13 April 2009

राम और हिन्दू ही साम्प्रदायिक क्यों लगते हैं?

देश में जब भी चुनावों का मौसम होता है तो उसमें अन्य मुद्दों के साथ-साथ ‘‘हिन्दू’’ भी एक मुद्दा होता है। भाजपा एक मुद्दा होती है, धर्मनिरपेक्षता भी मुद्दे का रूप लेकर सामने आती है, मुसलमान भी एक मुद्दा होता है, बाबरी मस्जिद मुद्दा होती है, राम मन्दिर मुद्दा होता है, कंधार कांड मुद्दा होता है। इस बार भी ये सब मुद्दे हैं। कुछ नये रूप में हैं कुछ पुराने रूप में हैं। कुछ के साथ नये लोग जुड़े हैं तो कुछ के साथ पुराने लोग जुड़े हैं।
वर्तमान लोकसभा चुनावों में तमाम सारे मुद्दों के बीच चले एक जूते ने सिख दंगों को भी मुद्दा बना दिया। एक जूता क्या चला पूरा का पूरा मुद्दा ही चल निकला। फिलहाल तो इस पर चर्चा नहीं। चर्चा यह कि चाहे मीडिया हो या नेता सभी की आँख की किरकिरी बनते हैं राम, अयोध्या, हिन्दू, आडवानी, मोदी, गुजरात। इस बार भी बने। आलोचनाओं का, आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चला, हिन्दू साम्प्रदायिक लगा और शेष सारे धर्म सहिष्णु दिखे। ऐसा क्यों?
यह सत्य है कि धर्म के नाम पर किसी को भी हत्या करने, दंगा करने का अधिकार नहीं है, होना भी नहीं चाहिए। यदि ऐसा है तो उसका विरोध हो। इसके बाद भी यदि विरोध मात्र इस कारण से हो रहा है कि फलां व्यक्ति हिन्दू है या फलां व्यक्ति हिन्दुओं की बात करता है तो यह गलत है।
धर्म निरपेक्षता है क्या? और साम्प्रदायिकता क्या है? यदि कोई व्यक्ति सिर्फ हिन्दू हित की बात करता है और किसी दूसरे धर्म को हानि नहीं पहुँचाता है तो क्या वह साम्प्रदायिक है? कोई व्यक्ति गैर-हिन्दुओं के हितों की बात करता है और हिन्दुओं के नोताओं, आराध्यों का अपमान करता है तो क्या वह धर्मनिरपेक्ष हो जायेगा? इस प्रकार के सवालों पर भी राजनीति कर ली जाती है।
बार-बार हमने यह कहा है कि यदि यह मान भी लिया जाये कि गोधरा कांड और गुजरात के दंगे भाजपा ने करवाये हैं, हिन्दुओं ने करवाये हैं तो भी क्या सिर्फ गुजरात दंगों के पीड़ितों को याद किया जायेगा और गोधरा कांड के मृत लोगों को हिन्दू समझ कर कोसा जाता रहेगा? क्या गोधरा में मरने वाले आदमी नहीं हैं? क्या उनके प्रति हमारे मन में सम्वेदनायें नहीं होनी चाहिए?
इसी तरह से गुजरात दंगों के लिए समूचे हिन्दू समुदाय को, बाबरी कांड के लिए पूरे हिन्दू धर्म को, भाजपा को दोषी ठहराया जाता है। क्या वाकई इसके लिए सिर्फ हिन्दू ही दोषी है? यदि ऐसा है तो 1984 के सिख दंगों के लिए भी हिन्दुओं को दोष देना होगा क्योंकि भले ही वे किसी एक राजनैतिक दल के द्वारा भड़काये गये हों (जैसा कि आरोप लगाया जाता है) तो भी उनमें हिन्दू शामिल थे।
हिन्दुओं का नाम लेकर आगे बढ़ने वाले दल भाजपा का नाम लेकर हिन्दुओं को गाली देनी बन्द करनी होगी। किसी भी बात के लिए मोदी, आडवानी आदि को बुरा कहना और इनके परिप्रेक्ष्य में हिन्दुओं को बुरा-भला कहना कहाँ तक न्यायसंगत है। एक कंधार कांड के लिए हिन्दुओं का चेहरा घोषित कर आडवानी, भाजपा को दोष देने वाली राजनैतिक पार्टी यह भूल जाती है कि किसी जमाने में एक मंत्री पुत्री को बचाने के लिए भी आतंकवादियों को छोड़ा गया था। यहाँ तो सैकड़ों व्यक्तियों की जान को खतरा था। इस घटना को सामने लाकर भाजपा को दोष देना और फिर धीरे से भाजपा का नाम लेकर हिन्दुओं को गाली देने का काम अब बन्द करना होगा।
धर्मं निरपेक्षता क्या है इसे अभी राजनैतिक दलों को, राजनेताओं को समझना होगा। किसी एक समुदाय को अपना वोट बैंक समझ कर अपने पड़ोसी देश तक की हरकतों को नजरअंदाज करने की आदत को छोड़ना होगा। कुछ भी करते रहिए पर यह भी याद रखिएगा कि तालिबान हमारे देश की सीमा से बहुत दूर नहीं हैं।

चुनावी चकल्लस-

यूँ हम तुम्हारे इशारे पर तारे तोड़ लायें,
तुम कहो तो अपनी हद से गुजर जायें,
बस एक बार हमें बिठा दो गद्दी पर,
फिर देखना कैसे हम अपनी रंगत बदल जायें।

6 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

न हिन्दू दोषी है और न मुसलमान दोषी हैं। दोषी वे लोग हैं जो कहते हैं कि हिन्दू और मुसलमान दोषी हैं। कोई भी हिन्दुओं को साम्प्रदायिक नहीं कहता है। केवल भाजपा और संघ वाले कहते हैं कि छद्म धर्मनिरपेक्ष लोग हिन्दुओं को साप्रदायिक कहते हैं। असल में संघ, भाजपा, शिवसेना आदि संगठन खुद को ही सम्पूर्ण हिन्दु समाज समझते हैं। इसी तरह कुछ संगठन खुद को संपूर्ण इस्लाम समझते हैं। सब से बड़े साम्प्रदायिक वही हैं जो खुद को एक धर्म के धर्मावलम्बियों की समष्टि समझ बैठते हैं।

अक्षत विचार said...

बहुत अच्छा आलेख लिखा है आपने आज सिर्फ नेताओं को ही नहीं बल्कि मीडिया की भी कठोर आलोचना करनी होगी तभी सुधार आयेगा।

श्यामल सुमन said...

मजहब का नाम केकर चलती यहाँ सियासत।
रोटी बड़ी या मजहब हमको जरा बताना।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Anonymous said...

na hindu doshi hai,na musalman.ye to voteton ke hi tay karna hai ki kise apna vote diya jaye.6 sal satta pe rahi us bjp ko jo ram ke nam par mandir na bana saki,jo Bhagvan Ram apne pita ka vachan nibhane 14 sal vana me chale gaye the. aur aaj unke nam par satta ki ladai karnewali BJP ya Musalmano ke hamdard kahakar unki bhavnaon se khelnewali congress?

संजय बेंगाणी said...

"राम और हिन्दू ही साम्प्रदायिक क्यों लगते हैं?"

क्योंकि इन्हे साम्प्रदायिक बताने में खतरा नहीं.

naveentyagi said...

जब तक भारत में जयचंदों का बोलबाला रहेगा राम साम्प्रदायिक रहेगे. आपने लिखा है तालिबान हमारे देश से दूर नहीं है, ये बात गलत है . भारत में लगभग १००००० मदरसों से २०००००० तालिबानी अब तक तैयार हो चुके है. जिन्हें भारत में ही कई स्थानों पर बसा दिया गया है. आने वाले लगभग १० सालों में इस बारूद को चिंगारी जरूर दी जायेगी.