30 January 2009

आइये शहीदों को याद करें....

आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है। देश में सभी स्थानों पर, सरकारी कार्यालयों में, शिक्षण संस्थानों में, छोटी-बड़ी संस्थाओं में इसको अपने-अपने स्तर से मनाने की होड़ सी लगी है। यहाँ होड़ इस कारण से कहना सही लग रहा है क्योंकि सब किसी न किसी रूप में आज के दिन अपने आपको गांधी जी का सबसे बड़ा भक्त सिद्ध करने की जुगाड़ में लगे रहते हैं। कईयों का जुगाड़ सिद्ध भी हो जाता है, कईयों का नहीं भी हो पाता है। आज का दिन कई लोगों के लिए छुट्टी मनाने का दिन हो जाता है।
छुट्टी का तो जनाब ये हाल है कि लोग राष्ट्रीय पर्वों पर भी राष्ट्रीयता को भुला कर उस दिन भी पारिवारिक पिकनिक मना लेते हैं। वैसे राष्ट्रीय पर्वों पर शामिल होना न होना ही किसी के देशभक्त होने या न होने की पहचान नहीं हैं पर जिन शहीदों के न्योछावर होने के कारण हमें आजादी मिली है कम से कम हम उनको तो इस दिन याद कर लें।
शहीदों को याद करने से अधिक जरूरी यह लगता है कि काम की भागदौड़ में कभी-कभी तो एक दिन मिलता है कि हम अपने परिवार के साथ, अपने यार दोस्तों के साथ मिल बैठ सकें, गपशप कर सकें, क्लबों, पबों में जाकर थिरक सकें। आखिर शहीदों ने तो अपनी जान देकर हमें आजादी दिला दी और अगर हम उस आजादी का आनन्द न उठा सकें तो ये शहीदों का अपमान नहीं होगा? बिलकुल सही शहीदों का अपमान नहीं होना चाहिए भले उन्हें याद कर सकें या न कर सकें।
अब सवाल रहा याद करने का तो याद कैसे करें न तो शहीदों के बारे में किसी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है न किसी कार्यक्रम में इनके बारे में बताया जा रहा है। इनकी जन्मतिथि, पुण्यतिथि पर तो कार्यक्रम होते भी है वे सम्बन्धित संस्था द्वारा अपना ही गुणगान करते बीतते हैं।
यही कुछ आज गांधी जी की पुण्यतिथि पर भी हो रहा है। उनके कार्यों को बताया जा रहा है, आज के दौर में उनकी प्रासंगिकता को सिद्ध किया जा रहा है, बच्चों को, युवाओं को, अन्य सभी को उनसे कुछ न कुछ सीखने की सलाह दी जा रही है किन्तु बताने वालों द्वारा उस पर अमल नहीं किया जा रहा है। चलिए गांधी जी के सिद्धांतों पर अमल करते हैं, उनके विचारों को आत्मसात करते हैं.............क्या कहा कैसे? आइये एक साथ पिक्चर हाल में या फिर डीवीडी या वीसीडी के द्वारा गांधीगीरी सिखाती हुई फिल्म देखते हैं। कहिए है न बढ़िया आइडिया..........शहीदों को याद भी कर लिया, उनको नमन भी कर लिया, उनके सिद्धांतों को भी समझ लिया और साथ में परिवार, मित्रों आदि के साथ मनोरंजन भी कर लिया। यही है आधुनिक जीवन शैली का शार्टकट फंडा।

2 comments:

अनिल कान्त : said...

सिंह साहब बहुत खूब रहा आपका लेख .....काबिले तारीफ


अनिल कान्त
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

संगीता पुरी said...

आज के दिन के अनुरूप रहा आपका आलेख....आइए शहीदों को याद करें।