03 December 2008

देन ओके

आज की अपनी नई पोस्ट लिखने से पहले भूल सुधार. पिछली पोस्ट में बाल साहित्य को लेकर एक ब्लॉग बाल मेला बनाने की बात लिखी थी, उसमें दी गई मेल भूलवश ग़लत लिख गई है. कृपया उसको baalmela@gmail.com पढ़ा जाए।
असुविधा के लिए क्षमा........ अब आज की पोस्ट. इस पोस्ट में एक चुटकुला है जो हमारे एक मित्र डॉ0 डी0 के0 सिंह ने सुनाया था. इसमें आज के समय की आर्थिक सोच का इतना अच्छा चित्रण है की वाह!!! वाह!! कहे दिल न माना. आज के समाज में जिस तेजी से आर्थिक संभावनाओं के कारण रिश्तों में बदलाव आ रहे हैं, आपसी संबंधों की स्थापना हो रही है उसे दर्शाया गया है. चुटकुला अपने आप में अच्छा चित्रण करता है आज की आर्थिक सोच का. इसमें जो नाम आए हैं वो सिम्बल हैं.........कृपया उनके चाहने वाले अन्यथा न लें.............
चुटकुला यूँ है................
एक पिता ने अपने पुत्र से कहा की तुम मेरी पसंद की लड़की से शादी करोगे। लड़के ने कहा इम्पोसिबिल. पिता ने कहा नहीं तुमको मेरी ही पसंद की लड़की से शादी करनी होगी. लड़के ने थोड़ा तेज स्वर में कहा नहीं मैं अपनी ही पसंद की लड़की से शादी करूंगा. तब पिता ने कहा मैंने जो लड़की पसंद की है वो बिल गेट्स की बेटी है. ये सुनकर लड़का नम्रता से बोला "देन ओके."
अब पिता बिल गेट्स के पास पहुँचा और बोला मैं अपने लड़के की शादी आपकी बेटी से करना चाहता हूँ। बिल गेट्स ने कहा तुम हो कौन? तुम्हारी फोटो या कोई समाचार कभी किसी अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका में नहीं देखा. पिता बोला साधारण इंसान हूँ. बिल गेट्स ने तल्ख़ होकर कहा फ़िर अपनी बेटी की शादी तुम्हारे बेटे के साथ क्यों कर दूँ? पिता बोला मेरा बेटा वर्ल्ड बैंक का असिस्टेंट मैनेजर है. ये सुनकर बिल गेट्स हंसकर बोला "देन ओके."
अब पिता वर्ल्ड बैंक के निदेशक के पास गया और बोला मेरे बेटे को यहाँ असिस्टेंट निदेशक बना दो. निदेशक ने कहा तुम्हारा बेटा करता क्या है? पिता बोला कुछ नहीं, अर्थशास्त्र पड़ता है. वर्ल्ड बैंक के निदेशक ने मजाक भरे स्वर में कहा यहाँ बहुत से लोग आते हैं जो अर्थशास्त्र के अंतर्राष्ट्रीय विद्वान हैं, वे भी ये नौकरी नहीं पा सके. तुम्हारे बेटे में ऐसा क्या है कि ये नौकरी उसे दी जाए? पिता ने कहा वो बिल गेट्स का होने वाला दामाद है। तब निदेशक ने विनम्रता से कहा "देन ओके."
देखा आपने किस तरह एक बात को नकारते हुए भी सभी लोग मानते गए. एक साधारण युवक भी धन की लालसा में कहता है "देन ओके" और धनी और धनी होने की तृष्णा में कहता है "देन ओके." यही गणित है आज की मौद्रिक नीति का. आज के आर्थिक युग का यही सच है. हर कोई धन की चमक के वशीभूत होकर कहता है "देन ओके."

1 comment:

Udan Tashtari said...

क्या राजनिति है भाई..इन सज्जन को तो भारत का पी एम बनाओ..सब तरफ सेटिंग बैठाल देंगे..वाह!!!