे मीठे अनुभव रहे। कुछ नया करने का विचार आया, उन्हें अंजाम भी दिया। किसी काम में सफल रहे तो किसी काम में असफलता हाथ लगी। सफलता-असफलता को जीवन से ही सीखा है इस कारण किसी तरह की मानसिक दिक्कत नहीं हुई।
ब्लाग से जुड़े लोगों का सहयोग भी मिला और जितना हमसे हो सका हमने सहयोग देने का प्रयास किया। इधर बहुत से लोगों की हमसे इस सम्बन्ध में निराशा जैसी स्थिति ही रही कि हम उनकी पोस्ट पर टिप्पणी करने में बहुत ही कंजूस हैं। हो सकता है कि किसी के लिए यह सही हो किन्तु सभी के लिए नहीं।
जैसा कि हम स्वयं के लिए अनुभव करते हैं कि जब पहली-पहली बार ब्लाग पर आये तो न जाने कहाँ-कहाँ ब्लाग बना दिये पर अपनी आसानी और कुछ सुविधाओं के कारण ब्लागर के ब्लाग को ही चालू रखा। जब हम पोस्ट करते थे तो उस समय लगता था कि कौन हमारा लिखा पढ़ रहा है और कौन नहीं पढ़ रहा?
इसके पीछे अपना लिखा पढ़वाना नहीं वरन् यह लालच था कि हम ब्लाग की प्रकृति के अनुसार लिख भी रहे हैं अथवा नहीं? बाद में जैसे-जैसे ब्लाग से जुड़ते गये तो लगा कि हम शुरुआत से आज तक वह नहीं लिख सके जो लिखा जा सकता है। फिलहाल, जहाँ तक टिप्पणी का सवाल है तो पहले-पहल जो लालच हमें रहता था वहीं लालच हर नये ब्लागर को रहता होगा (पुराने ब्लागर को इस तरह की लालसा नहीं पालनी चाहिए....शायद) तो हमारा ज्यादा से ज्यादा विचार यह होता है कि नये लोगों की पोस्ट पर टिप्पणी की जाये और ऐसा करते भी हैं। (इस बात के लिए पुरान ब्लागर साथी क्षमा करेंगे)
वैसे हम पुराने ब्लागर साथियों की पोस्ट पर भी टिप्पणी कर देते हैं पर हमेशा हिम्मत नहीं होती। इसके पीछे उनकी कलम का ताकतवर तरीके से किसी भी विषय को प्रस्तुत करने का ढंग होता है। इस कारण बजाय टिप्पणी करने के हम उनसे कुछ न कुछ सीखने की कोशिश करने लगते हैं। (आज तक भी किसी न किसी की नकल करके ही ब्लाग पर लिख रहे हैं)
नये लोगों को टिप्पणी के द्वारा प्रोत्साहित करते ही रहे हैं साथ में नये-नये लोगों को ब्लाग बनाकर लेखन के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। अभी तक लगभग 27 लोगों को ब्लाग बनवाकर ब्लाग संसार से जोड़ चुके हैं। इनमें से कुछ तो सक्रिय रूप से जुड़े हैं और कई सदस्य कुछ अन्तराल से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं।
इधर कुछ न कुछ नया करने का लगातार प्रयास जारी है। शब्दकार और पहला प्रयास (दोनों सामुदायिक ब्लाग हैं) इसी का परिणाम हैं। अब आगे विचार है कि एक तो समाचार ब्लाग बनाया जाये जो विशेष रूप से बुन्देलखण्ड के समाचारों का प्रकाशन समय-समय पर किया करे। इसके अलावा दो ब्लाग और संचालित करने की योजना है। इस पर काम शुरू होते ही आप लोगों के सामने प्रस्तुत करेंगे।
हमेशा की तरह इस डेढ़ वर्ष के बालक का लड़खड़ा कर चलना जारी है। आप बस निगाह रखें के उसके चाल-चलन (ध्यान दें चाल-चलन) में किसी तरह का भटकाव न आने पाये। शेष समय तो अच्छी तरह से कट ही रहा है।
चित्र गूगल से साभार
विशेष ----
1 वर्ष 6 माह और ये पोस्ट है 298 वीं

4 comments:

दिगम्बर नासवा said...

बधाई ......... 1 वर्ष 6 maheene .......... lamba anubhav है आपका ..........

पी.सी.गोदियाल said...

डा० साहब, अभी बहुत दूर जाना है, पीछे मत देखिये ! रॉबर्ट फ्रोस्ट की कविता याद आ रही है;
THE WOODS ARE LOVELY, DARK AND DEEP
BUT I HAVE PROMISES TO KEEP
AND MILES TO GO BEFORE I SLEEP
AND MILES TO GO BEFORE I SLEEP

Udan Tashtari said...

वाह जी, डेढ़ सालाना बधाई एवं शुभकामनाएँ एवं पोस्टों के तृतीय शतक की अग्रिम बधाई.

परमजीत बाली said...

हमारी भी बधाई स्वीकारें।