06 June 2008

मीडिया-मीडिया का खेल

आइये मीडिया-मीडिया खेलें, क्या कहा खेल नहीं सकते, क्यों, क्या हुआ? आजकल कुछ भी करना कठिन हो सकता है पर मीडिया-मीडिया खेलना सबसे सरल है। बस करना इतना है कि किसी भी एक समस्या/किसी एक ख़बर को चुन लीजिये। क्या........... कोई समस्या ही नहीं, कोई ख़बर ही नहीं। कोई बात नहीं समस्या या ख़बर न भी हो तो भी चलेगा। वैसे भी मीडिया वालों के पास कौन सी ख़बर रहती है। किसी पहलवान को लगातार दिखाते रहना क्या ख़बर है? धारावाहिक की स्टोरी बताना क्या ख़बर है? फिल्मों की गपशप दिखाना क्या ख़बर है? जो ख़बर न भी हो उसको ब्रेकिंग न्यूज़ बताना क्या ख़बर है? यदि मीडिया के लिए ये सब खबरें हो सकती हैं तो हम भी ख़बर पैदा कर मीडिया-मीडिया खेल सकते हैं।
चलिए हम आपको बताते हैं कि करना क्या है। किसी भी घटना जिसके बारे में न तो आपको पता हो और न किसी अन्य को उसको चुन लीजिये। जैसे कि किसी दिन आपकी काम वाली बाई नहीं आती या किसी दिन आपके यहाँ ढूध देने वाला नहीं आता या इसी तरह की तमाम सारी बातें जो आपको लगती हो कि ख़बर बनने लायक हैं, चुन लीजिये और हो जाइये पोस्टमोर्टुम करने को तैयार।
अब आप निकल पढिये इस तरह से कि जो घटना हुई है उस पर आपसे अधिक जानकारी किसी के पास नहीं है। इसी के साथ तैयार करिये तमाम सरे उल्टे-सीधे सवाल जिनका इस घटना से कोई लेना देना न हो पर लगे ऐसा जैसे इसी घटना से संबंधित हैं। मसलन यदि आपकी बाई नहीं आई है तो आपका मीडियापन चालू हो कुछ इस तरह -
आज काम वाली बाई नहीं आई है, तो आपको क्या लगता है कि क्या घर का काम नहीं होगा?
आपको क्या लगता है कि बाई क्यों नहीं आई?
क्या काम वाली बाई को कोई दूसरा काम मिल गया या उसके द्वारा ये अल्टीमेटम है अपनी पगार बढाने को?
ऐसे एक नहीं अनेक सवाल हैं जो आपके मन में घूम रहे होंगे चलिए आपको लिए चलते हैं सीधे अपने संवाददाता मिस्टर एक्स के पास जो खड़े हैं इस समय बाई के घर के सामने, ठीक बाई के घर के सामने।
(यहाँ आपको अब करना ये है कि एकदम से बाई की समस्या या उसके घर के भीतर का हाल नही बताना है, थोडी देर इधर-उधर की बात करिये, ऐसे दिखाइए जैसे आपने समस्या का हल निकल लिया है और किसी भी समय सबके सामने धमाका कर देंगे, तब तक पब्लिक को विज्ञापन का जायका दिलवाइये)
हाँ तो आप देख रहे हैं कि बाई के घर के सामने कितनी भीड़ जमा है, लगता है बाई के न आने की समस्या से बहुत सारेलोग परेशां हैं। हम आपको बाई के घर की ये तस्वीरें सबसे पहले दिखा रहे हैं, एकदम एक्सक्लूसिव सिर्फ़ हमारे ब्लॉग टी० वी० पर। आइये देखते हैं कि बाई के न आने पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?
सबसे पहले आपसे, आज जब आपके घर बाई नहीं आई तो आपको पता कैसे लगा? सबसे पहले आपने क्या किया? (क्या ये बाई आपके घर काम नहीं करती है आप मीडिया को देख कर जमा हैं)
चलिए आपको बताते चलें कि बाई के न आने की गंभीर हरकतें आजकल हमारे समाज में बहुत होने लगीं हैं। आप भी हमारे साथ भाग लीजिये और अपनी राय से हमें अवगत करायें। हमारा इस घटना को लेकर आज का सवाल है कि क्या बाई के न आने की समस्या से घर की महिलाओं को दिक्कत हो रही है?
हमारे जवाब हैं
(अ) हाँ
(बी) नहीं
(सी) महिलाओं को काम करने की जरूरत है
(डी) बाई के न आने से पुरुषों को काम करना पड़ता है
आप अपना जवाब हमे एस एम् एस से भेजें। अपना जवाब देने में लिखें BAI अ बी सी या डी और भेजें 420420 पर, या फोन करें 2008420 पर और अपनी राय से अवगत करायें।
आपको क्या लगता है कि ये समस्या छोटी है? हम जल्दी ही पर्दाफाश करेंगे बाई के आज न आने का राज तब तक लेते हैं एक छोटा सा ब्रेक।
कहिये आप सब कर सकते हैं ये सब या नहीं? मीडिया आजकल और कर क्या रही है? याद करें तो पाएंगे कि विगत कई दिनों से आरुशी-हेमराज हत्याकांड में मीडिया भी तो यही कर रही है।

1 comment:

Udan Tashtari said...

आपको क्या लगता है कि ये समस्या छोटी है?

-अरे, छोटी कहाँ जनाब! हमें तो यह महिला उत्पीड़न का मामला लगता है. नारी शक्तियाँ आती ही होंगी. ब्लॉग टीवी के दफ्तर में पथराव करने. शुभकामनाऐं आपको.

-वैसे लिखा बेहतरीन है. :)