03 April 2009

डरते-डरते रामनवमी की शुभकामनायें

रामनवमी का दिन आज राम के वनवास का दिन हो गया है। एक तो राम ऊपर से चुनाव का समय, अच्छे-अच्छे घबरा रहे हैं आचार संहिता से। रामनवमी पर आचार संहिता का क्या काम? हम भी यही सोच रहे थे क्योंकि हमारे एक परिचित ने कुछ ऐसा कहा कि इस पर ध्यान गया।
हमारे उन परिचित सज्जन का कहना था कि राम आजकल भाजपा के पाले में हैं और जिस तरह से चुनाव आयोग सख्ती दिखा रहा है उससे लगता है कि राम का नाम न लिया जाये तो अच्छा है। हमें अपने उन परिचित पर हँसी आई और तरस भी आया।
हँसी इस कारण कि अब भगवान भी किसी न किसी के पाले में हैं। (पता नहीं कि पाले का तात्पर्य उनकी तरफ होना है या इस पाले का अर्थ पालन-पोषण से है) यह इस कारण से कि आज के जमाने में भगवान को मानने या न मानने वालों की संख्या लगभग बराबर मिल जायेगी किन्तु न मानने वालों के कुतर्क ही यह सिद्ध करते हैं कि भगवान का पालन-पोषण इंसान ही कर रहा है। बहरहाल............. तरस इस बात पर आया कि चुनाव आयोग के कुछ कदमों से आम आदमी इस कदर भयभीत है कि कुछ कहने-सुनने-समझने की स्थिति में नहीं है। हमारे वे परिचित भी आयोग फोबिया का शिकार समझ में आते हैं।
चुनाव, चुनाव आयोग, आचार संहिता, राम, चुनाव निशान इन सब पर हमारे परिचित और समाचार पत्र में छपे एक समाचार ने सोचने पर विवश कर दिया।
आज एक समाचार छपा था कि चुनावों तक प्राथमिक विद्यालयों में टीएलएम के नाम पर बनाये गये फलों, फूलों, जानवरों आदि के चित्रों को पुताई करवा कर छिपाया जायेगा। आपको बतादें कि एक-एक जिले में इन्हें बनवाने का खर्च लाखों रुपये आया है। चुनाव आयोग इसके पीछे कारण बताता है कि इनमें से ज्यादातर को चुनाव चिन्हों के रूप में आवन्टित किया गया है और स्कूलों में बने ये चित्र चुनावों को प्रभावित करेंगे।
ठीक इसी तरह से राम अब भाजपा के प्रतीक हैं, साम्प्रदायिकता के प्रतीक हैं, विध्वंस के प्रतीक हैं, नारी शोषण के प्रतीक हैं, दलित विरोध के प्रतीक हैं, हिंसा के प्रतीक हैं, हिन्दुत्व फैलाने के प्रतीक हैं.......क्या-क्या बतायें...राम अब बुरे कामों के ही प्रतीक हैं। अब ऐसी स्थिति में रामनवमी पर राम का नाम कैसे लिया जाये?
हम भी तो डरते-डरते राम के बारे में कुछ लिख रहे हैं, रासुका लगने का भी डर है। राम एक सम्प्रदाय के विरुद्ध बालने को भी प्रेरित करते हैं, नाक-कान काटने को भी प्रोत्साहित करते हैं, धनुष-वाण जैसे अस्त्र-शस्त्र को प्रोत्साहन देते हैं।
डरते-डरते ही सही आप सबको रामनवमी की शुभकामनायें देते हैं। (रात का वक्त इसीलिए चुना कि पूरे दिन का जायजा लिया जा सके। कहीं राम के नाम पर कोई पिटा तो नहीं? राम के नाम पर कोई पकड़ा तो नहीं गया? राम के नाम पर किसी की भावनायें आहत तो नहीं हुईं? राम के नाम पर किसी को रासुका तो नहीं लगी? नहीं कुछ भी ऐसा नहीं दिखा.................उफ!)
चलिए अभी तक तो ऐसा कुछ भी होता नहीं लगा............तो आप लोग रामनवमी की शुभकामनायें स्वीकार करे, बिना पूर्वाग्रह के और दिल से बोलें ‘‘जय श्री राम’’ (कहीं ये तो साम्प्रदायिक नहीं?)

चुनावी चकल्लस-

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नोट बटेंगे, वोट मिलेंगे,
खुलेआम सब काम करेंगे।
डर होगा, तुमको होगा,
हम बेफिक्र मस्त रहेंगे।
करले जो करना है जिसको,
हमतो अपना काम करेंगे।
शोर मचेगा, मचने दो,
हम सबको झूठा कर देंगे।

2 comments:

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

वोटो की खातिर राम को विवादास्पद तो कर ही दिया सौदागरों ने . राम का नाम लेना एक पार्टी का सदस्य मान लिया जाता है उस पार्टी का जो राम को सिर्फ चुनाव मे ही याद करती है .
राम नवमी की सब को बधाई

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

भाई डर काहे का राम तो सारे देश और देश की पार्टियो के और सबके है . राम भगवान से बढाकर कोई पार्टी नहीं है . नवरात्रि की शुभकामना