15 May 2009

दो लाइन की पोस्ट - एक सवाल

फिरसे एक छोटा सा सवाल -

भारतीय जनता पार्टी से मीडिया को,

राजनैतिक दलों को इतनी इलर्जी क्यों है?

8 comments:

तपन शर्मा said...

iska jawaab yahaan hai:

http://tapansharma.blogspot.com/2009/04/blog-post.html

बी एस पाबला said...

ये मामला एक टिप्पणी से निपट जायेगा क्या? :-)

नीरज गोस्वामी said...

छोटा सा जवाब: "पता नहीं क्यूँ ?

Suresh Chiplunkar said...

ये लो जी, आप तो एक सुपर-माइक्रो पोस्ट लिखकर अलग निकल लिये, लेकिन हमें टिप्पणी में कम से कम 5 पोस्ट लिखनी पड़ेंगी… इसलिये फ़िर कभी… :)

संजय बेंगाणी said...

उसकी राष्ट्रवादी विचारधारा उनके हितों के आड़े आती है.

AlbelaKhatri.com said...

kyonki bhartiya janta party me sabse pahale bharat hai,bharat k baad janta hai aur aakhir me party hai...........is kram ko keval vahi pasand kar sakta hai,jo tan-man se poorna bhartiya ho jab ki media toh aaj kahane bhar ko bhartiya hai, inki bagdor toh bahurashtriya shktiyon k hath me hai aur anya rajneetik dalon ko bharat se kuch matalab nahi hai,unhen keval aur keval apna ghar dikhta hai

Udan Tashtari said...

१६ तारीख के बाद पूछते तो कुछ यूँ लिखते:

भारतीय जनता पार्टी से अधिकतर लोगों को इतनी इलर्जी क्यों है?

:)

-एक कांग्रेसी सिपाही!

Udan Tashtari said...

आ गया जबाब जनता का.
समीरानन्द स्वामी की भविष्यवाणी सच हो गई.

सब भक्त बन जाओ अब उनके. :)