15 October 2009

माइक्रो पोस्ट - पानी के लिए भटके फिरें......

बचपन में एक दोहा पढ़ रखा था-
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून।।

आज का दोहा, इसी सन्दर्भ में-
मानुष पानी राखते, बिन पानी सब सून।
पानी को भटके फिरें, धरती हो या मून।।


4 comments:

GATHAREE said...

moon par sab desh mil kar PAANI khoj rahe hain aur dharti par ek doosare ka utar rahe hain

परमजीत बाली said...

बहुत सही।

Udan Tashtari said...

एकदम सटीक नव-दोहा. :)

डॉo लखन लाल पाल said...

bhaisahab theek kahte hain aap.